2020 में पूरी नहीं हो पाई जालोरवासियों की ये उम्मीदें

वर्ष 2019 बीतने के दौरान बहुत सी उम्मीदें और प्रोजेक्ट थे जो अंतिम दौर में थे। ऐसे में आस थी कि वे वर्ष 2020 में ये कार्य जरुर पूरे होंगे, लेकिन मार्च से कोरोना संक्रमण ने पैर पसारने शुरू किए तो सारा सरकारी सिस्टल हिल गया और सरकारी लवाजमा कोरोना से लडऩे में ही व्यस्त हो गया। नतीजा यह हुआ कि जिन प्रोजेक्ट की क्रियान्विति वर्ष 2020 में होनी थी वह नहीं हो पाई।

By: Dharmendra Kumar Ramawat

Published: 29 Dec 2020, 09:56 AM IST

जालोर. वर्ष 2019 बीतने के दौरान बहुत सी उम्मीदें और प्रोजेक्ट थे जो अंतिम दौर में थे। ऐसे में आस थी कि वे वर्ष 2020 में ये कार्य जरुर पूरे होंगे, लेकिन मार्च से कोरोना संक्रमण ने पैर पसारने शुरू किए तो सारा सरकारी सिस्टल हिल गया और सरकारी लवाजमा कोरोना से लडऩे में ही व्यस्त हो गया। नतीजा यह हुआ कि जिन प्रोजेक्ट की क्रियान्विति वर्ष 2020 में होनी थी वह नहीं हो पाई। सीधे तौर पर इन हालातों के लिए कोरोना संकट काफी हद तक जिम्मेदार रहा। सरकारी राशि विशेष तौर पर केंद्र सरकार की ओर से भारी भरकम बजट वैश्विक महामारी से लडऩे पर लगाया गया। एक दौर ऐसा भी था जिसमें सभी कार्य रोक दिए गए थे। जिसका नतीजा यह हुआ कि विकास कार्य की गति थम गई। माना जा सकता है कि वर्ष 2020 कोविड के लिए ही याद रखा जाएगा। इन हालातों में जिले से जुड़े बहुत से ऐसे प्रोजेक्ट और विकास कार्य हैं, जो ठप है। सीधे तौर पर वर्ष 2020 में जो प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाए हैं, उनकी क्रियान्विति के लिए अब वर्ष 2021 से बहुत ज्यादा आस है। (एसं)
लेटा मार्ग पर रेलवे ओवरब्रिज
करीब पांच पूर्व घोषित जालोर-लेटा मार्ग रेलवे ओवरब्रिज के लिए इस वर्ष जीएडी एप्रूव जरुर हुई और उसके बाद मुख्यालय से अंतिम स्तरीय क्वेरी के बाद दस्तावेज मॉर्थ को भेजा जा चुका है। मामला अंतिम स्तर पर अटका पड़ा है। चूंकि साल बीतने को है तो आस है कि अब नए साल में इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए बजट आवंटित होने के साथ काम भी शुरू हो जाएगा। जिसके बाद भविष्य में इस क्रॉसिंग पर वाहनों की लंबी कतारों से राहत मिलेगी।
एनएच बाइपास प्रोजेक्ट
नेशनल हाइवे 325 के तहत जालोर शहर के निकट एक बाइपास प्रोजेक्ट में शामिल है। यह बाइपास पहाड़पुरा जवाई नदी बहाव के पास से होते हुए शनिधाम के निकट से गुजरने वाला है। यह प्रोजेक्ट भी अभी मंत्रालय में अटका पड़ा है। माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट पर भी अब नए वर्ष में स्वीकृति जारी होगी। जिसके बाद बिशनगढ़, मांडवला की तरफ से जोधपुर, पाली, जयपुर के लिए आने जाने वाले वाहन चालकों को जालोर शहर में एंट्री की जरुरत नहीं रहेगी। सीधे तौर पर ट्रेफिक रिलिफ मिलेगा।
जालोर फोर्ट रोप-वे, सडक़ प्रोजेक्ट
