फर्जी स्टाम्प पेपर के सहारे भूंखड बताकर ठगने की वारदात को बदमाश दे रहे अंजाम

Dharmendra Ramawat

Updated: 07 Mar 2019, 05:36:56 PM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

वींजाराम डूडी
सांचौर. शहर में नदी नाला की खाली पड़ी जमीन पर अवैध कब्जा कर स्टांप द्वारा फर्जी तरीके से सरकारी जमीन को बेचकर लोगों को ठगने का मामला प्रकाश में आया है। सक्रिय गिरोह शहर के कई लोगों से फर्जी स्टांप पेपर के आधार पर रुपए वसूले जा रहे है। जिसको लेकर कई लोग ठगी का शिकार हो रहे है। नगपालिका की खाली पड़ी जमीन को अपना बताकर उस पर बकायदा स्टाम्प पेपर पर लिखकर उसको कब्जा करवा दिया जाता है। इतना ही नहीं कब्जा करवाने के बाद भूंखड खरीदने वालों को खाली नहीं करवाने की गांरटी दी जाती है। इस प्रकार शहर में खाली पड़ी सरकारी जमीन के अवैध तरीके से चल रहे गोरखधंधे को लेकर नगर पालिका प्रशासन अनजान बना हुआ है। शहर में अधिकांश कॉलोनियां ऐसी बसी हुई जहां पर गरीब वर्ग के लोगों के रहने के लिए आसियाना नहीं होने से व जानकारी के अभाव में इस सक्रिय गिरोह के लोग झांसे में लेकर रुपए हड़प लेते है। शहर में लंबे समय से चल रहे इस प्रकार के गिरोह की जानकारी पालिका व प्रशासन को होने के बावजूद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।दूसरी ओर नगर पालिका की खाली पड़ी सरकारी भूमि पर इस प्रकार के सौदेबाजी को लेकर पालिका भी कार्रवाई की बजाय महज औपचारिकता ही बरत रही है। जबकि वर्तमान में नगर पालिका की सैकड़ों हैक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जे हो रखे है। जिस पर झोपडिय़ा, कच्चे निर्माण हो रखे है। वहीं अधिकांश जगहों पर प्रभावशाली लोगों ने सरकारी जमीन पर अवैध रूप से पक्के निर्माण भी कर दिए है।
ऐसे लेते है शिकंजे में
शहर में खाली पड़ी जमीन पर कब्जा करवाकर भूखंड बेचने के लिए सक्रिय गिरोह के लोग पालिका प्रशासन की उदासीनता का पूरा फायदा उठा रहे है। जिसमें भूखंड को बेचने के लिए गरीब वर्ग के व्यक्ति को झांसे में लेकर उससे एडवांस में कुछ राशि लेने के साथ शेष राशि किस्तो में लेना शुरू कर देते है। वहीं मामले की भनक किसी को नहीं पड़े इसके लिए भूखंड खरीदने वाला भी बात को गोपनीय रख देता है। तब वारदात से जुड़े गिरोह के लोग रकम लेकर फरार हो जाते है। हालांकि ऐसे मामले के खुलासे के बाद भी दंबगता की वजह से प्रशासन भी उनके खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पाते है। इतना हीं नहीं फर्जी स्टांप के पर बकाया नोटेरी वकील से प्रमाणन भी करवाया जाता है।
खुली पड़ी जमीन का भी यही हाल
नगरपालिका क्षेत्र में हाईवे से सटे क्षेत्र दर्जनो हैक्टेयर जमीन खाली पड़ी है। जो भी सुरक्षित नहीं है। अधिकांश जगह पर भू-माफियाओ ने अवैध कब्जे कर रखे है। जो लंबे समय से ऊपर काबिज है। ऐसे हालात में पालिका की ओर से ऐसे मामले में गंभीरता नहीं बरतने से खाली पड़ी सरकारी जमीन भी अतिक्रमण की भेंट चढ़ रही है।
नदी नालो की जमीन पर पटटे नहीं दे सकती पालिका
शहर के माखुपुरा पुलिया व उसके बहाव में खसरा नंबर 2510 व 26 10 आता है। जहां पर पालिका सर्वोच्च न्यायालय की पालना में पट्टे जारी नहीं कर सकती। ऐसे में क्षेत्र में जानकारी के अभाव में स्टांप पर भूखंड खरीदने वाले लोग ठगी का शिकार हो रहे है।
ऐसे हुआ खुलासा
शहर के हाइवे से सटे माखुपुरा पुलिया के पास बड़सम मार्ग पर राजेन्द्र प्रसाद खत्री ने मेवाराम खत्री को खसरा नंबर 26 10 में आवासीय भूखंड 10 गुणा 38 वर्ग फीट का कब्जासुदा आवासीय प्लोट बताते हुए स्टांप पेपर पर इकरारनामा लिखकर 1 लाख 75 हजार में बेचान 25 मई 2011 में बेचान कर दिया। किन्तु कुछ समय बाद उसी भूखंड को अन्य व्यक्ति को बेचकर उसका कब्जा करवा दिया।
जिसका मेवाराम ने विरोध करते हुए अपना हक जताया। इस दौरान विवादास्पद होने पर उजागार हो गया। इसके बाद कई मामले भी सामने आने शुरू हो गये है। खसरे में भूखंड को प्लोट के रूप में बेचने का कार्य जोरों पर चल रहा है। जबकि खसरा नदी नाला क्षेत्र में आने की वजह से पट्टा होना संभव नहीं है। ऐसे में सक्रिय गिरोह के लोग स्टांप के नाम पर प्लोट बेचने का गोरखधंधा चलाने से कई लोग शिकंजे में फंस रहे है।
इनका कहना है
शहर के 26 10 जो की नाला क्षेत्र में आता है। बिना जानकारी के 1 लाख 75 हजार में मैंने स्टांप पेपर पर लिखवाकर खरीदा था। किन्तु उस पर दूसरे लोगों ने कब्जा कर लिया। अब पता किया तो वह नदी नाला क्षेत्र का भूखंड है। मुझे न्याय मिलना चाहिए। भूखंड के लिए स्टांप पर इकरारानामा लिखकर रुपए लेने वाला व्यक्ति अब कोई जबाब भी नहीं दे रहा है।
- मेवाराम खत्री, पीडि़त
माखुपुरा पुलिया व आस-पास के खसरा नंबर 2510 व 26 10 जो नदी नाले का क्षेत्र है। जहां पर किसी भी स्थिति में पट्टे नहीं दिए जा सकते है। कोई व्यक्ति किसी को झांसे में लेकर इस प्रकार की हरकत करता है तो गलत है। उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। आम लोगों को भी इस प्रकार के मामले को लेकर भूखंड खरीद से पहले सारी जानकारी नगर पालिका से लेनी चाहिए। ताकि कोई ठगी का शिकार नहीं हो।
- सोनारमा पुरोहित, अधिशाषी अधिकारी सांचौर

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