मुमुक्षु रक्षा जिनबिंबरत्नश्रीजी और दिव्या बनीं साध्वी चैत्यस्तवप्रियाश्रीजी

उम्मेदाबाद कस्बे में जैनाचार्य प्रशमेशप्रभ सुरिश्वर महाराज समेत साधु-संतों के सान्निध्य में कांतिलाल भंवरलाल भंसाली व महिपाल कुमार जेठमल कागरेचा परिवार के तत्वावधान में चल रहे पंच दिवसीय दीक्षा महोत्सव के तहत दीक्षार्थी मुमुक्षुओं की दीक्षा शुक्रवार को धूमधाम से संपन्न हुई।

By: Dharmendra Kumar Ramawat

Published: 06 Mar 2021, 09:13 AM IST

उम्मेदाबाद. जिन भगवंतों, गुरु भगवंतों व जिनशासन के जयकारों से गूंजायमान वातावरण, सांसारिक सुखों को छोडकऱ संयम का कठिन मार्ग अंगीकार करने वाली नूतन दीक्षार्थी मुमुक्षुओं की वंदना में तल्लीन श्रावक-श्राविकाएं और वैराग्य से ओतप्रोत भक्ति गीतों पर झूमते जैन समाज के लोग। कुछ ऐसा ही अध्यात्म से भरा वातावरण शुक्रवार को कस्बे में नजर आया। मौका था कस्बे की दो दीक्षार्थी मुमुक्षुओं के दीक्षा महोत्सव का। कस्बे में जैनाचार्य प्रशमेशप्रभ सुरिश्वर महाराज समेत साधु-संतों के सान्निध्य में कांतिलाल भंवरलाल भंसाली व महिपाल कुमार जेठमल कागरेचा परिवार के तत्वावधान में चल रहे पंच दिवसीय दीक्षा महोत्सव के तहत दीक्षार्थी मुमुक्षुओं की दीक्षा शुक्रवार को धूमधाम से संपन्न हुई। इस दौरान जैनाचार्यों ने दीक्षार्थियों का नवीन नामकरण किया। जिसके तहत मुमुक्षु रक्षाकुमारी का नवीन नाम साध्वी जिनबिंबरत्नश्रीजी व मुमुक्षु दिव्याकुमारी का नवीन नाम साध्वी चैत्यस्तवप्रियाश्रीजी रखा गया। इससे पहले कस्बे के नयापुरा स्थित संयम वाटिका में शुभ मुहूर्त में दीक्षार्थी मुमुक्षुओं ने जैनाचार्य के सान्निध्य में सांसारिक सुखों का त्याग कर वैराग्य मार्ग अंगीकार किया। दीक्षार्थी मुमुक्षु रक्षा कुमारी व दिव्याकुमारी सवेरे गाजे-बाजे से नयापुरा स्थित संयम वाटिका प्रांगण में स्थित दीक्षा स्थल पहुंची। पांडाल में मौजूद श्रद्धालुओं ने दीक्षार्थी मुमुक्षुओं का अभिवादन किया। इसके बाद दीक्षार्थी मुमुक्षुओं की दीक्षा विधि आरंभ हुई। जैनाचार्य ने मुमुक्षुओं को पवित्र ओघा प्रदान किया। ओघा पाकर दीक्षार्थी झूम उठे। जैनाचार्य ने दीक्षा विधि संपन्न करवाई। केशलोचन विधि के बाद दीक्षार्थी मुमुक्षुओं ने साधु वेश (श्वेत वस्त्र) धारण कर पुन: पांडाल में प्रवेश किया। इस मौके पांडाल मुमुक्षुओं व जिन शासन के जयकारों से गूंज उठा।
छलक पड़े आंसू...
पांडाल में दीक्षा विधि के दौरान जब दीक्षार्थी मुमुक्षुओं ने शरीर पर धारण किए सोने-चांदी के आभूषण परिजनों को सुपुर्द किए और केशलोचन की विधि के बाद जब उन्होंने साधु वेश धारण किया तो मौजूद श्रावक श्राविकाओं की अश्रुधाराएं बरबस ही फूट पड़ी।
नम आंखों से दीक्षार्थियों को दी विदाई
दीक्षा महोत्सव के तहत दीक्षार्थी मुमुक्षुओं की दीक्षा से पूर्व गुरुवार को आयोजक परिवार की ओर से नयापुरा स्थित संयम वाटिका प्रांगण में विदाई समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें दीक्षार्थी मुमुक्षुओं के परिजनों समेत जैन समाज के लोगों ने नम आंखों से मुमुक्षुओं को विदाई दी।
25 को दीक्षा लेगी तिलोड़ा की मुमुक्षु सुहानी
सायला. निकटवर्ती तिलोड़ा गांव में शुक्रवार को जैनाचार्य नित्यसेनसुरिश्वरजी समेत साधु-संतों का नगर प्रवेश हुआ। इस दौरान महिलाओं ने कलश व मंगल गीतों के साथ जैन संतों का स्वागत किया। ढोल बाजे के साथ नाचते-गाते जैन संत व समाज के लोग जिनालय पहुंचे। जिनालय में दर्शन वन्दन के बाद भवन में जैन संतों ने प्रवचन दिए। इस दौरान जैन संत विद्वतरत्नविजय ने जिनशाशन व दीक्षा की महिमा के बारे में प्रकाश डाला। अमदाबाद से मुमुक्षु सुहानी संघवी पुत्री वीरेंद्र अमूलक संघवी का दीक्षा महूर्त चैत्र सुदी त्रयोदशी महावीर जन्म कल्याणक के दिन 25 अप्रैल की घोषणा की गई। दीक्षा का मुहूर्त प्राप्त कर श्रीसंघ दीक्षार्थी व उसका परिवार खुशी से झूम उठा। वहीं दीक्षार्थी का श्रीसंघ की ओर से बहुमान किया गया। इस मौके बाबूलाल मुणोत सहित संघ के गणमान्य लोग मौजूद थे।

Dharmendra Kumar Ramawat Reporting
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