सावों की सीजन में बेपरवाह प्रशासन, गांवों में हो रहे बाल-विवाह

सावों की सीजन में बेपरवाह प्रशासन, गांवों में हो रहे बाल-विवाह
Careless administration, child marriages happening in villages

Dharmendra Ramawat | Publish: Apr, 29 2018 11:06:09 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

कागजी खानापूर्ति के लिए प्रशासन चला रहा अभियान

सांचौर. क्षेत्र में सावों की सीजन के चलते हर गली मोहल्ले में शादी समारोह का आयोजन हो रहा है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से बाल विवाह को लेकर सजगता नहीं दिखाने से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में कहीं आणे के नाम पर तो कहीं गौने के नाम पर शादियों की धूम मची हुई है। साल भर तक चलने वाले विवाह समारोह के आयोजन को लेकर जहां प्रशासन अलर्ट रहने का दावा करता है, वहीं धरातल पर स्थिति कुछ और ही होती है। शादी की सीजन में प्रशासन के उदासीन रवैये से बालविवाह भी धड़ल्ले से हो रहे हैं, लेकिन कमजोर मुखबीर तंत्र के चलते प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगती है। ग्रामीण क्षेत्रों में देर रात तक चलने वाली शादी की रस्म को लेकर ना तो प्रशासनिक अमला मौके पर जानकारी के लिए पहुंचता है और ना ही कोई सरकारी नुमाईंदा। जिसकी बदैालत बाल विवाह जैसे आयोजनों से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे आयोजनों में प्रशासन के जिम्मेदार लोग भी शिरकत करते अक्सर देखे जाते हैं।
शादी के कार्ड पर ना जन्म तिथि ना उम्र
बाल विवाह रोकने के लिए क्षेत्र में विवाह समारोह के दौरान छपवाए जाने वाले शादी कार्ड को लेकर भी नियमों की अनदेखी की जा रही है। शादी कार्ड पर ना तो दूल्हे की और ना ही दुल्हन की जन्म तिथि का उल्लेख होता है। इसके बावजूद शहर में शादी कार्ड छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस संचालकों पर किसी तरह की सख्ती नहीं बरती जा रही है। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने शादी की सीजन में गावों की बात तो दूर शहर में भी शादी कार्ड छापने वाली दुकानों का ना तो निरीक्षण किया है और ना ही उन्हें पाबंद किया है।
सुस्त प्रशासन, मुखबीर तंत्र भी कमजोर
क्षेत्र में प्रशासन की सक्रियता के अभाव में जहां बाल विवाहों के आयोजन को लेकर आसानी से मेजबानी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कमजोर मुखबीर तंत्र से इस बार की शादियों की सीजन में एक भी बाल विवाह ना तो रुकवाया गया और ना ही प्रशासनिक अमले ने मुखबीर की सूचना पर कहीं दबिश दी। गंावों में ड्यूटीरत शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पटवारी व ग्रामसेवकों को भी प्रशासन को ऐसे आयोजनों की सूचना देने के स्पष्ट निर्देश हैं, लेकिन कई आयोजन होने के बावजूद किसी ने प्रशासन तक सूचना नहीं पहुंचाई। वहीं सूत्रों की मानें तो अधिकांश गांवों में तो ड्यूटी निभाने वाले कार्मिक ही नियमों को ताक में रखकर ऐसे ओयोजनों में भोजन का लुफ्त उठाने के लिए शामिल होते हैं।
यह है प्रावधान
बाल विवाह अधिनियम के तहत अगर कोई व्यक्ति ऐसे आयोजन करते हुए पाया जाता है तो उसे जेल तक हो सकती है। ऐसे आयोजनों में शामिल होने वाले हलवाई, टेंट व्यवसायी, नाई, पंडित व मेहमानों पर भी मामला दर्ज करने का प्रावधान है। वहीं बाल विवाह के आयोजन की सूचना देने वाले को प्रशासन की ओर से उचित इनाम भी दिया जाता है और उसका नाम गोपनीय रखा जाता है। इसके अलावा शादी कार्ड पर जन्मतिथि नहीं छापने पर संबंधित पिं्रटिंग प्रेस संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसका लाईसेंस रद्द करने का प्रावधान है।
पूर्व न्यायाधीश ने की थी पहल
क्षेत्र में बाल विवाह व मृत्युभोज को लेकर स्थानीय न्यायालय के पूर्व अतिरिक्त न्यायाधाीश ब्रजेश पंवार ने तालुका विधिक सेवा समिति के तत्वावधान में अभियान चलाया था। जिससे क्षेत्र में ऐसे आयोजनों पर अंकुश भी लगा था, लेकिन वर्तमाान में अभियान की उदासीनता की बदौलत क्षेत्र में नियमों को ताक में रखकर इस प्रकार के आयोजन हो रहे हैं।
इनका कहना है...
बाल विवाह को लेकर सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश कर रखे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्रामसेवकों व शिक्षकों सहित सभी स्तर के कार्मिकों को लिखित में निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं शादी कार्ड पर जन्म तिथि लिखना भी जरूरी है। ऐसे आयोजन की सूचना देने वाले को सरकार की ओर से इनाम देने का भी प्रवाधान है।
- पीताम्बरदास राठी, तहसीलदार, सांचौर

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