VEDIO : ग्रेनाइट से भरा टे्रलर पकड़ा गया तो मालिक छुड़ाने तक नहीं आया, ऑनलाइन जमा कराए 3 लाख

Dharmendra Ramawat

Updated: 11 Mar 2019, 10:01:50 AM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

जालोर. सांकरणा टोल पर गत गुरुवार रात को सैंट्रल जीएसटी टीम की ओर से पकड़े गए चार टे्रलर में से विचाराधीन एक के खिलाफ विभाग ने कार्रवाई करते हुए शनिवार देर शाम ऑनलाइन चालान के जरिए लाखों रुपए की टैक्स और पैनल्टी वसूल की है। जानकारी के अनुसार उदयपुर स्थित गणपति मार्बल एंड ग्रेनाइट की ओर से जनरेट किए गए ई-वे बिल के जरिए इस ट्रेलर में जालोर से ग्रेनाइट का माल भरा गया था, लेकिन जीएसटी टीम की नजर में इस कंपनी की पूरी डीटेल पहले से ही थी। जिस पर टीम को फर्जीवाड़े का अंदेशा हुआ। जिसके बाद इस टे्रलर को सांकरणा टोल से जालोर स्थित जीएसटी कार्यालय लाया गया। साथ ही ट्रांसपोर्टर के जरिए मालिक को स्वयं पेश होकर माल छुड़ाने की इत्तला दी गई। इसके बावजूद उदयपुर की इस फर्म का मालिक पेश ही नहीं हुआ और उसने जालोर में लगा रखे उसके कार्मिकों को कुछ घंटों के लिए आईडी और पासवर्ड दिए। जिसके जरिए ऑनलाइन चालान जमा कराने के बाद शनिवार देर शाम माल छुड़वाया गया। मालिक के खुद माल नहीं छुड़ाने की वजह से विभाग ने इस माल पर 18 प्रतिशत जीएसटी 47 हजार 426 रुपए और माल की वेल्यु के बराबर सौ प्रतिशत पैनल्टी 2 लाख 63 हजार चार सौ सत्तावन रुपए यानी कुल 3 लाख 10 हजार 901 रुपए वसूल किए हैं। वहीं क्षेत्राधिकार में नहीं होने से उदयपुर स्थित सैंट्रल जीएसटी कार्यालय में भी संबंधित फर्म की डीटेल भेजकर मामले की जांच पड़ताल के लिए अवगत करवाया गया है।
बिल में ये थी गड़बड़ी
जीएसटी टीम की ओर से सांकरणा टोल पर पकड़े गए चौथे ट्रेलर में भरे ग्रेनाइट का ई-वे बिल गुरुवार रात करीब साढ़े आठ बजे उदयपुर स्थित गणपति मार्बल एंड ग्रेनाइट से जनरेट किया गया था। जबकि टीम ने इस ट्रेलर को जालोर से ग्रेनाइट का माल ले जाते हुए 9 से 10.30 बजे के करीब सांकरणा टोल पर पकड़ा था, लेकिन इस बिल में माल को जालोर से डिस्पेच करने का कहीं भी उल्लेख नहीं था। ऐसे में टीम ने इस मामले को संदिग्ध मानते हुए इसके ट्रांसपोर्टर और फर्म मालिक को पेश होने के निर्देश दिए, लेकिन मालिक ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद जालोर में लगे उसके कार्मिकों ने फर्म की आईडी से ही ऑनलाइन टैक्स और पैनल्टी जमा करवाई।
ऐसे हुआ शक
सांकरणा टोल पर गुरुवार रात इस ट्रेलर के चालक की ओर से ई-वे बिल बताने के बाद अधिकारियों ने एक बार तो ट्रेलर को जाने दिया, लेकिन बाद में अधिकारियों को पता चला जिस फर्म ने ई-वे बिल जनरेट किया है, उसने पहले भी अन्य राज्यों से करोड़ों रुपए के माल की फेक बिलिंग कर रखी है। यानी ये फर्म पूरी तरह से फेक थी। इसके बाद अधिकारियों ने चार किमी तक इस टे्रलर का पीछा कर इसे दोबारा रुकवाया और बाद में इसे जालोर कार्यालय लाया गया।
अक्सर हाथ खड़े करते हैं मालिक
सूत्रों के मुताबिक फेक फर्म और फेक बिलिंग के मामले में पकड़े जाने के बाद अक्सर फर्म के मालिक इस तरह हाथ खड़े कर देते हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार अगर फर्म मालिक खुद यह माल छुड़ाता तो उसे 18 प्रतिशत जीएसटी और इतनी ही पैनल्टी यानी कुल 94 हजार 852 रुपए भरने पड़ते, लेकिन उसके नहीं आने से यह राशि 3 लाख के पार पहुंची। इस तरह यह साफ है कि ऐसे मामलों में फर्म मालिक पकड़े जाने के डर से माल को छोड़ देते हैं या फिर खुद सामने नहीं आते।
अगस्त 2018 में भी हो चुका है ऐसा
इससे पहले विभाग ने 29 अगस्त 2018 को भागली टोल प्लाजा पर ब्रांडेड पान मसाले और तम्बाकू से भरा कंटेनर जब्त किया था, लेकिन संबंधित कंपनी ने इस माल को छुड़ाया ही नहीं। इसके कार टीम ने विभागीय नियमों के तहत ट्रांसपोर्टर्र से पान मसाले और तम्बाकू पर लगने वाला अलग-अलग टैक्स और माल की सौ प्रतिशत वेल्यु के हिसाब से 16 लाख 64 हजार रुपए वसूल किए थे।
कार्मिकों ने मालिक की शक्ल तक नहीं देखी
जानकारी के अनुसार उदयपुर की यह फर्म किसी मनोज नायक के नाम से पंजीकृत है। जिसने उदयपुर के ही दो बेरोजगार युवाओं को जालोर में माल लोडिंग और अनलोडिंग के लिए लगा रखा था। अधिकारियों की ओर से की गई पूछताछ में इन युवाओं ने बताया कि उन्होंने खुद कभी फर्म मालिक की शक्ल तक नहीं देखी। उन्हें सिर्फ इसके लिए उसका फोन आता था। वहीं इसके लिए उन्हें हर महीने सैलेरी, किराया व अन्य भत्ते का भुगतान खाते में किया जाता था।

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