अब सोशल मीडिया प्लेटफार्म से अवैध हथियारों के तस्करी की आहट

अब सोशल मीडिया प्लेटफार्म से अवैध हथियारों के तस्करी की आहट
Now the smuggling of illegal weapons from social media platform

Dharmendra Ramawat | Updated: 24 Apr 2018, 10:51:00 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

अवैध हथियारों के मामले में अब तक पुलिस कोई बड़ी कार्रवाई नहीं कर पाई है

खुशालसिंह भाटी
जालोर. जिले के सबसे बड़े क्राइम प्वाइंट सांचौर में अब तक तस्करी और फायरिंग के कई मामले सामने आए हैं, जिसमें कई मौकों पर आरोपित पकड़े गए और कुछ में आरोपित फरार भी हुए। लेकिन अब चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें सांचौर ही नहीं बल्कि जालोर जिले के अन्य क्षेत्रों में अवैध हथियारों के मार्केट की रूपरेखा की आहट आ रही है। मार्केट अब सोशल मीडिया के जरिए फैलाया जा रहा है और मुख्य रूप से व्हाट्सएप के जरिए डील भी हो रही है। जो जिले के लिए खतरे के संकेत है।
पिछले तीन ***** के मामलों पर गौर करें तो चार साल में अवैध हथियारों के मामले बढ़े हैं। यही कारण है कि अनेक मामलों में आरोपितों द्वारा फायरिंग भी हुई। अधिकतर मामले सांचौर के हैं, जिनमें फायरिंग में अवैध हथियारों का उपयोग हुआ, लेकिन एक भी मामले में पुलिस अब तक हथियार तस्करों या गिरोह तक नहीं पहुंच पाई है। इधर, यह कारोबार सांचौर समेत जिले में फल फूल रहा है।
रेट तय करने के साथ इमेज भी कस्टमर तक पहुंचती है
मामला काफी गंभीर है और समय रहते इस मामले में पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं गई तो हालात बिगड़ सकते हैं। पत्रिका पड़ताल में सामने आया है कि कस्टर को सौदे से पहले वाट्सएप पर संबंधित हथियार की इमेज भेजी जाती है और उसके बाद उसकी रेट भी बताई जाती है। सौदा तय होने पर हथियार तय स्थान पर उपलब्ध करवाया जाता है।
ये मामले जिनमें अवैध हथियार का प्रयोग
आमतौर पर शांत कहा जाने वाला जालोर जिला पिछले चार साल में अशांत सा हुआ है। फायरिंग और अवैध हथियार के मामले में पूर्व में नहीं के बराबर ही थे, लेकिन 4 साल में सांचौर ही नहीं जालोर शहर तक में फायरिंग की घटनाएं हुई, जिसमें अवैध हथियार का उपयोग हुआ। साफ है जालोर जिले में अवैध हथियार पहुंच रहे हैं, लेकिन गैंग के सरगना पुलिस गिरफ्त से दूर ही है।
राज्य के हालात बयां कर रहे गंभीर है हालात
पिछले पांच साल में देश के 22 राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों में जितने अवैध हथियार पकड़े गए थे। उससे ज्यादा हथियार अकेले राजस्थान में बरामद हुए हैं। राजस्थान में बरामद हथियार असम, गोवा, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मणिपुर, मेघायल, मिजोरम, पंजाब, हरियाणा, त्रिपुरा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से ज्यादा है। राजस्थान में मुख्य रूप से भरतपुर और अलवर अवैध हथियारों के मार्केट है। गौरतलब है 6 दिसंबर 2017 को जालोर आए पुलिस महानिरीक्षक (कानून) डॉ. बीएल मीना ने भी स्वीकारा था कि जिले में अवैध हथियारों की तस्करी के मामले बढ़े है और मध्यप्रदेश और बिहार से यहां हथियार पहुंच रहे हैं और यहां भी इसका नेटवर्क है।
इनका कहना
जालोर जिला आमतौर पर शांत ही है, लेकिन कई मौकों पर तस्करी समेत अन्य गतिविधियों में अवैध हथियारों के उपयोग के मामले सामने आए हैं। आमतौर पर जिस व्यक्ति के पास अवैध हथियार पाया जाता है वह पहले स्तर पर आरोपी होता है। पूर्व के घटनाक्रमों में भी इन मामलों में गिरोह तक पहुंचने का प्रयास हुआ है, लेकिन सफलता नहीं मिली।
- विकास शर्मा, पुलिस अधीक्षक, जालोर

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