मुखिया हुआ लखवा का शिकार तो पूरे परिवार की हालत बिगड़ी...

Dharmendra Ramawat

Publish: Apr, 20 2019 10:16:00 AM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

वींजाराम डूडी
सांचौर. सत्ता में आने वाली कोई भी सरकार भले ही गरीबों व असहायों तक राहत पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही नजर आती है। सांचौर शहर के वार्ड संख्या 7 में एक ऐसा ही परिवार है जो पुश्तों से यहां निवास तो कर रहा है, लेकिन आजादी के सात दशक बाद भी इस परिवार को ना तो छत नसीब हो पाई है और ना ही अन्य मूलभूत सुविधाएं। परिवार के मुखिया को लकवा हो जाने के बाद आर्थिक तंगी के कारण पिछले दो साल से वह बिस्तर में पड़ा जिन्दगी गुजार रहा है। इतना ही नहीं परिवार में कमाने वाला कोई दूसरा नहीं होने से दो छोटे मासूमों के साथ मां की जिम्मेदारी भी घर की सबसे बड़ी बेटी के कंधों पर आ गई है। घरों में मजदूरी कर महीने के 500 से हजार रुपए कमा कर परिवार का पालन-पोषण कर रही है। यह कहानी है रावों का वास स्थित भूराराम भील के परिवार की। जो आर्थिक रूप से कमजोर तो है ही, साथ ही साथ लकवे की बीमारी ने उसे लाचार बना दिया है। परिवार में दो नन्हे बच्चे हैं। जिनमें से एक ९ वर्ष का है तो दूसरा ११ का। वहीं दो बेटिया हैं, जिनमें से बड़ी बेटी पर घर चलाने की जिम्मेदारी आ पड़ी है। नगरपालिका प्रशासन ने पुश्तों से रह रहे इस परिवार को ना तो आवास योजना का लाभ दिया है और ना ही पेंशन प्रकरण बनाया गया है। परिवार का अंत्योदय कार्ड बना हुआ जरूर है। जिससे मिलने वाला राशन का गेहूं परिवार का सहारा बना हुआ है। पीडि़त परिवार के सदस्य बताते हैं कि सहायता के लिए सरकारी दरवाजों के चक्कर लगाकर थक गए, लेकिन आज तक उनकी समस्या किसी ने नहीं सुनी।
बीपीएल, फिर भी कनेक्शन नहीं
शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाके में रहने वाले भूराराम भील का परिवार बीपीएल श्रेणी में है, लेकिन आजादी के सात दशक बाद भी अंधेरे में जिंदगी जीने को मजबूर है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि डिस्कॉम में आवेदन करने के बावजूद ना तो विभाग ने उनकी सुनी और ना ही जनप्रनिधियों ने इसे गंभीरता से लिया। जिसी बदौलत आज भी वे अभावों में जिन्दगी जीने को मजबूर हैं।
जलदाय विभाग ने भी नहीं सुनी
भूराराम के परिवार में दुखों की इन्तहा यहीं खत्म नहीं होती। जलदाय विभाग के समक्ष पानी के कनेक्शन के लिए जब आवेदन किया तो विभाग ने भी उन्हें बैरंग लौटा दिया। ऐसी स्थिति में सात दशक से ज्यादा समय से सांचौर शहर में निवास करने वाले इस गरीब परिवार को ना तो बिजली मिल पाई है और ना ही पानी का कनेक्शन।
यहां मुखिया मानसिक रोगी, पत्नी विकलांग
शहर के हिंगलाज नगर में रहने वाले मोहन प्रजापत की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। पिछले दस साल से वह मानसिक रोगी है और पत्नी दिव्यांग है। सरकारी सहायता के नाम पर आज तक उन्हें कुछ नहीं मिला है। मानसिक रोग से ग्रसित मुखिया मोहनकुमार का गुजरात सहित अन्य जगहों पर इलाज तो करवाया गया, लेकिन सफल नहीं हुआ। जिससे आज भी वह नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। इलाज में हुए ढेरों खर्च ने उसे गरीबी की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है। घर की जिम्मेदार बड़े बेटे पर है जो हाथ ठेला चलाकर परिवार का पालन पोषण कर रहा है।
इनका कहना...
पिछले दो साल से बिस्तर में हूं। पैसा नहीं होने की वजह से लकवे का इलाज भी नहीं करवा पा रहा हूं। परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। घर में ना लाइट है और ना ही पानी का कनेक्शन। प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रनिधियों को अवगत करवाने के बावजूद किसी ने हमारा दर्द नहीं सुना। अब बिस्तर में अंतिम सांस गिनने को मजबूर हूं। सरकारी इमदाद मिले तो बच्चों को सहारा मिल सकेगा।
- भूराराम भील, पीडि़त, रावों का वास सांचौर
पति के इलाज के लिए काफी रुपए खर्च हो गए, लेकिन इलाज सफल नहीं हो पाया। मैं स्वयं जन्म से ही दिव्यांग हूं। परिवार में कोई कमाने वाला है नहीं है। सरकार की ओर से भी अब तक कोई मदद नहीं मिली है।
- पारू देवी, पीडि़ता, हिंगलाज नगर, मोजियावास सांचौर

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