चॉक और डस्टर के लिए भी दानदाताओं से करनी पड़ रही मिन्नतें, बाढ़ में बहा शौचालय अब तक नहीं बना

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By: Dharmendra Kumar Ramawat

Updated: 01 Mar 2020, 11:07 AM IST

बडग़ांव. सरकारी विद्यालयों में अधिकांश विकास कार्य व सुविधाएं सरकारी स्तर पर ही मुहैया करवाई जाती है, लेकिन विद्यालय प्रबंधन की सकारात्मक सोच से स्थानीय दानदाताओं का सहयोग लेकर विद्यालय का विकास करवाया जाए तो ग्रामीणों का विद्यालय से सीधा जुड़ाव बन जाता है। ऐसा ही उदाहरण है निकटवर्ती रामावि रोड़ा का। जहां दानदाताओं ने विद्यालय को विभिन्न भौतिक सुविधाओं से युक्त किया है। विद्यालय विकास के लिए अभिभावक व दानदाता अत्यधिक उत्साहित होकर विद्यालय में संसाधनों की पूर्ति के लिए आगे आए। जिन्होंने मिलकर विद्यालय में अतिरिक्त कक्षा कक्ष का निर्माण कराने के साथ विद्यार्थियों की प्यास बुझाने के लिए बोरवेल सहित अन्य जरूरी संसाधन भी उपलब्ध करवाकर विद्यालय की तस्वीर ही बदल दी। मगर गौर करने लायक बात यह है कि दानदाताओं की ओर से विद्यालय में इतनी सुविधाएं मुहैया करवाने के बावजूद सरकारी सुविधाओं का अभाव है। विद्यालय वर्ष 2018-19 में उच्च प्राथमिक से माध्यमिक में क्रमोन्नत हुआ था। तब से लेकर अब तक विद्यालय की विभिन्न आवश्यकताएं दानदाताओं के भरोसे रही है। हालत यह है कि विद्यालय को कम्पोजिट ग्रान्ट नहीं मिलने से चॉक, डस्टर, स्वच्छता व कागज समेत अन्य सामग्री के लिए भी दानदाताओं से जुगाड़ करना पड़ता है।
शौचालय तक नहीं बना सके...
स्थानीय दानदाताओं ने स्कूल में कक्षा कक्ष, फर्नीचर, बोरवेल, पानी का टांका, मंच व कुर्सियों समेत कई भौतिक सुविधाएं उपलब्ध कराई। जबकि रमसा के तहत मात्र दो कक्षा कक्ष का निर्माण हुआ है। विद्यालय में बना शौचालय 2017 में अतिवृष्टि के दौरान बह गया था। ऐसे में अब विद्यार्थियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। सबसे अधिक परेशानी छात्राओं को होती है। इसको लेकर शिक्षा विभाग को कई बार अवगत करवाया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
शिक्षकों के पद रिक्त, सुविधाओं का टोटा
राजकीय माध्यमिक विद्यालय रोड़ा में शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। विद्यालय में कंप्यूटर, कंप्यूटर कक्ष, विज्ञान कक्ष व कक्षा कक्षों का आज भी इंतजार है। विद्यालय के छात्र-छात्राएं हर वर्ष खेलकूद प्रतियोगिता में राज्य स्तर तक भाग लेते हैं, लेकिन किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिली है। विद्यालय में तीन शिक्षकों के पद रिक्त हंै। जिसमें गणित व विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयाध्यापकों के पद भी शामिल हैं। इसके बावजूद कोई वैकल्पिक व्यवस्था आज तक नहीं हुई है। लिहाजा बोर्ड परीक्षा परिणाम भी आशानुरूप आने में संशय बना हुआ है।
इनका कहना...
विषयाध्यापकों की कमी की वजह से बोर्ड परीक्षा परिणाम प्रभावित होने की आशंका है। वैसे कार्यरत अध्यापक पूर्ण प्रयास कर रहे हैं। वहीं विभाग ने रमसा के तहत मात्र दो कक्षा कक्ष बनवाए हैं। शौचालय के लिए पत्र लिखा, लेकिन स्वीकृति अभी तक नहीं मिली। यहां तक कि विद्यालय को कम्पोजिट ग्रान्ट नहीं मिलने से आवश्यक सामग्री चॉक, डस्टर, स्वच्छता व कागज आदि के लिए भी दानदाताओं से आग्रह करना पड़ता है।
- पीराराम सोलंकी, प्रधानाचार्य रामावि, विद्यालय रोड़ा

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