बंधाकुआ गांव पहुंचा प्रशासन, हो रहा था मृत्युभोज का आयोजन

Dharmendra Ramawat

Publish: Jan, 18 2019 11:26:26 AM (IST) | Updated: Jan, 18 2019 11:26:27 AM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

चितलवाना. बाल विवाह व मृत्यु भोज को लेकर प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए उपखण्ड क्षेत्र के बंधाकुआ गांव की सरहद में दबिश दी। यहां बुधवार को मृत्युभोज से एक दिन पहले हो रहे कार्यक्रम की सूचना पर पुलिस व प्रशासन मौके पर पहुंचा और आयोजन को रुकवाया गया। तहसीलदार मिश्रीमल झंवर ने बताया कि उपखण्ड के बंधाकुआ सरहद में तगीदेवी पत्नी हिमताराम दर्जी की मृत्यु होने के बाद उसके बेटे व पोते ने गुरुवार को रात्रि जागरण व शुक्रवार को मृत्युभोग का आयोजन रखा था। सूचना पर पुलिस व प्रशासन मौके पर पहुंचा और तहसीलदार ने पोते को मृत्युभोज नहीं करने के लिए पाबंद किया। इस मौके एएसआई मांगीलाल, हेड कांस्टेबल मानाराम व पटवारी आम्बालाल मौजूद थे।
बाहरी रिश्तेदारों को ही कराएं भोजन...
मृत्युभोज की शिकायत पर मौके पर पहुंचे तहसीलदार झंवर ने शोक संतप्त परिवार को बाहर से आ चुके लोगों को ही भोजन करवाने की नसीहत दी। उनका कहना था कि सूचना पर उनके ऐसे रिश्तेजदार जो बाहर से पहुंच गए हैं, उन्हें ही भोजन करवा सकेंगे। गांव के अन्य लोगों या मृत्युभोज के लिए समाज के लोगों को भोजन करवाने पर सख्त कार्रवाईकी जाएगी।
अधिकारी पहुंचे तो परिजनों ने भरी हामी
तहसीलदार की ओर से शोक संतप्त परिवार के लोगों को मृत्युभोज नहीं करने की सख्त हिदायत दी। जिस पर साथ ही ऐसे आयोजनों पर होने वाली सजा और अधिनियम की जानकारी भी दी। जिसके बाद परिजनों ने मृत्युभोज का आयोजन नहीं करने पर सहमति जताई। इसके बाद तहसीदार वहां से रवाना हो गए।
जिले भर में चल रहा है अभियान...
गौरतलब है कि जिला प्रशासन व न्याय विभाग की ओर से भी जिले भर में बाल विवाह, मृत्युभोज व विभिन्न मामलों को लेकर अभियान चलाए जा रहे हैं। जिसमें ग्रामीणों को ऐसे आयोजनों के बारे में जानकारी देने के साथ ही सजा, प्रावधान और पीडि़त परिवार को होने वाले आर्थिक और मानसिक नुकसानों की जानकारी दी जा रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मृत्युभोज और बाल-विवाह जैसे प्रचलन जारी है। अधिकतर क्षेत्रों में अधिकारी और कार्मिक सब कुछ जानते हुए भी इसे नजरंदाज कर रहे हैं, जिसके कारण इस पर पूर्णतया अंकुश नहीं लग पा रहा है। हालांकि चितलवाना के इस परिवार ने अधिकारियों की समझाइश के बाद ऐसा आयोजन नहीं करने पर सहमति जताई है, लेकिन क्षेत्र में यह ऐसा पहला मामला नहीं है। ऐसे और भी ऐसे कई मामले हैं, जिनमें सख्ती नहीं बरतने के कारण इस तरह के आयोजन धड़ल्ले से होते रहते हैं।

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