फर्जी फर्में बना ऐसे कर रहे बिलों का सौदा, करोड़ों के टैक्स की चोरी

फर्जी फर्में बना ऐसे कर रहे बिलों का सौदा, करोड़ों के टैक्स की चोरी
फर्जी फर्में बना ऐसे कर रहे बिलों का सौदा, करोड़ों के टैक्स की चोरी

Dharmendra Ramawat | Updated: 31 May 2019, 10:46:09 AM (IST) Jalore, Jalore, Rajasthan, India

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जालोर. देश भर में जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स चोरी की संभावना जरूर कम हुई है, लेकिन जालोर जिले में फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों के टैक्स की हेराफेरी हो रही है। हाल ही में सैंट्रल जीएसटी जोधपुर कमिश्नरेट की एंटी-ईवेजन टीम ने जालोर की ग्रेनाइट इण्डस्ट्री में दबिश देकर गत 3 मई को करोड़ों रुपए का घोटाला उजागर किया था। टीम में शामिल अधिकारियों ने शहर के औद्योगिक क्षेत्र तृतीय चरण में माली समाज छात्रावास के पास स्थित एक ग्रेनाइट फर्म पर दबिश दी, लेकिन यहां पहुंचने पर टीम को ऐसी कोई फर्म यहां मिली ही नहीं। जबकि वह फर्म वेट में रजिस्टर्ड थी और इसमें यहीं का पता दिया गया था। इसके बाद टीम ने इस फर्म से लेन-देन करने वाले जालोर के ही तीन बड़े ट्रांसपोर्टर, एक इ-मित्र संचालक और इस फर्म का लेखा-जोखा रखने वाले एकाउंटेंट के ठिकानों पर भी दबिश दी। इन जगहों से टीम को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हाथ लगे और जांच के लिए ये दस्तावेज टीम अपने साथ ले गई। जालोर की इस फर्म के जरिए ग्रेनाइट की बिक्री नहीं, बल्कि बिलों की बिक्री की गई और करोड़ों के टैक्स का घोटाला करने के बाद फर्म मालिक लापता हो गया। सूत्रों की मानें तो जालोर में यह एक ही फर्म नहीं है, बल्कि ऐसी और भी कई फर्में हैं जो बिलों का ही व्यापार कर रही हैं। इनका नेटवर्क राजस्थान की ग्रेनाइट और मार्बल मंडियों के साथ साथ दक्षिणी राज्यों में भी फैला हुआ है। कुछ समय तक इन फर्मों के जरिए फर्जी बिलों का धंधा किया जाता है और बाद में टैक्स की काफी रकम बकाया होने पर फर्म मालिक दुकान समेट कर रफू चक्कर हो जाते हैं। ऐसे में अधिकारी भी बकाया रकम को वसूल नहीं पाते हैं। जीएसटी टीम भी जिले में ऐसी फर्मों की गहनता से छानबीन कर रही है और जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
इसी महीने में हुई थी कार्रवाई
शहर के थर्ड फेज में सैंट्रल जीएसटी की जोधपुर डिविजन की टीम ने फेक बिल्स को लेकर एक ग्रेनाइट फर्म संचालक के खिलाफ गत ३ मई को कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई में जालोर व पाली की टीम भी साथ थी। जांच में सामने आया था कि जालोर के ही रहने वाले इस फर्म के मालिक ने फर्जी बिलों काटकर करीब दो से पांच करोड़ के टैक्स चोरी की थी। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े लोगों के दस्तावेज टीम अपने साथ ले गई थी। जिसकी जांच चल रही है।
ऐसे करते हैं फर्जीवाड़ा...
जानकारी के अनुसार किसी भी उद्यमी को ट्रांसपोर्टर के जरिए उपभोक्ता तक माल की डिलीवरी देने के लिए ई-वे बिल की होती है। ई-वे बिल जनरेट करने वाली फर्म को माल पर लगने वाला टैक्स राजकोष में जमा कराना अनिवार्य है। ऐसे में फर्म मालिक फायदे को लेकर अन्य फर्मों के लिए सैकड़ों ई-वे बिल जनरेट कर बेच देते हैं और माल की डिलीवरी होने के बाद इन बिलों को केंसल कर दिया जाता है। जालोर में भी जीएसटी टीम ने एक साल में करीब डेढ़ दर्जन ऐसे मामले पकड़े हैं। जिनमें ग्रेनाइट उद्यमियों व ट्रांसपोर्टर्स ने ई-वे बिल से अन्य जिलों व राज्यों में माल भेजा और २४ घंटे में माल पहुंचने पर ई-वे बिल केंसल कर दिया। वहीं कई मामलों में एक ही ई-वे बिल से एक से अधिक बार माल भी भेजा गया।
जुड़ी हुई है पूरी कड़ी से कड़ी
देश के विभिन्न राज्यों में फर्जी फर्में खोलकर बिलों की हेराफेरी करने के मामले में ना केवल फर्म संचालक जिम्मेदार हैं, बल्कि इस काम को अंजाम देने के लिए पूरी कड़ी से कड़ी जुड़ी हुई है। जालोर में पकड़े गए टैक्स चोरी के मामले में भी एकाउंटेंट, इ-मित्र संचालक, ट्रांसपोर्टर और बिल खरीदने वाले उद्यमी शामिल थे। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि फर्जी बिलों का यह धंधा इन सभी की मिलीभगत से फल फूल रहा है।
लेखा-जोखा रखने वाले खुद बताते हैं रास्ते
मई महीने के पहले सप्ताह में सीजीएसटी टीम की ओर से की गई कार्रवाई के दौरान यह भी सामने आया था कि फर्म मालिक को बैंक से सीसी लिमिट दिलाने के लिए एकाउंटेंट की ओर से बैलेंस शीट और स्टॉक की डीटेल भी तैयार की गई थी। जबकि अधिकारियों का कहना था कि फर्म संचालक ने माल की खरीद ही नहीं की थी तो एकाउंटेंट ने बैंक को बैलेंस शीट और स्टॉक का विवरण कैसे दिया। यानी इससे साफ है कि फर्म संचालकों को टैक्स की चोरी करने का रास्ता भी लेखा-जोखा रखने वाले लोग ही बताते हैं।

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