इस तरह बिगाड़ रहे शहर का सौंदर्य, आखिर इनके खिलाफ कब होगी सख्त कार्रवाई

Dharmendra Ramawat

Updated: 03 Apr 2019, 05:49:36 PM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

जालोर. लोकसभा चुनावों के तहत मार्च महीने के दूसरे सप्ताह में आचार संहित लागू होने के बाद शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नेताओं और जनप्रतिनिधियों के होर्डिंग्स, पोस्टर व बैनर तो जरूर हटा दिए गए, लेकिन जिला मुख्यालय की बात करें तो यहां अभी भी सरकारी संपत्तियों और साइन बोर्डों पर निजी कंपनियों व विभिन्न संस्थानों के विज्ञापन लगे हुए हैं। जबकि सम्पत्ति विरुपण अधिनियम के तहत संबंधित के खिलाफ नगरपरिषद की ओर से प्रकरण तक दर्ज करवाया जा सकता है। शहर स्थित सरकारी भवनों, नगरपरिषद की सम्पत्ति, साइन बोर्ड और बिजली के पोल पर अभी भी निजी कंपनियों, व्यापारियों और संस्थानों की ओर से मुफ्त में ही विज्ञापन लगाकर हर साल परिषद को लाखों रुपए के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। हालांकि आयुक्त शिकेश कांकारिया ने गत ४ मई २०१८ को इस मामले में सख्ती से ऐसे विज्ञापन स्वयं के स्तर पर हटाने के फरमान भी जारी किए थे, लेकिन इन निर्देशों के बाद कुछेक को छोड़कर किसी ने सरकारी संपत्ति से प्रचार-प्रसार सामग्री नहीं हटाई। हालत यह है कि शहर के मुख्य मार्गों और वार्डों में पहुंचने के लिए लगे साइन बोर्ड पर भी इस तरह के विज्ञापन लगे हुए हैं। जिसके कारण बाहर से आने वाले लोगों को संबंधित स्थान तक पहुंचने में भी परेशानी हो रही है।
कैमरों से आ सकते हैं पकड़ में
शहर के विभिन्न वार्डों और मुख्य मार्गों पर बिजली के करीब चार हजार पोल लगे हुए हैं। इनमें से अधिकतर पोलों पर आए दिन लोग रात के समय पोस्टर और होर्डिंग लगा देते हैं। अब शहर के अधिकतर इलाकों में सीसीटीवी कैमरे भी लग चुके हैं। ऐसे में परिषद चाहे तो ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कदम भी उठा सकती है।
बिगाड़ रहे सौंदर्य
शहर में जगह-जगह निजी कंपनियों व संस्थानों की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर, होर्डिंग्स और बैनर लगाकर शहर का सौंदर्य भी बिगाड़ा जा रहा है। जबकि इसके लिए नगरपरिषद चाहे तो संपत्ति विरुपण अधिनियम के तहत बिना इजाजत के नगपरिषद क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों और सरकारी संपत्ति पर विज्ञापन लगाने पर सम्बंधित के विरुद्ध मामले दर्ज करा सकती है।
तय हैं विज्ञापन साइट्स
गौरतलब है कि नगरपरिषद की ओर से इसके लिए शहर में तीन दर्जन से ज्यादा विज्ञापन साइट्स भी तय कर रखी हैं, जिसके लिए हर साल लाखों के टेंडर जारी किए जाते हैं। ऐसे में हर साल मुफ्त में विज्ञापन लगाने के कारण परिषद को भी लाखों का चूना लगाया जा रहा है।
परिषद दर्ज कराएगी प्रकरण...
नगरपरिषद क्षेत्र में बिना अनुमति के बिजली पोल, यूनीपोल, डिवाइडर, साइन बोर्ड या नगरपरिषद की निजी संपत्ति पर बिना अनुमति के होर्डिंग व बैनर लगाने वालों को पूर्व में स्वयं के स्तर पर हटाने के निर्देश दिए गए थे। इससे परिषद को राजस्व की हानि भी हो रही है। ऐसे में आयुक्त कांकरिया का कहना है कि परिषद की संपत्ति से होर्डिंग्स, पोस्टर व बैनर नहीं हटाने पर संबंधित के खिलाफ जल्द ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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