जालोर की यह वृद्धा 14 की उम्र में ही हो गई थी विधवा

Dharmendra Ramawat

Updated: 04 May 2019, 11:25:51 AM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

जालोर. बात कुछ ज्यादा पुरानी नहीं है, कुछ छह दशक पहले की ही है। तब अमूमन गांवों में ही नहीं, बल्कि शहरों में भी बाल-विवाह हुआ करते थे और आज भी हो रहे हैं। सरकारी सिस्टम इसके खिलाफ अब सख्ती से खड़ा हुआ है। मगर जैन समाज की इस बेटी का बाल विवाह उसके जीवन भर के लिए अभिशाप बनकर रह गया। हम बात कर रहे हैं पुरा मोहल्ला की एक छोटी सी गली में रहने वाली करीब 80 वर्षीय जीवी बाई जैन की। महज १२ साल की उम्र में हंसी-खुशी परिजनों ने डोली में बिठाकर इसे ससुराल के लिए विदा तो किया, लेकिन शादी के दो साल बाद ही पति ने हादसे में जान गंवा दी। ससुराल वालों से भी उसे एक फूटी कौड़ी तक नसीब नहीं हुई। पति का साथ छूटते ही वह अकेली सी पड़ गई। इसके बाद जालोर के पुरा मौहल्ला स्थित पीहर के मकान में ही रहने लगी। हाथ-पैर चले तब तक खाने-पीने का जुगाड़ भी किया, लेकिन ढलती उम्र ने धीरे-धीरे इसे लाचार बना दिया। अब आंखें भी बूढ़ी हो चुकी हैं और शरीर का एक-एक हिस्सा साथ देने से भी कतरा रहा है। नजदीकी कोई रिश्तेदार नहीं होने से आसपास रहने वाले पड़ोसी थोड़ी बहुत मदद कर देते थे, लेकिन उम्र के इस पड़ाव में जीवी बाई की हालत ऐसी थी कि कोई उसके पास तक नहीं जाता। कई दिनों तक नहाती भी नहीं थी। घर की हालत ऐसी हो चुकी थी कि मलबे का ढेर लग चुका था। श्वान और चमकादड़ों ने भी यहीं डेरा डाल रखा था। इसके बाद शहर की कुछ महिलाओं के समूह को इसकी जानकारी मिली तो वे यहां पहुंची और जीवी बाई की सुध ली।
आगे आई इस समूह की महिलाएं
चार-पांच महीने पहले ही बना ‘हेल्पिंग हेंड समूह’ महिला समूह जीवी बाई के जीवन में रोशनी की किरण लेकर आया। इस समूह की शुरुआत दो महिलाओं ने की। पहली पेशे से सरकारी स्कूल में शिक्षिका के तौर पर कार्यरत सैयद साजिदा अली और दूसरी गृहणी दीपरेखा जैन। अब इस समूह से करीब ४० महिलाएं जुड़ चुकी हैं। इस समूह की महिलाओं ने जीवी बाई के घर पहुंचकर ना केवल घर ही हालत सुधारी, बल्कि उसे गोद भी लिया। साथ ही उसे नहला-धुलाकर अच्छे कपड़े भी पहनाए। घर में बिजली नहीं थी तो इसकी भी व्यवस्था की और उसके लिए कपड़े, स्वास्थ्य जांच, पंखा और खाने-पीने की व्यवस्था भी की।
करवाया हैल्थ चेकअप
हेल्पिंग हेंड समूह की महिलाएं शुक्रवार को भी जीवी बाई जैन के घर पहुंची। यहां कंपाउंडर रमजान खान की मदद से उनके स्वास्थ्य की जांच करवाई। साथ ही कंपाउंडर खान को समय-समय पर उनकी स्वास्थ्य जांच की जिम्मेदारी भी दी। इस दौरान समूह की रजनी बृजेश पूर्व न्यायिक मजिस्ट्रेट, मीनाक्षी शर्मा व डॉ. आरती मोहन भी साथ थीं।
ऐसी हो चुकी थी हालत
पति के गुजरने के बाद ससुराल वालों ने भी जीवी बाई को अकेला छोड़ दिया। नजदीकी रिश्तेदार तक नहीं होने से इस वृद्धा की हालत ऐसी थी कि खुद के दैनिक कामकाज तक नहीं कर पाती थी। घर में रखे पीने के पानी में जानवर मुंह मारते थे और यही पानी वह खुद भी पी लेती थी। नहाए तो उसे महीना बीत जाता था। इस दौरान पड़ोसी जबरन उसे पानी डालकर नहलाते तो वह चिढ़ जाती। फिर भी पड़ोस के लोग खाने-पीने की व्यवस्था करते रहते। फिलहाल जैन भोजनशाला से उसके भोजन की व्यवस्था की जा रही है। अब हेल्पिंग हेंड समूह की महिलाओं ने उसे गोद लेकर उसकी परवरिश का जिम्मा उठाया है।
इस तरह जरूरतमंदों की कर रहे हेल्प
हेल्पिंग हेंड समूह की महिलाएं शहर में संचालित मूक बधिर विद्यालय, अंध विद्यालय व वात्सल्य केयर होम के बच्चों की भी समय-समय पर मदद कर रही हैं। इसके अलावा जरूरत पडऩे पर पीडि़तों को रक्त उपलब्ध कराने के साथ साथ एचआईवी पीडि़त महिलाओं व विधवाओं को रोजगार देने के लिए सिलाई माशीन भी दी गई। इसके अलावा समूह ने जेल में आरओ मशीन भी लगवाई है।

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