नेहड़ में बेखौफ चल रहा कोयले का काला धंधा

Dharmendra Ramawat | Updated: 13 Oct 2018, 04:36:27 PM (IST) Jalore, Rajasthan, India

नेहड़ के कई गांवों से रोजाना दूसरे राज्यों में जाता है कोयला

श्रवण जांगू
हाड़ेचा. नेहड़ क्षेत्र के कई गांवों में कोयले का काला धंधा बेखौफ किया जा रहा है। ऐसे में नेहड़ की कई ग्र्राम पंचायतों की गोचर भूमि वीरान होने लगी है। इसके बावजूद जिम्मेदार कार्रवाई को लेकर मौन नजर आ रहे हैं। नेहड़ के गोचर व ओरण के साथ सिवाय चक भूमि में ठेकेदारों की ओर से मजदूरों को ठेके में कार्य देकर कोयला बनवाया जा रहा है और कई गांवों में सड़क के पास ही कोयले के ढेर लगे हुए हैं। जिम्मेदार इन कोयलों के ढेर के पास से गुजरते भी हैं, लेकिन वे इसे अनदेखा कर रहे हैं। क्षेत्र के जानवी, केसूरी, गलीफा, मरटवा, दूठवा, टंापी, केसूरी, खासरवी, पावटा, संूथड़ी, सुराचंद, सांकरिया, धींगपुरा, नलदरा, जोरादर, भवातड़ा व खेजडिय़ाली ग्राम पंचायत के कई गांवा में गोचर भूमि से बेखौफ बबूल की कटाई हो रही है। इससे नेहड़ में ना केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि गोचर भूमि वीरान होती जा रही है।
राजस्व की भी हानि
कोयला के अवैध कारोबार के लिए गोचर भूमि में कटाई के कारण पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। वहीं राजस्व विभाग को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। हालांकि क्षेत्र की ग्राम पंचायतों को भी इस बारे में अवगत करवाया गया, लेकिन पंचायत भी कार्रवाई लेकर मौन है।
गांवों में लगे हैं ढेर
नेहड़ के साकरियां गांव के पास, खासरवी के वरणवा रोड, सुराचंद की मुख्य सड़क व जोरादर सड़क पर बाड़े में ठेकेदारों की ओर से हजारों बोरियों में कोयला भरा पड़ा है। रोजाना यहां खुलेआम दिन में ट्रकों को भरा जाता है और रात में अन्य राज्यों में कोयला भेजा जा रहा है।
पाबंदी के बावजूद चल रहा कारोबार
गौरतलब है कि गुजरात सहित अन्य राज्यों में वनविभाग की ओर से कोयला बनाने को लेकर लीज दी जाती है। जबकि क्षेत्र में इस पर प्रतिबंध है। ऐसे में वाहन संचालक कोयला ठेकेदार के साथ मिलकर गुजरात से फर्जी बिल्टी बनाकर लाते हैं और हाइवे पर कोयलों से भरी बोरियां ले जाते समय पुलिस व अन्य अधिकारियों को यह बिल्टी बता देते हैं। ये गाडिय़ां नेहड़ में सड़क किनारे बाड़ों से भरकर रात के समय हाइवे पर पार होती हैं।
अधिकारी एक दूसरे पर थोप रहे जिम्मेदारी
कोयले के अवैध कारोबार को लेकर राजस्व विभाग के अधिकारी मामले को टालते हुए इसे ग्राम पंचायत स्तर का मामला बता रहे हैं। वहीं विकास अधिकारी से स्वीकृति की बात कही जा रही है। जबकि गोचर व ओरण भूमि राजस्व विभाग के अधीन आती है। विकास अधिकारी की मानें तो कोयला बनाने के लिए नेहड़ की किसी भी ग्राम पंचायत में टेंडर नहीं हुआ है। फिर भी इस बारे में जानकारी ली जाएगी। हकीकत पर गौर करें तो गोचर भूमि में अतिक्रमण व पेड़-पौधों की कटाई सहित अवैध कारोबार के मामलों में राजस्व विभाग और पुलिस कार्रवाई करती है, लेकिन यहां सभी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपते नजर आ रहे हैं।
इनका कहना...
संूथड़ी में गोचर से अवैध रूप से बबूल काटने के अलावा कोयले बनाने का कार्य चल रहा है, लेकिन यह मामला ग्राम पंचायत स्तर का नहीं है और ना ही पंचायत ने ऐसी कोई स्वीकृति दी है।
- नसरीन बानो, सरपंच, सूथड़ी
& नेहड़ के राजस्व गांवों में अवैध रूप से बबूल व बहुमूल्य लकड़ी की कटाई का माला राजस्व विभाग के अधीन नहीं आता है। यह कार्य पंचायत समिति स्तर का है। ऐसे में वैध या अवैध है बीडीओ ही बता सकते हैं।
- मिश्रीमल झंवर, तहसीलदार, चितलवाना
नेहड़ में अवैध कोयला कारोबारियों पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। क्षेत्र में नियमित रूप से कार्रवाई को लेकर टीम भी गठित की गई है।
- घेवरचंद चौधरी, थानाप्रभारी, सरवाना
पंचायत समिति की ओर से ऐसी कोई स्वीकृति नहीं दी गई है। ऐसा कोई मामला मेरी जानकारी में नहीं है। फिर भी अगर अवैध कोयला बनाने का मामला है तो इस बारे में जानकारी ली जाएगी।
- तेजाराम चौधरी, बीडीओ, चितलवाना

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