सेंट्रल जीएसटी जोधपुर कमिश्नरेट की 5 सर्च टीमों का जालोर में छापा, दो करोड़ से ज्यादा का घोटाला पकड़ा

Dharmendra Ramawat

Updated: 05 May 2019, 11:34:12 AM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

जालोर. सैंट्रल जीएसटी जोधपुर कमिश्नरेट की एंटी-ईवेजन टीम ने जालोर की ग्रेनाइट इण्डस्ट्री में दबिश देकर शुक्रवार को करोड़ों रुपए का घोटाला उजागर किया है। खुफिया तंत्र से मिली जानकारी के बाद जोधपुर से पहुंचे सीजीएसटी एंटी-ईवेजन टीम के सुप्रीडेंट अनिल ओझा, निरीक्षक केके पचार, हनुमान सुथार, संदीप कुमार, विशाल सोलंकी, पाली के भगतसंत व जालोर के नरेंद्र शेखावत समेत टीम में शामिल अधिकारियों ने शहर के औद्योगिक क्षेत्र तृतीय चरण में माली समाज छात्रावास के पास स्थित फर्म महादेव मार्बल एंड ग्रेनाइट पर दबिश दी, लेकिन यहां पहुंचने पर पता चला कि इस नाम की कोई फर्म यहां थी ही नहीं। जबकि यह फर्म वेट में रजिस्टर्ड थी और इसमें यहीं का पता दिया गया था। इसके बाद टीम ने इस फर्म से लेन-देन करने वाले जालोर के ही तीन बड़े ट्रांसपोर्टर, एक इ-मित्र संचालक और इस फर्म का लेखा-जोखा रखने वाले एकाउंटेंट के ठिकानों पर भी दबिश दी। इन जगहों से टीम को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हाथ लगे हैं। इस ग्रेनाइट फर्म का मालिक महेंद्रकुमार पुत्र रतनाराम माली ग्रेनाइट की बिक्री के बजाय दो से पांच हजार रुपए में बिलों का बेचान करता था। पिछले साल 1 अप्रैल 2018 से ई-वे बिल प्रणाली लागू होने के बाद ३१ मार्च 2019 तक इस फर्म ने एक इ-मित्र संचालक को खुद की आई-डी देकर सैकड़ों ई-वे बिल जारी करवाए और जांच में सामने आया कि इनमें से अधिकतर बिल केंसल कर दिए गए थे। इनमें से अधिकतर बिल अक्टूबर 2018 से फरवरी 2019 के बीचे तक के हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि कोई भी फर्म संचालक ई-वे बिल जनरेट करने के बाद 24 घंटे में उसे केंसल कर सकता है, लेकिन अधिकतर मामलों में टैक्स की चोरी के लिए फर्म संचालक माल डिलीवर होते ही बिल को केंसल कर देते हैं। जिससे यह माना जाता है कि उसकी ओर से किसी तरह की बिक्री की ही नहीं गई और ना ही उसकी कोई टैक्स लाइबलिटी बनती है। इस तरह इस फर्म ने करोड़ों के बिल जारी किए और राजकोष में जमा कराने के बजाय दो करोड़ से ज्यादा का टैक्स हजम कर लिया। इधर, जीएसटी सर्च टीमों के छापेमारी की भनक लगते ही फर्म मालिक मौके से फरार हो गया।
ऐसे बेचे जाते थे बिल...
जानकारी के अनुसार किसी भी उद्यमी को ट्रांसपोर्टर के जरिए उपभोक्ता तक माल की डिलीवरी देने के लिए ई-वे बिल की जरूरत पड़ती है। ई-वे बिल जनरेट करने वाली फर्म को माल पर लगने वाला टैक्स राजकोष में जमा कराना अनिवार्य है। ऐसे में फर्म मालिक ने फायदे को लेकर अन्य फर्मों के लिए सैकड़ों ई-वे बिल जनरेट किए। इसके लिए फर्म मालिक ने एक इ-मित्र संचालक को आईडी पासवर्ड दे रखे थे और प्रत्येक बिल बनाने के लिए उसे सौ रुपए का भुगतान किया जाता। इस तरह जालोर के कई ग्रेनाइट उद्यमियों व ट्रांसपोर्टर्स ने इस फर्म के ई-वे बिल से अन्य जिलों व राज्यों में माल भेजा और २४ घंटे में माल पहुंचने पर ई-वे बिल केंसल कर दिया जाता। वहीं कई मामलों में एक ही ई-वे बिल से एक से अधिक बार माल भेजा गया।
रिटर्न निल के...!
जोधपुर टीम के अधिकारियों के अनुसार करोड़ों रुपए के टैक्स की हेराफेरी के बारे में इस फर्म के एकाउंटेंट और ई-वे बिल जनरेट करने वाले इ-मित्र संचालक को भी पूरी जानकारी थी। फर्म के जरिए हर महीने लाखों की बिलिंग होने के बावजूद निल के रिटर्न पेश किए जाते रहे। जीएसटी टीम इससे संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर अनुसंधान के लिए साथ ले गई है। जांच के बाद चोरी किए गए टैक्स का आंकड़ा और बढऩे की संभावना है। इसके अलावा ई-वे बिल प्रणाली लागू होने से पहले भी इस फर्म के मालिक ने टैक्स की चोरी की होगी। जिसका अनुसंधान जारी है।
भरनी पड़ेगी राशि, नहीं तो होगी जेल
विशेषज्ञों के अनुसार दो से पांच करोड़ की टैक्स चोरी के मामले में पकड़े जाने पर आरोपी को सैंट्रल जीएसटी एक्ट के सेक्शन 132 के तहत 3 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।वहीं जुर्माना नहीं भरने पर सजा और बढ़ाई जा सकती है। मामले में एकाउंटेंट, इ-मित्र संचालक, ट्रांसपोर्टर और बिल खरीदने वाले उद्यमियों के खिलाफ भी प्रकरण बनाया जाएगा। फिलहाल अनुसंधान जारी है और मामले से जुड़े अन्य ट्रांसपोर्टर व व्यवसायियों के खिलाफ भी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है। वहीं आरोपी फर्म मालिक फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
एसबीआई के भी 9 लाख बकाया
इस फर्म के संचालक ने जालोर एसबीआई शाखा से करीब 9 लाख रुपए की सीसी लिमिट ले रखी थी। संचालक ने यह राशि भी बैंक से उठा ली और अब बैंक इस राशि की वसूली के लिए चक्कर काट रही है। खास बात तो यह है कि सीसी लिमिट के लिए एकाउंटेंट की ओर से बनाई गई बैलेंस शीट और स्टॉक की डीटेल पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। जीएसटी अधिकारियों का कहना है कि जब फर्म संचालक ने माल की खरीद ही नहीं की तो एकाउंटेंट की ओर से बैंक को स्टॉक का विवरण कैसे दिया गया।
कार्रवाई की है...
जालोर के थर्ड फेज में जोधपुर डिविजन की टीम ने फेक बिल्स को लेकर एक ग्रेनाइट फर्म संचालक के खिलाफ शुक्रवार को कार्रवाई की है। कार्रवाई में जालोर व पाली की टीम भी साथ थी। फर्म मालिक ने करोड़ों की टैक्स चोरी की है। वहीं इससे जुड़े लोगों के दस्तावेज जांच रहे हैं।
- अनिल ओझा, सुप्रीडेंट, एंटी-ईवेजन, सीजीएसटी टीम जोधपुर

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