जालोर का बेटा विदेश में ला रहा है लोगों के जीवन में उजाला

जालोर का बेटा विदेश में ला रहा है लोगों के जीवन में उजाला
जालोर का बेटा विदेश में ला रहा है लोगों के जीवन में उजाला

Dharmendra Ramawat | Publish: Sep, 26 2018 11:41:28 AM (IST) | Updated: Sep, 26 2018 11:41:29 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

नेत्र विशेषज्ञ बने रघुवीरसिंह चौहान अफ्रीका के गैबोन में कर रहे आंखों का इलाज

जालोर. जिले के छोटे से गांव दांतिया का एक बेटा रघुवीरसिंह चौहान इन दिनों अफ्रीका के गैबोन देश में उन लोगों के जीवन में उजाला ला रहा है, जो दुनिया देखने से वंचित थे। 31 वर्षीय रघुवीरसिंह पांच महीनों के एक प्रोजेक्ट पर गैबोन में हैं और वहां लोगों के आंखों का उपचार कर रहे हैं। अब तक वे दो लाख लोगों की आई स्क्रीनिंग कर चुके हैं और तीन हजार ऑपरेशन कर लोगों के जीवन में रोशनी भर चुके हैं। दुनिया के कई देशों में ये नेत्र रोगों पर पत्रवाचन भी कर चुके हैं। रघुवीर बताते हैं कि नाम उच्चारण में दिक्कत होने के चलते वे उन्हें प्रिंस नाम से बुलाते हैं। अपनी पढ़ाई के संबंध में वे कहते हैं कि सांचौर के उच्च माध्यमिक विद्यालय से हिंदी माध्यम से पढ़ाई की थी, इसके चलते चुनौतियां बड़ी थी। बारहवीं बमुश्किल प्रथम श्रेणी बनी। दिल्ली के ग्लोबल इंस्टीट्यूट से इन्होंने डॉक्टर इन ऑप्टोमैट्री की परीक्षा 87 प्रतिशत अंकों से पास की। बाद में इनका चयन हैदराबाद एलवी प्रसाद संस्थान में हुआ और आंख का पर्दा और काला मोतिया के विषय पर दो वर्ष का फैलोशिप की।
प्रेरणा से भर दिया कलाम ने
रघुवीर बताते हैं कि हैदराबाद में एक दिन भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम की आंखें उन्होंने जांची तो उनके व्यवहार ने बहुत प्रभावित किया। उस कर्मशील व्यक्तित्व से मुलाकात के बाद वे प्रेरणा से भर गए।
बेस्ट रहा पेपर
अहमदाबाद के रघुदीप अस्पताल में काम करते हुए उन्होंने कैरोटोकोनस नामक बीमारी पर शोध किया और जब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली में पत्रवाचन किया तो उन्हें खूब दाद मिली। उनका यह पत्र सर्वश्रेष्ठ चुना गया। बाद में उन्हें शिकागो में विश्व ऑप्टोमैट्री कान्फ्रेंस में भी पत्रवाचन किया।
अंधता मुक्त का सपना
रघुवीर जालोर में अंधता मुक्ति का सपना मन में रखते हैं। वे बताते हैं कि जालोर स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से खूब पिछड़ा है। ऐसे में वे जिले में आंखों के मामले में प्रभावी काम करना चाहते हैं और जालोर को अंधता मुक्त करना चाहते हैं।
मुश्किलें देती है मौका
रघुवीर बताते हैं कि मुश्किलें ही व्यक्ति को न केवल नया करने का मौका देती है बल्कि हमारी क्षमताओं को परखने, इस्तेमाल करने और विकसित करने का अवसर भी देती है। अवसरों के साथ मुश्किलें अनायास ही नहीं आती। ऐसा उनके जीवन में भी हुआ, लेकिन हर बार वे आगे बढ़ते चले गए। जालोर प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़े इसके लिए यहां के युवाओं को इसी तरह प्रयास करने चाहिए।

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