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दगा दे गया वैकल्पिक मार्ग, बारिश में खुल गई लीपापोती

सियाणा चांदना मार्ग : रपट पर डाली मिट्टी बहने से बंद हुआ आवागमन
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Damage temporary route in Siyana area

Damage temporary route in Siyana area

सियाणा. सियाणा-चांदना के बीच स्थित सूकडी नदी पर गत वर्ष अतिवृष्टि के बाद मिटटी डालकर वैकल्पिक मार्ग शुरू किया गयाथा, लेकिन इस व्यवस्था को पूरे साल दुरुस्त नहीं किया।
शुक्रवार को हुई तेज बारिश ने सार्वजनिक निर्माण विभाग की पोल खोल दी। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पुलिस को इस मार्ग पर आवागमन ही रोकना पड़ा। बारिश ने जिम्मेदारों की उदासीनता को उजागर कर दिया। नजदीकी सिरोही जिले के गांवों एवं जालोर के अन्य गांवों को जोडऩे वाला मार्ग होने से क्षेत्र के लोग आक्रोशित हुए, लेकिन जिम्मेदारों के पास कोई जवाब नहीं था। पीडब्ल्यूडी एईएन अनिल माथुर ने दो टूक शब्दों में कहा कि बजट नहीं था इसलिए रपट का निर्माण नहीं करवाया। आहोर विधायक ने भी जल्द रपट निर्माण के निर्देश दिए थे, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। नदी पर बनी रपट की मिट्टी बह जाने से मार्ग में पोल हो गई।
आवागमन से जोखिम बढऩे की आशंका को देखते हुएपुलिस चौकी प्रभारी मनोहर मीणा ने मार्ग को बंद करवा दिया।ऐसे में चांदना समेत कई गांवों के ग्रामीण सार्वजनिक निर्माण विभाग के खिलाफ आक्रोशित हो गए।ग्रामीणों ने बताया कि गांवों का मार्ग होते हुए भी विभाग ने ध्यान नहीं दिया।
गत वर्षरपट बह जाने के बाद कई दिन तक लोगों का सम्पर्क कटा रहा था, जिस पर जिला प्रशासन ने राहत कार्य भी करवाए थे। लेकिन, बारिश से पहले कोई प्रबंध नहीं किए।बारलावास के जबरूखां ने बताया कि रपट पर बड़ी-बड़ी दरारें देखकर डर सा लगा। रपट की स्थिति इतनी खतरनाक है कि भारी वाहन निकालने की कोशिश में हादसा टल नहीं सकता। रपट की जर्जर स्थिति देखकर कई वाहन वापस लौट गए।अब बादल घिर आने के साथ ही लोगों की चिंता भी बढ़ रही है। आशंका है कि वैकल्पिक मार्ग पूरी तरह से बह गया तो बाइक व पैदल चलना भी कहीं मुश्किल में न पड़ जाए।
इनका कहना है...
रपट पर खतरा काफी बढ़ गया है।जगह-जगह दरारंे आने व जमीन ध्ंासने के कारण हादसे का अंदेशा है। जर्जर रपट पर कोई नुकसान न हो इसलिए लोगों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल रहे हैं।
- मनोहर मीणा, एएसआई, पुलिस चौकी सियाणा
चांदना-सियाणा के बीच नदी वेग से चलती हैं। यहां रपट के दोनों भागों पर पुलिया बनाने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली।
- अनिल माथुर, एईएन, पीडब्ल्यूडी