हमारे अफसर और नेता मौन, साइंस में स्टेट टॉपर जालोर को ही मेडिकल कॉलेज से रखा वंचित

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जालोर. इसे दुर्भाग्य ही कहें या जिले के अफसरों और नेताओं की बेरुखी कि राज्य भर में अपना लोहा मनवाने वाले जालोर जिले के विज्ञान वर्ग के छात्रों को यहां मेडिकल कॉलेज की सुविधा नहीं मिल पाएगी। हाल ही में राज्य सरकार के निर्देशों पर उन जिलों में मेडिकल कॉलेज की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकेगी, जिनके समीपवर्ती जिलों में मेडिकल कॉलेज पहले से चल रहे हैं। इसके तहत जालोर जिले को भी मेडिकल कॉलेज से वंचित रखा जा रहा है। जबकि खास बात तो यह है कि इस साल अजमेर बोर्ड की ओर से घोषित किए गए 12वीं विज्ञान वर्ग के परिणाम में जालोर जिला पूरे राज्य में टॉप पर रहा है। यानी जालोर जिले में विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के बेहतर परिणाम की ओर किसी भी अधिकारी या नेता का ध्यान नहीं गया है। इस तरह स्टेट में टॉपर रहे जालोर जिले को मेडिकल कॉलेज से वंचित रखना समझ से परे है।
शिक्षा में पिछड़ा था जालोर, अब राज्य में शीर्ष पर
शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान के सबसे पिछड़े जालोर जिले ने इस बार माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान के साइंस और कॉमर्स में इतिहास रचा था। वर्ष 2019 में यह पहला मौका रहा, जब जालोर जिले ने साइंस में राज्य में पहला और कॉमर्स में राज्य में तीसरा मुकाम हासिल किया। जालोर जिले की साक्षरता दर से यह परिणाम कई गुना बेहतर और भविष्य के लिए बेहतर संकेत माने जा रहे हैं, लेकिन इस तरह राज्य में नाम कमाने वाले जालोर के विज्ञान संकाय के छात्रों के लिए मेडिकल कॉलेज की संभावना खत्म करना उनके साथ छलावा साबित हो रहा है।
इस तरह बढ़ी साक्षरता दर
वर्ष 2001 की बात करें तो जिले की साक्षरता दर 46.5 प्रतिशत और महिला साक्षरता दर 27.8 प्रतिशत थी। वहीं 2011 की साक्षरता दर 55.58 प्रतिशत और महिला साक्षरता दर 38.73 प्रतिशत हो गई, लेकिन राज्य के साक्षरता प्रतिशत से जालोर पिछड़ों की श्रेणी में था। लेकिन इन आंकड़ों को दरकिनार करते हुए इस बार जालोर ने नया इतिहास रचा और यहां के विद्यार्थियों ने शिक्षा के प्रति जालोर की अलख जगने के सकारात्मक संकेत भी दिए।
35 से ज्यादा ने लाए 90 से 96 प्रतिशत
बारहवीं विज्ञान वर्ग की बोर्ड परीक्षा में 90 से 96.60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले जालोर जिले के करीब ३६ विद्यार्थी थे। इनमें जालोर के 12, सांचौर के 9, बागरा के ६, लूणियासर के 3, भीनमाल के 2, पावली के 2, 1 भाद्राजून व 1 आहोर का छात्र शामिल है। वहीं इनमें से 4 बेटियां भी शामिल हैं।
मिलेगी सुविधा...
जानकारों का कहना है कि जालोर में मेडिकल कॉलेज शुरू होने से जिले के विद्यार्थियों को भी काफी फायदा मिलेगा। एमबीबीएस के लिए अन्यत्र जाने वाले छात्रों को जिला मुख्यालय पर ही इसकी सुविधा मिल सकेगी और उन्हें आर्थिक तौर पर भी फायदा मिलेगा। इसके अलावा अस्पताल में विशेषज्ञों और सुविधाओं का विस्तार होने से गंभीर स्थिति में उपचार के लिए मरीजों को भी अन्यत्र नहीं जाना पड़ेगा।
एक्सपर्ट व्यू...
जालोर में मेडिकल कॉलेज खुलने से यहां सुविधाओं में भी काफी विस्तार होगा। इससे डॉक्टरी करने वाले बच्चों को ही नहीं, बल्कि जिले के मरीजों को भी काफभ् फायदा मिलेगा। विज्ञान संकाय के बच्चों ने इस बार बेहतर परिणाम देकर जालोर को राज्य में शीर्ष स्थान पर पहुंचाया है। ऐसे में जालोर में मेडिकल कॉलेज को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। ताकि यहां के बच्चों को जालोर में ही उच्च शिक्षा मिल सकेगी। इसके लिए जनप्रतिनिधियों को भी चाहिए कि वे मजबूत पैरवी करें।
- पीआर चुंडावत, सेवानिवृत्त पीएमओ, जिला अस्पताल

Dharmendra Kumar Ramawat
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