प्रकृति की पूजा करना हमारा कर्तव्य: ध्यानाराम

Dharmendra Ramawat

Updated: 27 Feb 2019, 12:10:29 PM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

भीनमाल. दासपां गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान गंगा सत्संग के तहत मंगलवार को कथावाचक वेदान्ताचार्य डॉ. ध्यानाराम महाराज ने कहा प्रकृति की पूजा करना और रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। प्रकृति हमारा पोषण करती है।
भागवत कथा में भी गिरिराज पर्वत का प्रसंग भी हमें यही शिक्षा देता है। अगर पेड पौधे व जंगल सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो अच्छी बारिश कैसे होगी। महाराज ने कहा कि आज के समय में पर्यावरण का सरंक्षण बहुत जरूरी है। महाराज ने भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि हमें अपने मित्रों के साथ भी स?ाान व्यवहार करना चाहिए। तथा विपत्ति में एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए। जिस प्रकार भगवान कृष्ण बाल्यकाल में नटखट व चंचल थे। उस समय वे स्वयं माखन चुराकर अपने मित्रों को खिलाते थे। वेदांताचार्य ने कहा कि मिट्टी से बने बर्तन मिट्टी में मिलता है, उसी प्रकार मानव का शरीर भी पंचतत्वों से निर्मित है। मनुष्य जीवन में जन्म मृत्यु आते जाते रहते है, मृत्यु कभी दुख नहीं देती है। अनायास ही हर व्यक्ति के अंदर सत्य है, लेकिन छल-कपट, राग-द्वेष के कारण छिप जाता है। महाराज ने कहा कि हमें भी अपने श्रेष्ठ लोगों, बडों माता-पिता व गुरूजनों आदर करना चाहिए। इनका अपमान करने से यश, धन, धर्म व किर्ति के साथ लोक-परलोक सब नष्ट हो जाता है।
महाराज ने कहा कि जिस घर में सत्संग होता है, उस घर में कभी कलह नहीं होता है। महाराज ने भागवत कथा के दौरान भगवान के बालरूप, कालिया नाग का दमन, गिरीराज पर्वत की महिमा का मार्मिक वर्णन किया। इस मौके वजाराम, जोईताराम, लच्छाराम, पीराराम, रामाराम, चुन्नीलाल, गोविंद, मनोज भाई, ब्रजेश भाई, हेमराज, खिमराज, प्रहलाद, रूपाराम व वचनाराम सहित कई लोग मौजूद थे।

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