कोरोना वायरस इसलिए जालोर के ग्रेनाइट उद्योग को कर रहा प्रभावित

कोरोना वायरस ने जालोर के ग्रेनाइट उद्योग को भी लिया चपेट में, कच्चा माल नहीं जा रहा चाइना, वहां से ग्रेनाइट पार्ट्स पर भी रोक

By: khushal bhati

Published: 07 Mar 2020, 11:25 AM IST

जालोर. पूरे विश्व को भयभीत करने वाले कोरोना वायरस ने जालोर के ग्रेनाइट उद्योग को भी चपेट में ले लिया है। जालोर से हर माह 20 प्रतिशत रो-मेटेरियल चाइना के मार्केट में जाता था, लेकिन जैसे ही कोरोना वाइरस का केंद्र चाइना को माना गया है तो इसका सीधा असर जालोर के ग्रेनाइट उद्योग पर भी पड़ चुका है। पिछले दो माह में उद्योग पर बड़े स्तर पर प्रभाव डाला है। जिसके चलते चाइना को भेजे जाने वाले ग्रेनाइट ब्लॉक पर पूरी तरह से रोक लग चुकी है। सीधे तौर पर दो माह में चाइना को जालोर जिले से जाने वाले 20 प्रतिशत कच्चे माल की आपूर्ति पूरी तरह से बंद हो चुकी है, जिससे उद्येाग पर काफी जयादा असर पड़ा है और उद्यमियों को करोड़ रुपए का नुकसान भी हो चुका है। दूसरी तरफ चाइना से आने वाली मशीनरी और पॉर्ट्स पर भी रोक लगने से हालात विकट हो चुके हैं। मामले में उद्यमियों का कहना है कि उद्योग को नुकसान तो हो रहा है, लेकिन इस वायरस के प्रकोप में सरकार की ओर से चाइना से सीधे व्यवहार और व्यापार रोकना जरुरी कदम है। जब तक हालात नहीं सुधरेंगे व्यापार को नुकसान तो होगा, लेकिन भारत में घातक हालातों से बचने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम है।
इंडस्ट्रीज में दोनों देशों के बीच लेनदेन
सबसे खास बात यह है कि भारत में जिस तरह से ग्रेनाइट का बड़ा व्यापार है। उसी तरह से चाइना में भी ग्रेनाइट का बहुत बड़ा विश्व स्तरीय व्यापार है। चाइना को जालोर से ग्रेनाइट ब्लॉक भेजे जाते थे। दूसरी तरफ ग्रेनाइट उद्योग में मशीनों में काम आने वाले सेग्नमेंट और प्लेट चीन से ही आते थे। हर गे्रेनाइट यूनिट में लगभग 2 कटिंग मशीनें लगी हुई है। उद्यमियों का कहना है कि पत्थर की कटिंग और पॉलिस के लिए प्रत्येक 15 से 20 दिन में इस मेटेरियल की जरुरत पड़ती है। उद्यमियों का कहना है कि अब करीब एक माह से इंडस्ट्रीज से जुड़े वे पार्ट्स जो चीन से आते हैं, वे बंद होने के साथ अब कमी आने लगी है और अब इसी तरह से कोरोनो का कहर जारी रहा तो इन पार्ट्स के दाम बढ़तें जाएंगे और पाटर््स की आवक नहीं हुई तो उद्योग पर बड़ा असर पड़ेगा और इससे सीधे तौर पर मशीनें बंद होने के कगार पर आ जाएंगी। जिससे करोड़ों की आय वाला यह उद्योग चौपट हो जाएगा।
मल्टी मशीनें काम आ रही
उद्यमी पुरुषोत्तम भंडारी का कहना है कि पहले प्रत्येक यूनिट में सिंगल कटर की मशीनें हुआ करती थी, लेकिन अब लगभग प्रत्येक ग्रेनाइट इकाई में मल्टी कटर मशीनें लगी हुई है। सीधे तौर पर एक मशीन में पांच-पांच कटर और सेग्मेंट लगे हुए हैं और हर 15 दिन में पाटर््स की जरुरत भी पड़ रही है। लेकिन अब कोरोना के कहर के चलते पार्ट्स की शॉर्टेज आने लगी है और दाम में लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक इजाफा हो चुका है। यही हालात रहे तो बाहर से आवक नहीं होने और भारत में इन पार्ट्स के नहीं के बराबर निर्माण के चलते विकट हालात हो जाएंगे और ग्रेनाइट इकाइयां बंद होने के कगार पर होंगी। मामले में खास बात यह है कि चाहे ग्रेनाइट ब्लॉक हो, जोधपुरी पत्थर या मार्बल इनकी कटिंग के लिए चाइना के प्लेट और सेगमेंट की ही जरुरत होती है।
पड़ा है असर
चाइना में ग्रेनाइट का बड़ा मार्केट है और जालोर से ग्रेनाइट ब्लॉक चाइना भेजे जाते थे, जो अभी बंद है। वहीं दूसरी तरफ ब्लॉक कटिँग का मेटेरियल से चाइना से ही आता था। कोरोना वायरस से चाइना मार्केट पर रोक से काफी असर पड़ा है और हालात नहीं सुधरे तो ग्रेनाइट उद्योग पर काफी ज्यादा असर अगले कुछ समय में पडऩे वाला है।
- नरेश राजपुरोहित, ग्रेनाइट उद्यमी, जालोर
ग्रेनाइट इंडस्ट्रीज पर कोरोना वायरस से काफी ज्यादा असर पड़ा है। जालोर से कुल रो-मेटेरियल का 20 प्रतिशत तक चाइना को भेजा जाता था फिलहाल यह पूरी तरह से बंद है। मेरी यूनिट से भी चाइना को कच्चा माल जाता था। मेटेरियल मार्क किया हुआ है, लेकिन अभी चाइना तक नहीं जा पा रहा है।
- लालसिंह धानपुर, अध्यक्ष, ग्रेनाइट एसोसिएशन, जालोर

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