चार महीने से टेंडर प्रक्रिया में उलझा विभाग, किसान परेशान

चार महीने से टेंडर प्रक्रिया में उलझा विभाग, किसान परेशान

Binjaram Ram Dudi | Publish: Nov, 15 2017 11:49:05 AM (IST) | Updated: Nov, 15 2017 11:49:36 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

बाढ़ के चार माह बीतने के बावजूद विभाग अभी तक टूटी नहरों का मरम्मत शुरू नहीं कर पाया

सांचौर. क्षेत्र में बीते जुलाई माह में आई बाढ़ के चार माह बीतने के बावजूद विभाग अभी तक टूटी नहरों का मरम्मत शुरू नहीं कर पाया है। जिसकी वजह से सीयाळू सीजन में किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाएगा। वहीं चार माह बाद भी मरम्मत कार्य शुरू नहीं होने से गर्मी की सीजन में भी पेयजल की समस्या रहेगी। ऐसे में विभागीय उदासीनता का खामियाजा क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। गौरतलब है कि जुलाई माह में आई बाढ़ के कारण नर्मदा मुख्य कैनाल सहित अन्य वितरिकाओं को काफी नुकसान हुआ था, लेकिन इनकी समय पर मरम्मत कराने के विभाग अभी भी टेंडर प्रक्रिया में उलझा हुआ है। जिससे क्षेत्र के लोगों में नाराजगी भी बढ़ती जा रही है। वहीं दूसरी ओर नर्मदा विभाग के अधिकारियों की मनमर्जी के चलते टूटी वितरिकाओं के मरम्मत कार्य की समीक्षा के लिए प्रशासनिक स्तर की बैठक भी लंबे समय से नहीं हो पा रही है। बाढ़ से क्षतिग्रस्त नहरीकरण सिस्टम को ठीक करने के लिए विभाग को आपदा राहत के तहत अगस्त 2017 में 54.58 लाख की स्वीकृति भेजी गई थी। इसके बाद विभाग ने 26 में से 19 कार्यों के टेंडर निकालकर वर्क ऑर्डर जारी किए, लेकिन उनमें से भी अधिकांश कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं।
यहां ज्यादा नुकसान
जुलाई माह में हुई अतिवृष्टि के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान बालेरा, ईसरोल, वांक, रतौड़ा, भीमगुड़ा व भदराई वितरिका को हुआ है। गौरतलब है कि जुलाई 2015 में भी अतिवृष्टि से नहरी सिस्टम को काफी नुकसान हुआ था, लेकिन विभाग ने महज दो माह में इसकी मरम्मत का काम पूरा कर दिया था। इसके लिए राज्य सरकार ने 23 करोड़ रुपए तत्काल स्वीकृत किए थे। जिसकी बदौतल किसानों को रबी सीजन के दौरान सिंचाई के लिए पानी आसानी से उपलब्ध हो गया था।
गहराएगा संकट
नर्मदा के नहरी सिस्टम के क्षतिग्रस्त होने से सिंचाई की बात तो दूर ग्रामीणों को पेयजल के लिए भी संकट झेलना पड़ सकता है। फरवरी के बाद गर्मी की सीजन शुरू होने से पानी की मांग बढ़ जाएगी। ऐसे में अगर फरवरी माह तक मरम्मत का कार्य नहीं होता है तो एफआर , डीआर, ईआर, एचआर, एलआर, शिव रामसर पेयजल योजना व सीलू-भाटकी पेयजल स्कीम भी शुरू नहीं हो पाएगी।
दुगुना बजट, फिर भी धीमी चाल
गौरतलब है कि इस बार जुलाई माह में अतिवृष्टि से टूटे नहरी सिस्टम को ठीक करने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2015 की तुलना में दुगना बजट स्वीकृत किया है, लेकिन चार माह बीतने के बावजूद विभाग मरम्मत का काम पूरा नहीं करवा पाया है।
बुवाई के लिए नहीं मिल रहा पानी
रबी की सीजन दीपावली के बाद से शुरू हो जाती है, लेकिन टूटे नहरी सिस्टम की बदौलत पानी के अभाव में किसान बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। बाढ़ के कारण विभाग की ओर से बनाई गई पेयजल की 7 परियोजनाएं भी ठप पड़ी है। बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान सांचौर लिफ्ट कैनाल को हुआ है। करीब 46 किमी लंबी सांचौर कैनाल में से 33.500 किमी तक की परिधि में फैली नहरें पूर्ण रूप से टूटी हुई है। जिसे ठीक करना भी विभाग के समक्ष एक बड़ी चुनौति होगी।
इनका कहना है...
टूटी वितरिकाओं सहित मुख्य कैनाल के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। शीघ्र ही वर्क ऑर्डर जारी कर कार्य शुरू करवा दिए जाएंगे। इसको लेकर विभागीय स्तर पर कार्य किया जा रहा है।
-महेश मीणा, एक्सईएन, नर्मदा नहर परियोजना, सांचौर

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