308 पटवार मंडलों के पटवारियों ने किया पेन डाउन, राजस्व संबंधी कार्यों के लिए चक्कर काट रही जनता

पटवारियों व सरकार के बीच चल रही खींचातान का खामियाजा गावों के ग्रामीण भुगत रहे हैं। राजस्व विभाग से संबधित कामों के लिए ग्रामीण पटवार मण्डलों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पटवारियों की हड़ताल के चलते उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। राज्य का पटवार संघ पिछले दो माह से विभिन्न मांगों को लेकर गांव से राजधानी तक संघर्ष कर रहा है

By: Dharmendra Kumar Ramawat

Published: 03 Mar 2021, 08:56 AM IST

भीनमाल. पटवारियों व सरकार के बीच चल रही खींचातान का खामियाजा गावों के ग्रामीण भुगत रहे हैं। राजस्व विभाग से संबधित कामों के लिए ग्रामीण पटवार मण्डलों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पटवारियों की हड़ताल के चलते उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। राज्य का पटवार संघ पिछले दो माह से विभिन्न मांगों को लेकर गांव से राजधानी तक संघर्ष कर रहा है। पटवारियों के पे-ग्रेड व अन्य मांगों को लेकर पिछले डेढ़ माह से अतिरिक्त चार्ज वाले पटवार मण्डलों पर ताले लगे हुए थे, लेकिन 1 मार्च को जयपुर में सरकार व पटवारियों के बीच समझौता वार्ता विफल होने के बाद पटवार संघ के आह्वान पर पटवारियों के पेन डाउन करने से जिले के 308 पटवार मण्डलों पर ताले लटक गए। पटवार संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पटवार संघ व सरकार के बीच पटवारियों की वेतन विसंगति को लेकर 2018 में लिखित समझौता हुआ था, लेकिन दो साल अधिक समय के बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर कोई विचार नहीं किया है। ऐसे में पटवारियों को मजबूरन फिर से आंदोलन का सहारा लेना पड़ा। ऐसे में पटवारियों के आंदोलन के चलते पहले तो अतिरिक्त चार्ज वाले हल्कों में काम ठप पड़ा था, लेकिन अब तो सभी पटवार मण्डलो में ताले लटक गए हंै। पटवारी नहीं होने से इन पटवार मण्डलों में गिरदावरी की नकल व नक्शे सहित राजस्व कार्य अटके पड़े हंै। जिसके चलते किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पहले 126 अब सभी 308 पटवार मण्डलों पर ताले
पिछले दो माह से पटवारियों के आंदोलन के चलते पटवार मण्डल बंद पड़े हैं। जिले में पिछले डेढ़ माह से अतिरिक्त चार्ज वाले 126 पटवार मण्डलों पर ताला लगा हुआ था। अब पटवारियों के पेन डाउन के चलते जिलें के सभी 308 पटवार मण्डलों पर ताले लग गए हैं।
इतने कार्य हो रहे प्रभावित
पटवार मण्डलों में पटवारी नहीं होने से भूमि का सीमांकन, तरमीम, गिरदावरी की नकलें, भूमि प्रमाण-पत्र, नक्शे, म्यूटेशन, जमाबंदी, नामांतरण, जींसवार, राजस्व वसूली, सीमा ज्ञान, ढाल बांच तैयार करना, केशबुक, सहमति बंटवाड़ा, भूमि आवंटन प्रस्ताव, मौका निरीक्षण, विविध प्रमाण-पत्र, कृषि गणना, लघु सिंचाई गणना, प्राकृति आपदा रिपोर्ट, फसल कटाई प्रयोग, अतिक्रमण रिपोर्ट, पेंशन प्रकरणों की जांच, खाद्य सुरक्षा योजना की जांच, कुर्की नीलामी प्रक्रिया, कुरीति रोकथाम, कृषक दुर्घटना बीमा योजना व राजस्व अभिलेख सहित विभिन्न कार्य बंद पड़े हैं। ग्रामीण इन दिनों किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने व भूमि बंटवारे सहित विभिन्न राजस्व कार्यों के लिए पटवार मण्डलों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पटवार संघ की ओर से कार्य बहिष्कार के चलते ग्रामीणों को पटवार हल्के से मायूसी ही हाथ लग रही है।
कार्य प्रभावित हो रहे हैं...
पटवारियों की हड़ताल से ग्रामीणों के भूमि सीमांकन व अन्य राजस्व संबधित कार्य प्रभावित हो रहे हैं। किसानों के केसीसी ऋण के लिए भूमि प्रमाण-पत्र व अन्य दस्तावेज नहीं बन रहे हैं। पंचायत व सरकारी योजनाओं जैसे पेंशन प्रकरण व खाद्य सुरक्षा योजना के काम भी ठप हो गए हैं।
- चंपादेवी- सरपंच, ग्राम पंचायत-नरता
सरकार व पटवार संघ के बीच 2018 में पटवारियों की पे-ग्रेड व वेतन विसंगति को लेकर लिखित समझौता हुआ था, लेकिन दो वर्ष से अधिक समय होने के बाद भी पटवारियों की मांगों पर सरकार ने सकारात्मक विचार नहीं किया। इसलिए पटवारियों को फिर से आंदोलन करना पड़ रहा है। सरकार पटवारियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर न्याय करें। जिससे आमजन के कार्य प्रभावित न हो।
- कैलाश डऊकिया, जिलाध्यक्ष, पटवार संघ, जालोर

Dharmendra Kumar Ramawat Reporting
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