भागवत कथा के अंतिम दिन भक्तिरस में डूबा केशवना

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केशवना. कस्बे में चल रही सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन गुरुवार को कथावाचक कृपाराम महाराज ने कृष्ण-रुकमणी के मिलन व उनके विवाह का प्रसंग सुनाया। साथ ही कृष्ण के गरीब मित्र सुदामा के भगवान से मिलने आने का सुंदर वर्णन किया। कथा के अंत में कृष्ण के सशरीर दिव्यलोक पहुंचने का वर्णन भी किया। संत ने लोगों को जीवन के उद्धार के लिए कलयुग में हरि कीर्तन करने को कहा। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हाथ से काम, मुख से राम का जाप करना चाहिए। संत ने लोगों को प्रेरणा स्रोत बनने का आग्रह किया। वहीं वसुधैव कुटुम्बकम को आधार बताते हुए सम्पूर्ण विश्व को अपना परिवार मानकर चलने की बात कही। गुरु राजाराम ने युवाओं को व्यसन और फैशन को छोड़कर सत्संग को अपनाने का संदेश दिया। बाल संत घनश्याम व जगदीश ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में कृष्ण-रुकमणी व सुदामा की मनमोहक झांकियों का भी चित्रण किया गया। जिसे देख हर कोई भाव विभोर हो उठा। कथा के दौरान पांडाल में मौजूद महिला-पुरुष व युवा भक्तिरस में डूबे नजर आए। कथा में पहुंचे अतिथियों, दानदाताओं व कार्यकर्ताओं का व्यासपीठ की ओर से स्मृति चिह्न देकर बहुमान किया गया। कथा के दौरान वृंदावन से भारतभ्रमण पर निकली साध्वी श्यामाप्रिया का भी सान्निध्य रहा। साध्वी ने गुरु की महिमा बताते हुए सभी लोगों को तम्बाकू व नशे जैसी बुरी आदतों को गुरु दक्षिणा के रूप में अर्पण करने को कहते हुए नशामुक्ति का संदेश दिया। सुबह 9 बजे कथावाचक ने योगा सत्र चलाया। जिसमें सभी लोगों को योग, व्यायाम व प्राणायम करवाते हुए योग का महत्व बताया गया। मंगलवार रात्रि को कथावाचक ने युवाओं के लिए विशेष मोटीवेशन सत्र का आयोजन किया। जिसमें उन्होंने स्कूली विद्यार्थियों व युवाओं को लक्ष्य निर्धारित कर एकाग्रता से उसकी प्राप्ति के लिए प्रयासरत रहने की बात कही। इस सत्र में काफी संख्या में युवाओं, विद्यार्थियों व महिलाओं की उपस्थिति रही।

Dharmendra Kumar Ramawat Reporting
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