नगर परिषद में इस तरह चल रहा पट्टों के फर्जीवाड़े का खेल...पढ़ें पूरी खबर

नगर परिषद में इस तरह चल रहा पट्टों के फर्जीवाड़े का खेल...पढ़ें पूरी खबर
नगर परिषद में इस तरह चल रहा पट्टों के फर्जीवाड़े का खेल...पढ़ें पूरी खबर

Dharmendra Ramawat | Updated: 18 Jul 2019, 10:30:50 AM (IST) Jalore, Jalore, Rajasthan, India

www.patrika.com/rajasthan-news

जालोर. नगरपरिषद से गुम हुई पांच पत्रावलियों के मामले में अधिकारियों-लिपिकों और जनप्रतिनिधियों को नोटिस देने और उनके जवाब आने के बाद मामला पुलिस थाने जरूर पहुंचा, लेकिन पुलिस भी इन फाइलों को खोज नहीं पाई और अंत में हाथ खड़े कर दिए। पर इस मामले में नया मोड़ अब सामने यह आ रहा है कि आखिरकार पुलिस के हाथ खड़े कर देने के 4 महीने बाद ही इनसे संबंधित पट्टों के रजिस्टे्रशन कैसे हो गए। यानी पट्टों के रजिस्टे्रशन तब ही किया गया, जब ये फाइलें नगरपरिषद में पहुंची, लेकिन पट्टे बनने और उनके रजिस्टे्रशन के बाद ये फाइलें दोबारा नगरपरिषद से कहां गई इस बारे में कोई बोलने तक को तैयार नहीं है। इससे स्थिति साफ है कि नगपरिषद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंककर यह काम किया है। इसमें भी खास बात यह है कि पत्रिका की ओर से मामला उजागर करने के बावजूद पुलिस के हाथ अब तक ये फाइलें नहीं लग पाई हैं। जबकि पांच में से 4 पत्रावलियों से संबंधित पट्टों का रजिस्ट्रेशन पुलिस की फाइलन रिपोर्ट (एफआर) के ठीक चार महीने बाद ही किया गया है।
यह था मामला
नगरपरिषद से गुम हुई 5 पत्रावलियों को लेकर तत्कालीन आयुक्त शिकेश कांकरिया ने संबंधित शाखा के लिपिकों और सभापति को नोटिस थमाए थे। जिनके जवाब में उन्होंने एक-दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप जड़े। इसके बावजूद गुम हुई पांचों में से एक भी पत्रावली मिल नहीं पाई। बाद में आयुक्त कांकरिया ने उच्चाधिकारियों के निर्देश पर दो लिपिकों व एईएन के खिलाफ 7 मार्च 2018 को थाने में एफआईआर दर्ज करवाई। करीब चार महीने बीस दिन चली पुलिस तफ्तीश में भी इन फाइलों का पता नहीं लग पाया और पुलिस ने हाथ खड़े करते हुए 27 जुलाई 2018 को भरसक प्रयत्न के बावजूद पत्रावलियों के बारे में कोई सुराग नहीं लग पाने की बात कही। वहीं प्रकरण दर्ज हुए काफी समय होने और इसे ज्यादा लम्बित रखना उचित नहीं मानते हुए एफआर अदम पता (माल मुलजिम) लगा दी। साथ ही पत्रावलियों व मुलजिम की तलाश अन्य प्रकरणों के साथ जारी रहना बताया गया। इन्हीं पांच पत्रावलियों में चार से संबंधित पट्टों का दिसम्बर 2018 में सब रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टे्रशन हो गया।
इन 5 पत्रावलियों का मामला
नगरपरिषद से वर्ष 2015 में 5 पत्रावलियों के गुम होने बाद तत्कालीन आयुक्त ने 7 मार्च 2018 को पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी। इनमें श्रीमती भदी देवी पत्नी गवरा जीनगर, बोगाराम पुत्र गवरा जीनगर, पुखराज पुत्र भूराराम सुथार, श्रीमती शांतिदेवी पत्नी प्रतापाराम हीरागर व किरणकुमार पुत्र प्रतापाराम हीरागर के नाम की पत्रावलियां शामिल थीं।
तीन पट्टे 300 वर्गगज से ज्यादा के
उप पंजीयक कार्यालय जालोर में चामुण्डा माता मंदिर के आस पास के क्षेत्र के जिन 4 पट्टों का रजिस्टे्रशन हुआ है, उनमें से नियमन के तीन पट्टे 300 वर्गगज से ज्यादा के हैं। जबकि नगरपरिषद के नियमों के अनुसार अधिकतम 300 वगर्गज क्षेत्र के ही नियमन के पट्टे जारी किए जा सकते हैं। इनमें पुखराज पुत्र भूराराम सुथार के नाम से 533.34 वर्गगज, बोगाराम पुत्र गवरा जीनगर के नाम से 400 वर्गगज व शांतिदेवी पत्नी प्रताप सरगरा को 400 वर्गगज का पट्टा जारी किया गया है।
मां-बेटे के नाम से जारी किए पट्टे
इस पूरे मामले में खास बात यह है कि नियमन के पट्टे जारी करने में भी फर्जीवाड़ा किया गया है। चामुण्डा माता मंदिर के आस पास के क्षेत्र में एक साथ नियमन के चार पट्टे जारी किए गए। वहीं इनमें से नियमन के दो पट्टे तो मां-बेटे भदी देवी पत्नी गवरा जीनगर व बोगाराम पुत्र गवरा जीनगर के नाम से अलग-अलग जारी किए गए हैं। जबकि नियमन का पट्टा परिवार के किसी एक सदस्य को ही जारी किया जा सकता है। इसी तरह गायब पांच में दो अन्य फाइलें भी मां-बेटे शांतिदेवी पत्नी प्रतापाराम हीरागर व किरणकुमार पुत्र प्रतापाराम हीरागर के नाम से हैं। जिनमें से एक शांतिदेवी का पट्टा रजिस्टर्ड हो चुका है। इस तरह पांच में से कुल चार नियमन की फाइलें मां-बेटों के नाम से ही थी।
चारों ही एक ही क्षेत्र में
नगरपरिषद से गुम हुई पांच पत्रावलियों में से जिन 4 पत्रावलियों से संबंधित पट्टे पुलिस की ओर से एफआर लगाने के बाद दिसम्बर २०१८ में रजिस्टर्ड हुए हंै, वे चारों एक ही क्षेत्र चामुण्डा माता मंदिर रोड व चामुंडा माता मंदिर के आसपास के हैं।

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