रोडवेज बस स्टैंड के पास लगता है निजी ट्रावेल्स का जमघट, कोई रोकने वाला तक नहीं

Dharmendra Ramawat

Updated: 27 Apr 2019, 11:35:55 AM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

जालोर. शहर से चलने वाली रोडवेज बसों को निजी ट्रावेल्स की बसें पिछले लम्बे समय से हर रोज हजारों रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचा रही है। इसके बावजूद ना तो रोडवेज अधिकारी इस बारे में सख्त कदम उठा रहे हैं और ना ही परिवहन विभाग। जानकारी के अनुसार शहर में रोडवेज के दो बस स्टैंड हैं। इनमें से पहला नया बस स्टैंड है जो शहर के बागोड़ा रोड पर स्थित है। जहां से राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, यूपी व उत्तराखंड समेत विभिन्न इलाकों के लिए बसों का आवागमन होता है, लेकिन रोडवेज बस स्टैंड के आस पास ही निजी ट्रावेल्स एजेंटों की भरमार लगी हुई है। इन बुकिंग एजेंटों के ऑफिस पर ना केवल लंबी दूरी की यात्रा के टिकट बनाए जाते हैं, बल्कि रोडवेज बस स्टैंड पर खड़ी सवारियों को भी यहां रुकने वाली ट्रावेल्स की बसें ले जाती हैं। वहीं दूसरा अस्पताल चौराहा पर रोडवेज बस का स्टॉपेज है। यहां भी निजी ट्रावेल्स की भरमार के चलते रोडवेज को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
नियम है पर परवाह नहीं
देखा जाए तो नियमानुसार रोडवेज बस स्टैंड के आस पास करीब पांच सौ मीटर के दायरे में निजी बसों का ठहराव नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद बस स्टैंड के इर्द-गिर्द स्थित बुकिंग एजेंटों के ऑफिसों के बाहर निजी ट्रावेल्स की बसें काफी देर तक खड़ी रहती हैं। जिसके कारण रोडवेज में सफर करने वाले यात्री गंतव्य तक जल्दी पहुंचने के लिए निजी बसों में चढ़ जाते हैं। इससे रोडवेज को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
परमीट भी लंबी दूरी का
परिवहन विभाग की मानें तो लम्बी दूरी की निजी ट्रावेल्स बसों को भी प्वाइंट टू प्वाइंट यात्री ले जाने का रूट परमीट दिया जाता है। इसके बावजूद अधिक मुनाफे के चक्कर में ट्रावेल्स बसों के चालक इन नियमों का उल्लंघन कर जहां सवारी दिखे, वहां गाड़ी रोक कर यात्रियों को बस में बिठा देते हैं। इसके बावजूद परिवहन विभाग की ओर से शहर से गुजरने वाली निजी ट्रावेल्स की बसों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है।
मौहल्लेवासियों को भी परेशानी
शहर से गुजरने वाली निजी ट्रावेल्स की बसें ना केवल नियमों का उल्लंघन कर रही है, बल्कि मौहल्लेवासियों के लिए भी आफत बनी हुई है। नया बस स्टैंड गेट के ठीक सामने एक रहवासी कॉलोनी है। इस कॉलोनी से बाहर निकलते ही मुख्य सड़क के ठीक नुक्कड़ पर निजी ट्रावेल्स के आफिस खोले हुए हैं। जहां देर रात तक बसें खड़ी रहती है। जिसके कारण कॉलोनी का मुख्य रास्ता बार-बार अवरुद्ध हो जाता है। कई बार कॉलोनीवासियों व ट्रावेल्स एजेंटों के बीच इसको लेकर बहसबाजी भी हो चुकी है, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से कोई सख्ती नहीं बरती जा रही है।
शाम ढलने के बाद रोडवेज बस बंद
निजी ट्रावेल्स की बसों में यात्रा करना यात्रियों की एक तरह से मजबूरी भी है। रोडवेज की बसों में सुविधा का अभाव निजी बसों को बढ़ावा दे रहा है। जालोर से शाम ढलने के बाद सिरोही या सुमेरपुर के लिए एक भी रोडवेज बस नहीं है। ऐसे में लोग यात्रा करने के लिए निजी बसों पर ही निर्भर है।
... और कई किमी का सफर खड़े-खड़े
रोडवेज बाड़मेर आगार से आने वाली एक बस जालोर होते हुए सिरोही-कोटा जाती है। यह रात साढ़े नौ बजे जालोर पहुंचती है, लेकिन इस बस में लोकल सवारियों को अक्सर सीट नहीं दी जाती। जबकि, इस बस में केबिन और स्टाफ के लिए एक स्लीपर बॉक्स स्टाफ के लिए ही रिजर्व रहता है। ऐसे में पैरों पर खड़े-खड़े कई किमी का सफर करने के बजाय यात्री निजी की ओर उन्मुख होता है।
कुछ दिन सख्ती, फिर नरमी
शहर के रोडवेज बस स्टैंड के इर्द-गिर्द खड़ी रहने वाली निजी ट्रावेल्स की बसों को लेकर तत्कालीन कलक्टर ने भी हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद परिवहन विभाग ने अस्पताल चौराहा पर कुछ दिन सख्ती बरती, लेकिन नया बस स्टैंड के आस पास कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में अफसरों की नरमी के कारण यहां हालात जस के तस हो गए।

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