नियम : मूवमेंट रजिस्टर में एंट्री कर नहीं दे सकते सभापति ने कहा मेरे चेम्बर में ही तो पड़ी हैं फाइलें
नियमानुसार कोई भी जनप्रतिनिधि, कार्मिक या अधिकारी पत्रावलियां नहीं ले जा सकता अन्यत्र

जालोर. नगरपरिषद की विभिन्न शाखाओं में लगे कार्मिकों की ओर से जनप्रतिनिधियों को मूवमेंट रजिस्टर में एंट्री कर एक के बाद एक पत्रावलियां दी जा रही हैं और ये पत्रावलियां लेने के बाद जनप्रतिनिधि कईदिनों तक संबंधित लिपिक को लौटाते ही नहीं।जबकि मूवमेंट रजिस्टर में एंट्री कर पत्रावलियां देने का कोईनियम तक नहीं है।खास बात तो यह है मूवमेंट रजिस्टर में एंट्री कर पत्रावलियां देने का यह नियम कुछ महीने पहले ही जालोर नगरपरिषद में शुरू किया गया है।इससे पहले कौनसी फाइल किसे और कब दी गई इस बारे में कोई पता तक नहीं लग पाया। इसी की वजह से नगरपरिषद से बार-बार पत्रावलियां गुम होने के मामले सामने आते रहे और इन मामलों में संदिग्धों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई, लेकिन नगरपरिषद अधिकारियों व कार्मिकों ने डीएलबी की ओर से बनाए गए नियम कायदों के बारे में ना तो जानकारी ली और ना ही फाइलें गुम होने के बावजूद इस प्रथा को बंद किया। गत फरवरी महीने की बात करें तो कृषि भूमि शाखा से संबंधित ऐसी सात पत्रावलियां सभापति भंवरलाल माली को मूवमेंट रजिस्टर में एंट्री कर दी गई जो करीब 18 दिन बाद भी संबंधित शाखा में नहीं पहुंची है। इस बारे में डीएलबी के वरिष्ठ संयुक्त विधि परामर्शी का कहना है कि नगरपरिषद की किसी भी शाखा से कोईजनप्रतिनिधि तो क्या कोई कार्मिक या अधिकारी भी पत्रावली को अन्यत्र नहीं ले जा सकता। जनप्रतिनिधि को उसी शाखा में पत्रावली का अवलोकन करने के बाद संबंधित कार्मिक को लौटाना जरूरी है। मूवमेंट रजिस्टर में एंट्री कर पत्रावली देने का कोईनियम तक नहीं है।
18 दिन से ये पत्रावलियां सभापति के पास
नगरपरिषद की कृषि भूमि शाखा से गत २२ फरवरी को सभापति ने मूवमेंट रजिस्टर में एंट्री के बाद सात फाइलें लाखाराम पुत्र खुमाराम, गीता देवी पत्नी लालूराम मेघवाल, लाछीदेवी पत्नी कुईयाराम माली की दो, कानाराम पुत्र देवाराम माली, मंजूदेवी पत्नी रामलाल माली व रामलाल पुत्र सकाराम माली की ली थी। जिन्हें १८ दिन बाद भी संबंधित शाखा के लिपिक को लौटाया नहीं गया है।
निर्देश दिए तो लौटाई फाइल
कुछ ऐसा ही मामला शिवाजी नगर में नगरपरिषद उपसभापति मंजू सोलंकी के पति के नाम से बनी बहुमंजिला इमारत से संबंधित है। सभापति ने यह पत्रावली भी महीने भर से ज्यादा समय तक उनके पास रखी। उपसभापति सोलंकी की ओर से पत्रावली की नकल मांगने पर यह पत्रावली सभापति के पास होना बताया गया। फिर भी यह पत्रावली नगरपरिषद में नहीं पहुंची। इसके बाद डीएलबी के वरिष्ठ संयुक्त विधि परामर्शी ने गत 9 फरवरी, 22 फरवरी व इसके बाद गत 7 मार्च को आयुक्त को पत्रावली डीएलबी भेजने के निर्देश दिए गए। इसके एक दो दिन बाद सभापति ने यह पत्रावली लौटाई, जिसे डीएलबी भेजा गया।
ऐसा कोईनियम ही नहीं...
नगर निकायों में चुना गया पालिकाध्यक्ष, सभापति या इनके अलावा कोई भी जनप्रतिनिधि सरकारी पत्रावली को खुद के चेंबर तो क्या कहीं और भी नहीं ले जा सकता। अगर वह पत्रावली देखना चाहे तो संबंधित कार्मिक उसे पत्रावली का अवलोकन मौके पर ही करवा सकता है। जिसके बाद वह पत्रावली पुन: संबंधित लिपिक को देना जरूरी है। मूवमेंट रजिस्टर में एंट्री करके पत्रावली देने का कोई नियम ही नहीं है। अगर ऐसा हो रहा है तो गलत है। ऐसा करने वाले के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अशोककुमार सिंह, वरिष्ठ संयुक्त विधि परामर्शी, डीएलबी जयपुर
मेरे चेंबर में ही पड़ी है
नगरपरिषद में कार्मिकों व अधिकारियों की ओर से भ्रष्टाचार की शिकायत पर मैं मूवमेंट रजिस्टर में एंट्री कर पत्रावलियां अवलोकनार्थ लेता हूं जो मेरे चेंबर में ही रहती है।भ्रष्टाचार की आशंका के चलते मौका निरीक्षण के बाद ही मेरे द्वारा हस्ताक्षर किए जाते हैं। मूवमेंट रजिस्टर में एंट्री कर पत्रावली नहीं ले जा सकते ऐसे किसी नियम के बारे में मुझे अधिकारियों ने बताया ही नहीं।
- भंवरलाल माली, सभापति, नगरपरिष जालोर
पत्रावली दबा कर बैठे थे सभापति
जलदाय विभाग के पास स्थित हमारे भवन की पत्रावली सभापति दबा कर बैठे थे। हमें अंदेशा था कि पत्रावली में कोईछेड़छाड़ ना कर दी जाए। इसलिए डीएलबी से इस मामले की जांच कराने के लिए पत्र लिखा था। जिसके बाद डीएलबी के निर्देश पर करीब महीने भर बाद सभापति ने यह पत्रावली उपलब्ध कराई थी।
- मंजू सोलंकी, उपसभापति, नगरपरिषद जालोर
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