जालोर की जवाई के लिए पुकार... प्रोजेक्ट बने लेकिन हक तय नहीं होने से अटके प्रोजेक्ट

रेकर्ड में नहीं था जालोर का हिस्सा, इसलिए जवाई में हक लेने पहुंचे तो प्रोजेक्ट स्वीकृत ही नहीं हो पाए, जनप्रतिनिधि आज तक इस मामले में नहीं दिखे गंभीर,

By: khushal bhati

Published: 11 Sep 2017, 11:16 AM IST

जालोर. जालोर की जवाई के पानी पर हिस्सेदारी तय नहीं होने से इसका दंश जिलेवासियों को भोगना पड़ रहा है। इसके लिए आज तक प्रयास भी नहीं हुए है और जनप्रतिनिधियों की ओर से इस मांग पर अमल करते हुए आवाज सरकार तक नहीं पहुंचाई। यही कारण रहा कि जवाई पर पाली जिले ने अपना अधिकार जमा लिया और शिवगंज जैसे क्षेत्र भी इसमें अपनी हिस्सेदारी तय कर चुके हैं। इधर, जालोर की बात करें तो आज तक यह भी तय नहीं है कि जवाई बांध में जालोर के हिस्से में कितना पानी है या कितना भराव होने के बाद जालोर के लिए पानी छोड़ा जाएगा। एक तरफ जनप्रतिनिधि इस मामले में मौन रहे और कभी इसके लिए लड़ाई नहीं लड़ी। वहीं दूसरी तरफ विभागीय स्तर की बात करें तो जवाई के पानी के लिए जलदाय विभाग की ओर से प्रोजेक्ट तैयार की गए जो उस समय के अनुसार काफी सस्ते और उपयोगी भी थे, लेकिन सरकार तक पहुंचते पहुंचते प्रोजेक्ट केवल इसलिए ठंडे बस्ते में चले गए क्योंकि पाली जिले की राजनीति हावी रही और जिले की राजनीति सुस्ती में रही।
केवल 10 करोड़ में जालोर-आहोर को मिल जाता पानी
नर्मदा परियोजना के समानांतर ही जालोर जलदाय विभाग की ओर से जवाई बांध से जालोर आहोर क्षेत्र में पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। विभाग की ओर से वर्ष 2008 और उसके बाद 2010 में यह प्रोजेक्ट भेजे गए, लेकिन उस समय संभागीय आयुक्त स्तर पर ही यह मामला इसलिए अटक गया क्योंकि जवाई बांध में जालोर के पानी का कोई कोटा निर्धारित नहीं था। यह प्रोजेक्ट मात्र 10 करोड़ रुपए का था और पहले स्तर में पाइप लाइन से पानी जालोर और आहोर तक इससे पेयजल सप्लाई होनी थी। चूंकि जालोर, आहोर, सायला और बागोड़ा क्षेत्र सभी नदी के बहाव क्षेत्र में है। इसलिय यह प्रोजेक्ट इन सभी गांव कस्बों के लिए उपयोगी साबित हो सकता था। इधर, नर्मदा के एफआर प्रोजेक्ट की बात करें तो यह प्रोजेक्ट ३०० करोड़ से भी अधिक का है।
पंपिंग की जरुरत भी नहीं होती
तैतरोल से जालोर और आहोर क्षेत्र तक नर्मदा परियोजना से सप्लाई हो रही है। इसके लिए तीन स्थानों पर पंपिंग स्टेशन बनाए गए हैं, क्योंकि तैतरोल से ये सभी क्षेत्र ऊंचाई पर है। दूसरी तरफ जवाई बांध से बागोड़ा तक के क्षेत्र की बात करें तो ये सभी क्षेत्र ढलान पर है और पाइप लाइन भी बिछाई जाती तो सीधे तौर पर बिना पंपिंग के ही पानी पहुंच जाता, लेकिन राजनीति मंशा के अभाव में यह मामला गुम हो गया और आज स्थित यह है कि पाली जिले ने बांध पर पूरी तरह से अपना अधिकार जमा लिया है।
इनका कहना
जवाई बांध से जालोर और आहोर क्षेत्र को पेयजल सप्लाई के लिए प्रोजेक्ट बनाकर भेजे थे, लेकिन जवाई के पानी में जालोर का हक तय नहीं होने से यह मामला अटक गया। अभी भी हालात जस के तस है। सरकारी और राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे पर प्रयास नहीं किए गए तो एक समय ऐसा भी आ सकता है, जब जवाई का पानी नहीं के बराबर ही छोड़ा जाएगा और जब भी छोड़ा जाएगा तो जालोर को तबाही का मंजर ही देखने को मिलेगा।
- लक्ष्मण सुंदेशा, तत्कालीन एक्सईएन

khushal bhati Reporting
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