मौसम का अलर्ट तो छोडिय़े, बारिश के आंकड़े भी नहीं मिलेंगे

मौसम का अलर्ट तो छोडिय़े, बारिश के आंकड़े भी नहीं मिलेंगे

Khushal Singh Bhati | Updated: 08 Aug 2019, 10:48:18 AM (IST) Jalore, Jalore, Rajasthan, India

- जालोर जल संसाधन विभाग स्थित कंट्रोल रूम के हालात, 15 जून को स्थापित हुआ था कंट्रोल रूम, तब से ही कंट्रोल रूम का फोन खराब

कंट्रोल रूम के हालात...
जालोर. मानसून सीजन से पूर्व ही हर साल जल संसाधन विभाग में मानसून के दौरान बारिश के हालातों पर नजर रखने को कंट्रोल रूम स्थापित किया जाता है, जहां से महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान प्रदान होता है, लेकिन इस साल हालात उलट है और 15 जून को कंट्रोल रूम स्थापित होने के बाद से करीब 50 दिन गुजर जाने के बाद अब तक यहां का बेसिक फोन शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में न तो कंट्रोल रूम तक बारिश होने पर सीधे तौर पर सूचनाएं पहुंच पा रही है। न ही इन सूचनाओं को कंट्रोल रूप से हासिल किया जा सकता है। जबकि इस कंट्रोल रूम की महत्ता की बात करें तो 1973, 1990, 2006, 2017 में बाढ़ के हालातों में सूचनाओं के आदान प्रदान में इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन इस साल अब तक हालात नहीं सुधरे हैं। मामले में न तो जिला प्रशासन, न ही विभागीय अधिकारी गंभीर है। ऐसे में सूचनाओं का आदान प्रदान पूरी तरह से प्रभावित है और विभागीय अधिकारी और कार्मिक मामले में जिम्मेदारी से बचते हुए चैन की नींद में सो रहे हैं।
दिक्कत लेकिन विभाग भी गंभीर नहीं
नियंत्रण कक्ष के बेसिक नंबर 02973-222249 है। यह कार्यालय का नंबर भी है। विभागीय जानकारी के अनुसार 15 जून को नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया। इस दौरान भी बेसिक नंबर खराब था। इस बारे में बीएनएसएल के अधिकारी को सूचित किया गया। जल संसाधन विभाग के कार्मिकों का कहना है कि इस बारे में बीएसएनएल के स्टाफ ने केबल कटने को कारण बताया, जिसके बाद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया, जिससे दिक्कत आ रही है। यहां कनेक्शन अंडर ग्राउंड केबलिंग पर था। अब फिर से बाहरी स्तर पर भी केबल लगाई गई है, लेकिन हालात जस के तस है। मामले का दूसरा पहलू यह भी है कि जल संसाधन विभाग के अधिकारी और कार्मिक भी खुद की जिम्मेदारी से बच रहे हैं। जिससे सूचनाओं का आदान प्रदान नहीं हो रहा है। हालांकि इस बार अब तक बारिश कम हुई है, लेकिन यदि विकट हालात बनते तो यह कंट्रोल रूप नाकारा ही साबित होते और यहां का स्टाफ विकट हालात में भी चादर तान कर चैंन की नींद में सोता। यह नंबर इतना महत्वपूर्ण है और इसी पर सूचनाओं का आदान प्रदान भी होता है तो विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर यह बेपरवाही समझ से परे है।
तो खतरे के हालात
सीधे तौर पर देखे तेा यह केवल एक बेसिक फोन के खराब होने का मामला है, लेकिन मामले का दूसरा पक्ष यह है कि जिले का बाढ़ नियंत्रण कक्ष है। अतिवृष्टि में जवाई बांध के गेज समेत अन्य बांधों के गेज की जानकारी जिले तक यहां से ही पहुंचती है। यही नहीं बारिश से संबंधित आंकड़े भी यही एकत्र होते हैं। यहां वायरलेस सेट लगा है, जो गंभीर हालातों में विभागीय स्तर पर सूचनाओं का आदान प्रदान करता है और मैसेज भी फॉरवर्ड करता है। महत्वपूर्ण सूचनाएं बेसिक फोन पर ही मिलती है। अक्सर कंट्रोल रूम में रोस्टर के अनुसार स्टाफ बदलता रहता है तो मोबाइल नंबर पर भी सूचनाओं का आदान प्रदान प्रभावशाली नहीं हो सकता। जितना की बेसिक नंबर पर हो सकता है।
इनका कहना
कंट्रोल रूम 15 जून को स्थापित हुआ था। उसके बाद से ही बेसिक फोन खराब है। बीएसएनएल अधिकारियों को सूचित किया गया, लेकिन उसके बाद भी स्थायी समाधान नहीं हुआ है। फोन अभी खराब है।
- अब्दुल बागे, एईएन, जल संसाधन विभाग, जालोर.

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