भारत में अब खुली सांसें ले पाएंगे अब ये पाक विस्थापित

Khushal Singh Bhati

Updated: 20 Jun 2019, 11:06:40 AM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

जालोर. देश की आजादी के बाद भारत पाक विभाजन के दौरान बने हालातों से भारत आने की चाहत के बीच बने गंभीर हालातों में पाकिस्तान में ही रहने की मजबूरी इन विस्थापितों की जुबां पर साफ झलक रही थी। सालों से भारतीय नागरिकता का इन पाक विस्थापितों को इंतजार था। चूंकि भारतीय होने के बाद भी इन लोगों को भारतीय नागरिकता नहीं मिली थी। विभिन्न प्रोसेस के बाद बुधवार को जिले में रह रहे पांच विस्थापितों को आखिरकार भारतीय नागरिकता मिल गई। जिला कलक्टर महेंद्र सोनी ने श्रीमती अन्तरबाई पत्नी जेतमाल सिंह निवासी ग्राम कावतरा तहसील बागोड़ा, फरसाराम पुत्र चन्दुजी निवासी सांचौर, डाखोमल पुत्र रानोमल निवासी खेजडिय़ावास तहसील सांचौर, श्रीमती चंपा पत्नी मानो निवासी देवड़ा तहसील चितलवाना एवं भैरूसिंह पुत्र चैनसिंह निवासी बावतरा तहसील सायला को भारतीय नागरिकता के प्रमाण पत्र प्रदान किए। विश्व शरणार्थी दिवस से एक दिन पूर्व इन विस्थापितों को मिली भारतीय नागरिकता से ये भावुक हो उठे। इन सभी विस्थापितों का यही कहना था कि हम दिल से भारतीय ही थे, लेकिन कागजी तौर पर ऐसा नहीं था। अब नागरिकता मिली है, जिसकी खुशी है और अब गर्व से कह सकते हैं कि हम भारतीय है।
अभी तक 71 विस्थापितों को नागरिकता का इंतजार
जिला मजिस्ट्रेट महेन्द्र सोनी ने जिले में अस्थायी निवासरत भारतीय नागरिकता चाहने वाले शेष रहे 71 प्रकरणों के मामलों में भी शीघ्र ही कार्रवाई कर उन्हें नागरिकता दिये जाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला पुलिस अधीक्षक केसरसिंह शेखावत एवं अतिरिक्त जिला कलक्टर छगनलाल गोयल मौजूद रहे।
इसलिए मनाया जाता है शरणार्थी दिवस
विश्व भर में शरणार्थियों की स्थिति के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 20 जून को विश्व शरणार्थी दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य शरणार्थियों की दुर्दशा पर ध्यान आकर्षित करना है। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव पारित कर वर्ष 2001 से प्रतिवर्ष 20 जून को इस दिवस को मनाने का निर्णय लिया। संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 में संपूर्ण विश्व में 65.6 मिलियन (6.56 करोड़) लोग अपने घरों से विस्थापित हुए थे। यह विस्थापना विरोध, हिंसा एवं मानवाधिकार उल्लंघन के परिणामस्वरूप हुआ। इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 में शरणार्थियों की अनुमानित संख्या वर्ष 2015 के मुकाबले 3 लाख ज्यादा है। वर्ष 2016 के अंत तक विश्वभर में 22.5 मिलियन लोग शरणार्थी थे। 40.3 मिलियन लोग आंतरिक रूप से बेघर हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2.8 मिलियन शरण तलाशने वाले लोग हैं।
3 सैकंड में 1 व्यक्ति विस्थापित होता है
संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार प्रति 3 सेंकट में 1 व्यक्ति विस्थापित हुआ। यूएनएचसीआर ने अपनी सालाना ग्लोबल ट्रेंडस रिपोर्ट में कहा कि 2017 के अंत तक 6.85 करोड़ लोग विस्थापित हुए थे। संकट और अत्याचार के कारण अपना देश छोड़कर भागने वाले शरणार्थियों की संख्या कुल 2.54 करोड़ थी। इस मामले में म्यांमार के रोहिंग्या समुदाय का लगातार अपने देश से निकाला जाना हाल के सालों में काफी चर्चा में रहा है।
110 व्यक्तियों में से 1 विस्थापित
2017 के दौरान 1.62 करोड़ लोग विस्थापित हुए थे, यह या तो पहली बार या फिर बार-बार विस्थापन का शिकार हुए। यह लोगों की एक बड़ी संख्या को दर्शाता है और इससे हर दिन करीब 44,500 लोगों के विस्थापित होने का संकेत मिलता है। रिपोर्ट में यह तथ्य चौंकने वाला है कि विस्थापन के लिए मजबूर हुए लोगों की संख्या थाईलैंड की आबादी के समान है। सभी देशों में, हर 110 व्यक्तियों में से एक विस्थापित होता है।

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