गांवों में अवैध अनाज मण्डी से किसान झेल रहे नुकसान

गांवों में अवैध अनाज मण्डी से किसान झेल रहे नुकसान
Farmers suffering from illegal Grain Mound in villages

Dharmendra Ramawat | Updated: 26 Apr 2018, 11:09:35 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

कृषि मण्डी नहीं होने से बिचौलियों को मजबूरन बेचनी पड़ रही उपज

नरपतसिंह
बागोड़ा. इसे किसानों की तकदीर कहें या सरकारी तंत्र की उदासीनता। क्षेत्र के गांवों से हर साल बिचौलियों के जरिए लाखों क्विंटल अनाज की अवैध तरीके से खरीद-फरोख्त की जा रही है। इससे जहां सरकार को हर साल करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं किसानों को भी उपज का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। दरअसल, क्षेत्र में इस साल अच्छी बारिश के चलते गांवों में जीरा, रायड़ा, अरण्डी, ईसबगोल व गेहूं समेत अन्य फसलों की अच्छी पैदावार हुई, लेकिन बागोड़ा उपखण्ड में कृषि मण्डी नहीं होने से गांवों में पैदा होने वाली इस उपज को किसान मजबूरन बिचौलियों के जरिए बेच रहे हैं। हाल यह है कि क्षेत्र के दादाल, धुम्बडिय़ा, जुंजाणी, सेवड़ी, तीलोड़ा, सुराणा व मेंगलवा सहित करीब-करीब हर गांव में अवैध रूप से बिचौलिए दुकानें लगा कर धड़ल्ले से किसानों से फसल खरीद रहे हैं। इसके बाद बिचौलिए यह उपज सीधे गुजरात की मण्डियों में बेचकर चांदी काट रहे हैं।
50 किमी तक के क्षेत्र में नहीं मण्डी
क्षेत्र के कई गांवों में करीब 50 किमी के दायरे में कोई अनाज मण्डी ही नहीं है। लिहाजा, किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए मजबूरन बिचौलियों के पास जाना पड़ता है। ये बिचौलिए बिना टैक्स चुकाए ही ये उपज गुजरात की मण्डियों तक पहुंचाकर मुनाफा कमा रहे हैं।
ईसब की पैदावार ज्यादा
देखा जाए तो राज्य में सबसे ज्यादा पैदावर ईसबगोल की होती है। बागोड़ा उपखंड क्षेत्र भी ईसबगोल की पैदावार में राज्य में अव्वल है। इतनी ज्यादा उपज देने के बावजूद सरकार यहां के किसानों के साथ सौतला व्यवहार कर रही है। जबकि इसके लिए सालों से मांग भी की जा रही है। किसानों का कहना है कि अगर यहां सरकारी मण्डी खोली जाती है तो किसानों को इससे उपज का उचित दाम मिल सकेगा। साथ ही सरकार को राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा अवैध रूप से चल रही उपज की खरीद-फरोख्त पर भी अंकुश लग सकेगा।
सरकार से लगी आस भी अधूरी
किसानों का कहना है कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में भी सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है। भारत में आधी से ज्यादा आबादी खेती पर निर्भर है। वहीं पिछली बार क्षेत्र सहित राज्य भर के किसानों ने भाजपा को वोट दिया और इसके बाद उन्हें सरकार से कई उम्मीदें भी थी, लेकिन उन्हें इस सरकार से भी कुछ हाथ नहीं लग पाया है।
सताता है चोरी का डर
क्षेत्र में कृषि उपज मंडी नहीं होने से यहां के किसान पड़ोसी राज्य गुजरात के ऊंझा में स्थित मंडी जाकर उपज बेचते हैं। गत दिनों गुड़ामालानी से गुजीरत की मण्डी के लिए जा रहा जीरे की बोरियों से भरा ट्रक बीच रास्ते में से चोरी हो गया। ऐसे में किसानों को भी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।

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