नाम की डिग्गियां, विभाग की निगरानी में ही चोरी के पानी से हो रही सिंचाई!

नाम की डिग्गियां, विभाग की निगरानी में ही चोरी के पानी से हो रही सिंचाई!
Irrigation with theft water under the supervision of the department

Dharmendra Ramawat | Updated: 22 Nov 2018, 11:55:10 AM (IST) Jalore, Jalore, Rajasthan, India

आठ साल बाद भी विभाग के अधूरे सिस्टम के चलते हो रहा है करोड़ों का नुकसान

फैक्ट फाइल
वर्ष 2008 में तैयार हुई नर्मदा नहर परियोजना
परियोजना पर खर्च- 2482.49 करोड़ रुपए
परियोजना क्षमता-2600 क्यूसेक
परियोजना के तहत कुल सिंचित भूमि का लक्ष्य-2.46 लाख है.
मुख्य कैनाल की कुल लम्बाई-74 किमी
वितरिकाओं व माइनों की लम्बाई-1793 किमी
मुख्य कैनाल में कुल वितरिकाएं-12
कुल डिग्गियों का निर्माण-2236
वींजाराम डूडी
सांचौर. नर्मदा विभाग की ओर से सियाळू सीजन के लिए छोड़े गए पानी की आड़ में इन दिनों विभागीय मिलीभगत सामने आ रही है। विभाग की ओर से सिंचाई के लिए तैयारी की गई डिग्गियां 8 साल बाद भी महज औपचारिक साबित हो रही है। जानकारी के अनुसार नर्मदा नहर परियोजना के तहत करीब 2 हजार 236 डिग्गियां बनाई गई। जिनसे कमांड क्षेत्र में सिंचाई होना प्रस्तावित है, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते करीब 80 प्रतिशत डिग्गियां आज भी किसी काम नहीं आ रही हैं। वहीं दूसरी ओर विभागीय शह के चलते नहर का पानी चुराकर किसान खेती कर रहे हैं। जिसकी वजह से प्रतिवर्ष सिंचाई के नाम पर सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाया जा रहा है। इसको लेकर ना तो प्रशासन गंभीर है और ना ही आला अधिकारी इस मामले में कोई कार्रवाई कर रहे हैं।
नर्मदा नहर परियोजना के तहत इस साल नहर में सिंचाई के लिए ६३५ क्यूसेक पानी छोडऩे का दावा किया जा रहा है, लेकिन डिग्गियों से सिंचाई के बजाय नहरों व वितरिकाओं में अवैध पाइप डालकर चोरी के पानी से सिंचाई की जा रही है। मजे की बात तो यह है कि विभाग ने नहरी सिस्टम में निगरानी के लिए अधिकारियों की ड्यूटी तक लगा रखी है और उन्हीं अधिकारियों की निगरानी में हो रही पानी की चोरी विभागीय कार्यशैली पर सवालिया निशान छोड़ रही है। जबकि सिंचाई के लिए किसानों को डिग्गियों से कनेक्शन जारी करने के नाम पर विभाग की ओर से करोड़ों रुपए का बजट खर्च किया गया। इसके बावजूद इस नहरी सिस्टम को डवलप नहीं के कारण नर्मदा से निकलने वाली वितरिकाओं व लिफ्ट कैनाल की बात तो दूर नर्मदा मुख्य कैनाल की परिधी में आने वाले क्षेत्र में पाइप डालकर चोरी के पानी से सिंचाई करने का खुला खेल चल रहा है। फिर भी विभाग खानापूर्ति के नाम अभियान चलाकर औपचारिकता पूरी कर रहा है।
माइनर व वितरिकाओं से अवैध सिंचाई
नर्मदा विभाग ने दिखावे के लिए डिग्गियों का निर्माण तो करवा दिया, लेकिन उसे डवलप किए बिना ही अधूरा छोड़ दिया गया। जिसकी वजह से वर्तमान मेंडिग्गियों का बड़ा भाग कनेक्शन के अभाव में अधूरा पड़ा है। पानी छोडऩे पर विभाग निर्धारित दर भी वसूल नहीं कर पा रहा है। ऐसे में पिछले आठ वर्ष से ज्यादा समय से विभागीय उदासीनता के चलते सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाया जा रहा है। जबकि मौजूदा समय में इन माइनर व वितरिकाओं से पाइप डालकर अवैध सिंचाई की जा रही है।
यह है परियोजना का खाका
वर्ष 2008 में तैयार हुई नर्मदा नहर परियोजना का निर्माण कार्य 1993 में शुरू हुआ था। इस पर 2482.49 करोड़ रुपए की लागत आई। इस परियोजना की क्षमता 2600 क्यूसेक पानी की है। इसके तहत 2.46 लाख हैक्टेयर भूमि सिंचित करने का विभाग ने खाका तैयार किया है। जिसके तहत 1.63 लाख हैक्टेयर भूमि सांचौर व 0.83 लाख हैक्टेयर भूमि बाड़मेर में सिंचाई के लिए विभाग ने अंतिम योजना बनाई है। करीब 74 किमी लंबी मुख्य कैनाल में 12 वितरिकाएं हंै, जिनमें 9 वितरिका नेचुरल फ्लो व 3 लिफ्ट वितरिका बनाई गई हैं। परियोजना व वितरिकाओं की सभी माइनरों की कुल लम्बाई 1793 किमी है। जिस पर 2 हजार 236 डिग्गियां बनाई गई हैं।
निगरानी के लिए करोड़ों की पेट्रोलिंग
नर्मदा विभाग की अनियमितता का अदंाज इस बात से लगाया जा सकता है विभाग की ओर से प्रतिवर्ष पेट्रोलिंग के नाम पर करोड़ों रुपए के टेंडर जारी किए जाते हैं। जिसका उद्देश्य नहरी पानी की चोरी रोकना है। ये टेंडर विभागीय मिलीभगत के चलते महज कागजी साबित हो रहे हैं, लेकिन पानी चोरी रोकने की योजना महज कागजों में दफन होकर रह जाती है। विभागीय अधिकारियों की उदासीनता पर ना तो प्रशासन की नजर रहती है और ना ही विभाग इस मामले में गम्भीरता से कोई कार्रवाई कर रहा है।
इनका कहना...
विभाग की ओर से डिग्गियों के माध्यम से सिंचाई का प्रावधान बना रखा है। इसको लेकर डिग्गियों के चुनाव भी करवाए गए हैं। कुछ डिग्गियां अगर शुरू नहीं हुई है तो उस पर तुरन्त एक्शन लेने के निर्देश दिए जाएंगे।
- वासुदेव चारण, एक्सईएन, नर्मदा नहर परियोजना सांचौर

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