नर्मदा के पानी के लिए भूख हड़ताल पर बैठे किसानों ने चौथे दिन विभाग के लिखित आश्वासन पर समाप्त किया अनशन

नर्मदा नहर में 2200 क्यूसेक पानी छोडऩे की मांग को लेकर नर्मदा मुख्यालय के समक्ष किसानों के साथ स्थानीय कांग्रेसी नेताओं का धरना व भूख हड़ताल चौथे दिन समाप्त हो गई। इस दौरान नर्मदा विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता व उपखंड अधिकारी की मध्यस्थता में हुई बैठक में किसानों की मांगों पर लिखित सहमति बनने के बाद भूख हड़ताल समाप्त की गई।

By: Dharmendra Kumar Ramawat

Published: 18 Dec 2020, 09:55 AM IST

सांचौर. नर्मदा नहर में 2200 क्यूसेक पानी छोडऩे की मांग को लेकर नर्मदा मुख्यालय के समक्ष किसानों के साथ स्थानीय कांग्रेसी नेताओं का धरना व भूख हड़ताल चौथे दिन समाप्त हो गई। इस दौरान नर्मदा विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता व उपखंड अधिकारी की मध्यस्थता में हुई बैठक में किसानों की मांगों पर लिखित सहमति बनने के बाद भूख हड़ताल समाप्त की गई। प्रशासनिक प्रतिनिधि मंडल के साथ हुई वार्ता के बाद भूख हड़ताल पर बैठे किसान भूख हड़ताल समाप्त करने पर सहमत हुए। जिसेक बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उपखंड अधिकारी व नर्मदा विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता ने ज्यूस पिलाकर भूख हड़ताल पर बैठे हिन्दूसिंह दूठवा, जगदीश गोदारा व मिसराराम पुरोहित धमाणा सहित 28 अनशनकारियों की भूख हड़ताल समाप्त करवाई। इस दौरान किसानों के आंदोलन समाप्त करने के बाद जिला कलक्टर ने सांचौर पहुंचकर नर्मदा मुख्यालय में किसान प्रतिनिधि मंडल के साथ वार्ता की। जिसमें कलक्टर ने स्थानीय प्रशासनिक व नर्मदा अधिकारियों की बैठक लेकर किसानों की मांागों को गंभीरता पूर्वक लागू करने व लापरवाही बरतने पर कानूनी कार्यवाही की चेतावनी भी दी। बैठक में डॉ. भूपेन्द्र बिश्नोई ने कहा कि विभागीय अधिकारियों की उदासीनता व गुजरात सरकार के भेदभावपूर्ण रवैये से नर्मदा नहर के पानी की जल वितरण व्यवस्था के तहत किसानों को काफी परेशानी हुई है। उन्होंने राज्य के हिस्से के पानी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता बरतने की बात कही। इससे पूर्व भूख हड़ताल पर बैठे तीन किसानों की तबियत बिगडऩे पर बुधवार रात उन्हें राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करवाया गया। जहां पर उनके स्वास्थ्य में सुधार के बाद गुरूवार सवेरे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
किसानों ने ये बताई समस्याएं
नर्मदा विभाग के अधिकारियों के साथ हुई वार्ता के दौरान किसानों ने कहा कि नर्मदा नहर परियोजना से राजस्थान के जालोर जिले की संाचौर व चितलवाना, बाड़मेर जिले की गुड़ामालानी, चौहटन व सेड़वा तहसील में सिंचाई की जाती है। परियोजना में गुजरात राज्य व राजस्थान राज्य के बीच हुए समझौते के अनुसार 2200 क्यूसेक पानी उपलब्ध करवाने पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद गुजरात सरकार की ओर से नर्मदा नहर में राजस्थान के हिस्से में से महज 1000 क्यूसेक ही पानी दिया जा रहा है। जिससे किसानो में रोष है। नहर में कम पानी आने से मुख्य कैनाल सहित वितरिकाओं, माइनरों व सबमाइनरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है। जिसकी वजह से किसान रबी की सीजन में सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। ऐसी में किसानों की ओर से खेत में बीज डालकर तैयार करने के बाद पानी नहीं मिलने से उन्हें लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। गुजरात सरकार की ओर से समय पर नहरों में पानी नहीं देने से किसान बैंको से लिया गया ऋण समय पर नहीं चुका पाने से कर्जदार होने के कगार पर हैं।
बाराबंदी के करें मॉनीटरिंगग, लापरवाही पर कार्यवाही
नर्मदा विभाग के समक्ष किए गए आंदोलन के समाप्त होने के बाद कलक्टर गुरूवार दोपहर करीब 3 बजे सांचौर पहुंचे। इस दौरान कलक्टर ने नर्मदा मुख्यालय पर किसान प्रतिनिधि मंडल के साथ हुई वार्ता के तहत मौजूद अधिकारियों को किसानों से हुई समझौता वार्ता के पालनार्थ गंभीरता से कार्य करने व मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए। कलक्टर ने कहा कि विभागीय अधिकारी टेल तक पानी पहुंचाने के लिए गंभीरता से कार्य करें। वहीं नहरों पर पेट्रोलिंग करने वाले ठेकेदार भी पानी चोरी को रोककर टेल तक पानी पहुंचाएंगे। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बरतने पर सख्त कार्यवाही की बात कही।
इन मुद्दों पर समझौता
वार्ता के दौरान किसानों ने नहर में 2200 क्यूसेक पानी छोडऩे की मांग रखी। जिस पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में नहर में 1800 क्यूसेक पानी मिल रहा है। जिसे बाराबंदी के आधार पर गुजरात से जल उपलब्धतानुसार सभी वितरिकाओं की माइनरों के टेल तक पहुंचाया जाएगा। नहरों में पानी बंद होने के बाद नहरों की ठोकरें व अवैध डिग्गियों में पाइप बंद करवाए जाएंगे। सभी अवैध पाइपों को विशेष अभियान चलाकर हटाया जाएगा।
28 जने भूख हड़ताल पर, 450 क्रमिक अनशन पर
किसानों के साथ कांग्रेस नेताओं की ओर से किए जा रहे धरना प्रदर्शन में हिन्दूसिंह दूठवा, जगदीश गोदारा, ख्ंिायाराम, लाधाराम, सुरजनराम व मसराराम धमाणा के स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई। वहीं लक्ष्मण जाट, जोगाराम भील, वींजाराम गोदारा, भागीरथराम, सांवलाराम, शंकराराम भील, पताराम, देवाराम, प्रभाराम, सुरजनराम, विजयपालसिंह, सदराम, भजनलाल, गणपतलाल, राजूराम, भेराराम, भंवरसिंह व चूनाराम अनिश्चिकालीन भूख हड़ताल पर थे।

Dharmendra Kumar Ramawat Reporting
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