इतना बड़ा था जालोर का सुंदेलाव तालाब, और अब रह गया इतना...

इतना बड़ा था जालोर का सुंदेलाव तालाब, और अब रह गया इतना...
इतना बड़ा था जालोर का सुंदेलाव तालाब, और अब रह गया इतना...

Dharmendra Ramawat | Publish: Jul, 10 2019 11:10:47 AM (IST) Jalore, Jalore, Rajasthan, India

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फैक्ट फाइल
196.25 बीघा तालाब क्षेत्र था 1973 से पूर्व
147.4 बीघा है वर्तमान में यह तालाब
13 एमसीएफटी वर्तमान में है क्षमता
1973 से पूर्व तक थी 28 एमसीएफटी
जालोर. शहर की ऐतिहासिक धरोहर सुंदेलाव तालाब लगातार अतिक्रमण की भेंट चढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद नगरपरिषद और प्रशासन इसे बचाने के लिए कोई सख्त रवैया नहीं अपना रहा है।वहीं इसके सौंदर्यकरण और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कवायद भी कागजों में ही दम तोड़ती नजर आ रही है। इधर, भविष्य में इसके विकास की संभावनाओं को देख तालाब के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमियों की ओर से हलचलें भी बढ़ा दी गई हैं। इस बारे में नगरपरिषद पूरी तरह से ढिलाई बरत रही है। दिनों दिन सुंदेलाव तालाब की पाल के आस पास और बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण कर रहे हैं। कुछ साल पहले की बात करें तो इस पाल पर महज एकमात्र खेतलाजी का मंदिर था, लेकिन अब इसके आस पास पक्के मंदिर और चारदीवारी तक बना दी गईहैं। इसके बावजूद कोई भी जिम्मेदार सख्ती नहीं बरत रहा है। हालांकि तालाब की पाल पर स्थित खेतलाजी मंदिर के आस पास किए गए अतिक्रमण करीब दो साल पहले हटाए गए थे, लेकिन यहां फिर से पक्के निर्माण कर देवी-देवताओं के मंदिर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा तालाब में आने वाले पानी के रास्ते और भराव क्षेत्रों में भी लोग दिनों दिन अतिक्रमण कर रहे हैं।
नींव भरने के लिए खोदे थे गड्ढे
गौरतलब हैकि सुंदेलाव तालाब की पाल के ठीक पास बीएसएनएल कार्यालय की तरफ साल भर पहले अतिक्रमियों की ओर से मिट्टी और पत्थर डलवाए गए थे। वहीं यहां नींव भरने के लिए गड्ढे तक खोदे गए। बाद में पत्रिका ने समाचार प्रकाशित करने के बाद नगरपरिषद प्रशासन का इस ओर ध्यान आया।
पानी की आवक में बाधक
सुंदेलाव की पाल पर दिनों दिन बढ़ रहे अतिक्रमण पानी की आवक में भी बाधा बन रहे हैं। तालाब में पानी की आवक के मुख्य रास्तों और इसके आस पास भी लोग कब्जा जमा रहे हैं। बारिश के समय शहर की सड़कों पर बहने वाला ज्यादातर पानी इन्हीं रास्तों से होकर तालाब में पहुंचता है। ऐसे में समय रहते इन पर अंकुश नहीं लगाया गया तो इससे सुंदेलाव में पानी की आवक भी प्रभावित होगी।
नगरपरिषद की अनदेखी
सुंदेलाव तालाब की पाल पर सांसी बस्ती से चामुण्डा माता मंदिर तक जाने वाले रास्ते पर चहल-पहल काफी कम रहती है। ऐसे में अंधेरा होने के दौरान यहां इस तरह की गतिविधियां होती हैं। आस पास रहने वाले लोगों का कहना है कि नगरपरिषद प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद वे इसे नजरंदाज कर रहे हैं।
कार्रवाई के नाम पर लीपापोती
तालाब के आस पास अतिक्रमण का सिलसिला अभी से नहीं, बल्कि लम्बे समय से चल रहा है। इस बारे में विभिन्न संगठनों और शहवासियों ने कई बार प्रशासन को शिकायत भी की। इसके बाद कार्रवाई के नाम पर नगरपरिषद की ओर से केवल लीपापोती ही की गई। नतीजा यह रहा कि कुछ समय बाद पाल पर फिर से अतिक्रमण कर दिए।
ऐसे सिमटता रहा तालाब
आंकड़े देखें तो वर्ष 1973 से पूर्व इस तालाब का कुल क्षेत्रफल 196.25 बीघा था।
जबकि वर्तमान में यह सिमटकर 147.4 बीघा रह गया है। तालाब की भराव क्षमता 1973 से पूर्व 28 एमसीएफटी थी और उस समय 13 सीढिय़ों तक पानी पहुंचने के बाद ओवरफ्लो होता था। वहीं अभी इसकी क्षमता 13 एमसीएफटी रह गई है।

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