जालोर रोप-वे प्रोजेक्ट करीब छह साल पहले स्वीकृत हुआ था। प्रोजेक्ट में केंद्र सरकार ने 8 करोड़ जारी किए थे, लेकिन प्रोजेक्ट की तुलना में राशि कम होने से कोई एजेंसी से प्रोजेक्ट में रुचि नहीं दिखाई। दूसरी तरफ दुर्ग तक सडक़ निर्माण के लिए सर्वे को दानदाता आगे आए हैं। ऐसे में अगले साल में दुर्ग के लिए रोप-वे या सडक़ निर्माण कार्य के लिए सकारात्मक पहल होनी संभव है। जिसके परिणामस्वरूप भविष्य में जालोर फोर्ट तक भी पर्यटक पहुंच सकेंगे।
भवातड़ा इनलैंड पोर्ट
जालोर जिले के सांचौर क्षेत्र में नेहड़ से लगते भवातड़ा क्षेत्र में इनलैंड पोर्ट प्रस्तावित है। इसका सर्वे वेपकॉस ने किया था, जिसके बाद यह प्रोजेक्ट भी मंत्रालय में अटका पड़ा है। प्रोजेक्ट कोस्ट 20 हजार करोड़ है और प्रोजेक्ट के तहत खुदाई कर बड़े पैमाने पर समुद्री पानी इन केनाल में लाना है और इस समुद्री मार्ग से बड़े बड़े जहाज भवातड़ा तक पहुंच सकेंगे। यह प्रोजेक्ट पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण है।
बर्ड सेंचुरी पर हरी झंडी का इंतजार
रणखार क्षेत्र शांत और वन्य जीवों के लिए सुरक्षित है। ऐसे में वन विभाग ने यहां के लिए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के तहत बर्ड सेंचुरी के लिए प्रोजेक्ट साल की शुरुआत में स्वीकृति के लिए भेजा है। यह क्षेत्र गुजरात और बाड़मेर से भी सटता हुआ है। विशेष तौर पर सर्दी के मौसम में यहां प्रवासी पक्षियों की भरमार रहती है, जो यही प्रजनन भी करते हैं।
इलेक्ट्रिक रेल लाइन रूट
समदड़ी-भीलड़ी रेलवे टे्रक के विद्युतीकरण की स्वीकृति भी करीब पांच वर्ष हो चुकी है। कई रेल खंडों में इसके लिए काम चल रहा है, लेकिन जालोर होकर गुजर रही रेल लाइन का अभी सर्वे का काम ही हो पाया है। आस है इस वर्ष इस प्रोजेक्ट की क्रियान्विति भी होगी और उसके परिणाम स्वरूप इस रूप पर अधिक यात्री गाडिय़ों का संचालन भी हो पाएगा।
जवाई पुनर्भरण प्रोजेक्ट
जिले से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। हालांकि जवाई बांध पाली जिले में स्थित है, लेकिन इस प्रोजेक्ट से जालोर जिले के आहोर कमांड के गांव लाभान्वित होते हैं। जवाई बांध में वर्तमान में पानी की आवक से ज्यादा डिमांड है। इसलिए जवाई पुनर्भरण प्रोजेक्ट जरुरी है। अभी यह प्रोजेक्ट रेंग रहा है, जिसके रफ्तार पकडऩे का इंतजार है।
इन प्रोजेक्ट पर भी नजर
शहर के निकट मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए भी चर्चाएं चली, लेकिन मामला ढिलाई की भेंट चढ़ रहा है। इसके अलावा जालोर से सांचौर नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट, सुंदेलाव तालाब के सौंदर्यन, सांकरना से थर्ड फेज की तरफ बाइ पास प्रोजेक्ट, सिटी पार्क, ट्रांसपोर्ट नगर को लेकर भी चर्चाएं चली, लेकिन अभी सभी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में हैं।

Dharmendra Kumar Ramawat Reporting
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