दावे खोखले साबित हुए तो, गर्मी के मौसम में आधी ही होगी पानी की सप्लाई

50 से 6 0 लीटर पानी ही मिल पाएगी प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन

By: khushal bhati

Published: 13 Mar 2018, 09:41 AM IST


फैक्ट फाइल
6 0 लाख लीटर पानी की जरुरत जालोर शहर के लिए प्रतिदिन
50 लाख लीटर पानी अभी पूरी तरह से पुराने स्रोतों से मिल रहा
8 0 लीटर प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति के अनुसार हो रही सप्लाई
72 घंटे का है अभी शैड्यूल
40 लाख लीटर तक ही पानी उपलब्ध हो पाएगी भरी गर्मी में प्रतिदिन
जालोर ञ्च पत्रिका. नर्मदा परियोजना की बहाली में देरी का खामियाजा सीधे तौर पर इस बार गर्मी के मौसम में शहरवासियों को भुगतना पड़ेगा। गर्मी में पानी की जरुरत बढऩे के साथ ही पुराने पेयजल स्रोतों पर अतिरिक्त बोझ बढऩे से प्रोडक्शन घटेगा, जिससे पानी की सप्लाई का शैड्यूल भी बिगड़ेगा। जलदाय विभाग के अधिकारी नर्मदा परियोजना पर आंखें गडाए बैठे हैं कि कब तक वहां से पानी मिल पाएगा। संभावना है कि नर्मदा परियोजना से अपे्रल माह में पानी की सप्लाई नहीं हो पाएगी। जिससे पुराने स्रोतों से भी पानी कम मिलेगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल 8 0 लीटर प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति के अनुसार शहर में पेयजल सप्लाई 72 घंटे से हो रही है। अनुमान है कि गर्मी में यह प्रोडक्शन 40 से 45 लाख लीटर ही प्रतिदिन हो पाएगा। जिससे 50 से 6 0 लीटर प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति पानी की सप्लाई होगी।
बढ़ सकता है इंतजार भी
यदि नर्मदा परियोजना से गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है तो शैड्यूल प्रभावित होगा। फिलहाल 72 घंटे में पानी की सप्लाई शहर में की जा रही है। लेकिन यह इंतजार पानी की कमी के बढ़ जाएगा और शेड्यूल 96 घंटे तक पहुंच जाएगा।
अभी से ही बिगडऩे लगे हालात
बेहतर स्थिति में जलदाय विभाग की ओर से फिलहाल 72 घंटे में शहर में सप्लाई हो रही है। लेकिन सप्लाई अभी ट्यूबवैल पर निर्भर है और आधी सप्लाई का आधार 35 किमी दूरी पर स्थिति कुआबेर स्रोत है। ऐसे में इन स्रोतों पर यदि बिजली कटौती या अन्य किसी कारण से व्यवधान आता है तो पानी का प्रोडक्शन पूरी तरह से प्रभावित होता है। जिससे शहर की सप्लाई बाधित होती है। गौरतलब है हाल ही में खानपुर स्रोत की बिजली लाइन पर पेड़ गिरने से तार टूटने से बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से शहर की सप्लाई प्रभावित हुई थी। यह पहला मौका नहीं है जब ऐसे हालात बने हो। इससे पूर्व भी बिजली कटौती और पाइप लाइन डेमेज की स्थिति में सप्लाई के शैड्यूल प्रभावित हुए हैं।
यूं समझें पूरे मामले को
इस साल अच्छी बारिश तो हुई साथ ही बाढ़ के हालात से नर्मदा परियोजना पूरी तरह प्रभावित भी हुई। नर्मदा प्रोजेक्ट से जालोर शहर के लिए लगभग 50 लाख लीटर पानी प्रतिदिन उपलब्ध हो रहा था। जबकि पुराने ट्यूबवैल से 25 से 30 लाख लीटर पानी बारिश से पूर्व उपलब्ध था। जिससे 48 घंटे में 100 लीटर प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति के अनुसार सप्लाई हो रही थी। लेकिन नर्मदा परियोजना ठप होने से जालोर शहर को मिलने वाला 50 लाख लीटर पानी अब उपलब्ध नहीं हो रहा।
ऐसे में अभी सप्लाई पूरी तरह से ट्यूबवैल पर निर्भर है। हालांकि पिछले साल मानसून के दौरान अच्छी बारिश के चलते जवाई नदी व अन्य नदियों में बहाव से ट्यूबवैल रिचार्ज होने से इनसे अभी अच्छी मात्रा में पानी मिल रहा है। लेकिन गर्मी बढऩे के साथ इनका अधिक दोहन होने से इनसे मिलने वाले पानी की मात्रा में कटौती आएगी। स्वाभाविक है इससे शहर को सप्लाई के लिए मिलने वाला पानी भी कम उपलब्ध हो जाएगा।
पुराने स्रोत पर निर्भरता
&पिछले साल अच्छी बारिश होने से फिलहाल पेयजल सप्लाई ठीक है और 72 घंटे में सप्लाई की जा रही है। नर्मदा परियोजना से 31 मार्च से पानी देने की बात कही जा रही है।
- कमलजीत बेगरा, एसई, जलदाय विभाग, जालोर

khushal bhati Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned