मस्तिष्क एक कम्प्यूटर और आत्मा एक प्रोग्रामर की तरह

Dharmendra Ramawat | Updated: 16 Oct 2018, 10:48:27 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

जालोर में ब्रह्माकुमारी रोजयोग संस्थान के तत्वावधान में चल रहा हेल्थ-वेल्थ हैप्पीनसे मेला

जालोर. शहर के मलकेश्वर मठ में ब्रह्माकुमारी राजयोग संस्थान की ओर से शुरू किए गए हेल्थ-वेल्थ हैप्पीनेस मेले में लगी स्टॉल्स के जरिए सोमवार को भी शहरवासियों को अध्यात्मिक ज्ञान और जीवन जीने की शैली के बारे में बताया गया। इस दौरान मेले में लगी विभिन्न स्टॉल्स में ब्रह्माकुमारों ने लोगों को गीता ज्ञान, नश्वर शरीर, आत्मा और जन्म मरण के चक्र के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि मनुष्य का मस्तिष्क एक कम्प्यूटर की तरह है, जिसे चलाने वाली प्रोग्रामर रूपी एक आत्मा है। आत्मा ही शरीर के विभिन्न भागों में एक ऊर्जा पैदा करती है और उसी ऊर्जा से हम विभिन्न गतिविधियां करते हैं। जिस समय यह ऊर्जा हमारे शरीर से निकल जाती है, उस समय वह शरीर मृत कहलाता है। मेले के दौरान कुम्भकरण और नौ चैतन्य देवियों की झांकी भी सजाई गई। जिसमें नौ देवियां विभिन्न आसन पर विराजित थीं। ब्रह्माकुमारों ने इन सभी देवियों के बारे में लोगों को जानकारी दी। वहीं मेले में मैजीशियन ने बडे-बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं के मनोरंजन के लिए जादूई करतब भी दिखाए। जिसे सभी ने सराहा। इस मौके दुबई से ज्योति दीदी, भूपाल भाई प्रबंधक ब्रह्माकुमारी शांतिवन आबूरोड, उड़ीसा भद्रक मंजू दीदी भीनमाल, गीता दीदी व रंजू दीदी जालोर सेवा केंद्र संचालिका, प्रभारी विद्युत विभाग ब्रह्माकुमारीज आबूरोड सुधीर भाई, ब्रह्माकुमार मोहन भाई व जगदीश भाई समेत कई मौजूद थे।
शिवलिंग और निराकार शिव के दर्शन
मेले में कई फीट ऊंचे शिवलिंग और इसके पास ही स्थापित आकर्षक रोशनी से सजा निराकार परमपिता शिव का स्वरूप भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान लोगों ने दर्शन कर इसका महत्व भी जाना।
धरती पर ही स्वर्ग और नर्क
मेले में लगी स्टॉल्स में ब्रह्माकुमारों ने लोगों को बताया कि स्वर्ग और नर्क दोनों धरती पर ही हैं। द्वापर और कलयुग नर्क का प्रतीक है। जबकि सतयुग और त्रेता युग स्वर्ग के समान है। इसी तरह ब्रह्माकुमारों ने
सही और गलत का निर्णय खुद लें
महिला-पुरुष ब्रह्माकुमारों ने बताया कि व्यक्ति के कर्म और संस्कार ही मरणोपरांत उसकी आत्मा के साथ जाते हैं। ऐसे में व्यक्ति को सही और गलत का निर्णय खुद लेना जरूरी है और इसके लिए मन को एकाग्र करना और परमपिता परमेश्वर के स्वरूप को जानना जरूरी है। मेले में पहुंचे लोगों की ब्रह्माकुमारों ने विभिन्न उपकरणों के जरिए जांच की। शिविर में उपकरणों के माध्यम से बताया गया कि स्ट्रेस के कारण व्यक्ति का मन कितने प्रतिशत सही कार्य कर रहा है। वहीं स्ट्रेस को दूर करने के लिए अध्यात्मिक शिविर में ज्ञानार्जन की बात भी बताई।

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