जालोर में यहां दिखी टिड्डी और फिर....

Khushal Singh Bhati

Publish: Jun, 03 2019 10:45:10 AM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

जालोर. पकिस्तान से सटे राजस्थान के क्षेत्रों में टिड्डी की उपस्थिति के बीच जालोर के राजपुरोहित हॉस्टल में भी कुछ टिड्डी दिखाई देने की सूचना पर विभागीय दल रविवार सवेरे यहां पहुंचा और हॉस्टल परिसर में उगे पेड़ पौधों की गहनता से जांच करने के साथ साथ जानकारी जुटाई। हॉस्टल में रहने वाले लोगों ने दो दिन पूर्व मृत अवस्था में मिले एक जीव का फोटो अधिकारियों को दिखाया तो उन्हेांने माना कि यह मरु टिड्डी ही है। जिसके बाद उन्हेाने इस जीव की उपस्थिति के बारे में जानकारी ली, लेकिन उसे कीटों में खा लिया था और उसके पंख ही शेष बचे हुए थे। इस पूरे क्षेत्र समेत करीब 10 किमी के दायरे का भी अधिकारियों ने सर्वे किया। विभागीय अधिकारी ने इस क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद बताया कि यह एकांत टिड्डी ही थी जो इस क्षेत्र में कुछ एरियाज में मिल सकती है। लेकिन यही टिड्डी यदि टिड्डी के बड़े समूह में मिल जाए तो उग्र रूप ले सकती है और फसलों और पेड़ पौधों को चट कर सकती है। हालांकि एकांत टिड्डी से किसी तरह का नुकसान नहीं है।
आज से सर्वे टीम रहेगी अलर्ट
30 मई से टिड्डी नियंत्रण दल का नियंत्रण कक्ष स्थापित हो चुका है। यह अगले करीब 4 माह तक स्थापित रहेगा और पूरे क्षेत्र की निगरानी रखेगा। वहीं सोमवार से यह दल मुख्य रूप से भीनमाल, रानीवाड़ा, सांचौर और गुजरात से सटते हुए क्षेत्रों में सर्वे करेगा। वहीं सिंचिंत क्षेत्र में भी जांच पड़ताल और किसानों से रूबरू होगा। ताकि यहां के हालातों की जानकारी जुटाई जा सके। हालांकि अभी तक इस क्षेत्र में भी टिड्डी की उपस्थिति की जानकारी नहीं है। लेकिन जैसलमेर समेत सीमावर्ती क्षेत्र में टिड्डी की उपस्थिति के बाद मोपिंग ऑपरेशन से टिड्डी को नष्ट करने से अब इस क्षेत्र से टिड्ड जालोर पहुंचने की संभावना कम है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का यह मानना है कि जालोर में इन क्षेत्रों की बजाय गुजरात के पाकिस्तान से सटे क्षेत्रों से होते हुए सांचौर, भीनमाल के रास्ते से टिड्डी जरुर पहुंच सकती है। अलबत्ता मौसम उनके अनुकूल हो। हालांकि अभी तापमान में काफी ज्यादा इजाफा हो चुका है। ऐसे में टिड्डी का प्रजनन फिलहाल रुक गया है और गर्मी अधिक होने से इनकी उड़ान भी प्रभावित हुई है।
बारिश और हवा का रुख मिला तो फिर खतरा
लगातार तीन से तापमान 42 डिग्री या इससे अधिक ही है। वहीं नमी का असर भी कम हुआ है। हवा का रुख भी अभी टिड्डी के पक्ष का नहीं है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि टिड्डी दल दो ही हालातों में प्रजनन के साथ अपनी तादाद बढ़ाता और नुकसान पहुंचाता है, जबकि बारिश अच्छी हो जाए और उसके बाद उन्हें हवा का रुख भी अपने पक्ष का मिल जाए, लेकिन अभी देनों ही स्थितियां इनके लिए मौजूद नहीं है।
इनका कहना
सूचना पर मौका का निरीक्षण किया गया है। चिंता की बात नहीं है। यह एकांत टिड्डी है जो कुछेक संख्या में मौजूद हो सकती है, लेकिन यदि यह समूह में मिल जाए तो फसलोंं के लिए घातक जरुर हो सकती है।
- आरके जैन, एपीपीओ, टिड्डी चेतावनी संगठन, जालोर

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