जमीनी हकीकत जांचे बिना बुना ताना-बाना, अब आपत्तियां दर्ज करवा रहे लोग

जमीनी हकीकत जांचे बिना बुना ताना-बाना, अब आपत्तियां दर्ज करवा रहे लोग
Panchayat Committee Reorganization

Nain Singh Rajpurohit | Updated: 12 Aug 2019, 08:55:31 PM (IST) Jalore, Jalore, Rajasthan, India

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जालोर. जिले में ग्राम पंचायतों व पंचायत समितियों के पुनर्सीमांकन, पुनर्गठन और नवसृजन के लिए जारी अधिसूचना को देखकर ऐसा लगता है कि जमीनी हकीकत से दूर रहकर दफ्तरों में बैठकर इसका ताना-बाना बुना गया है। इसी का नतीजा है कि हर रोज दर्जनों गांवों के ग्रामीण अपनी व्यथा को लेकर जिला कलक्टर व उपखंड अधिकारी के पास आपत्तियां लेकर पहुंच रहे हैं।
जिला कलक्टर ने गत 29 जुलाई को जिले में ग्राम पंचायतों व पंचायत समितियों के पुनर्सीमांकन, पुनर्गठन और नवसृजन के लिए अधिसूचना जारी कर जनता से 28 अगस्त तक आपत्तियां मांगी है। इस अधिसूचना के साथ पंचायत समितिवार प्रस्ताव भी संलग्न किए गए है। अधिसूचना जारी होने के बाद दूर दराज से दर्जनों गांवों के ग्रामीण किराए के वाहन लेकर जिला कलक्टर व उपखंड अधिकारी के पास जाकर पुनर्सीमांकन, पुनर्गठन व नवसृजन में आई खामियों को गिना रहे है। अधिकारी भी उनका ज्ञापन लेकर समाधान का उचित आश्वासन देकर रवाना कर रहे है। इन आपत्तियों का समाधान कहां तक हो पाएगा, यह तो बाद में ही पता चलेगा।लेकिन समाधान नहीं हो पाया तो ग्रामीण क्षेत्र के गरीब व आमजन की परेशानी जरूर बढ़ जाएगी।
बढ़ेगी गरीब की परेशानी
पंचायत समितियों के पुनर्गठन व नवसृजन में सड़क मार्ग व आवागमन की स्थिति को ध्यान में नहीं रखा गया है। कई ग्राम पंचायतों का पुनर्गठित व नवसृजित पंचायत समितियों से सीधा जुड़ाव ही नहीं है। यहां तक पहुंचने के लिए आवागमन के कोई साधन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गरीबों को लम्बा चक्कर लगाकर दूसरी पंचायत समिति के मुख्यालय होकर अपनी मूल पंचायत समिति तक पहुंचना पड़ेगा।सक्षम व स्वयं के वाहन वाले लोग तो शार्ट कट में खुद का वाहन लेकर पहुंच जाएंगे, लेकिन इस पुनर्गठन व नवसृजन से महिलाओं व गरीब लोगों की मुसीबत जरूर बढ़ जाएगी।
ये तो कुछ उदाहरण है, लम्बी है परेशानी की फेहरिस्त
ओड़वाड़ा, देसू व देबावास से जालोर पंचायत समिति की दूरी कम थी व सीधा जुड़ाव था। लेकिन अब इन्हें आहोर पंचायत समिति में डाला गया है। ऐसे में यहां के लोगों को लम्बी दूरी तय कर जालोर मुख्यालय होकर आहोर जाना पड़ेगा। इसी तरह आहोर पंचायत समिति के ंशंखवाली को भाद्राजून से जोड़ा गया है। शंखवाली से भाद्राजून के लिए सीधी बस सुविधा व वाहन व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यहां के ग्रामीणों को पहले 14 किलोमीटर की दूरी तय कर आहोर आना पड़ेगा व यहां से 30 किलोमीटर की दूरी तय कर भाद्राजून जाना पड़ेगा। रायथल के ग्रामीणों ने बताया कि भाद्राजून के बजाय जालोर काफी नजदीक है। वाहन सुविधा भी है। लेकिन उन्हें भाद्राजून में जोड़ा गया है, जो अनुचित है। कावतरा से भीनमाल की दूरी महज 10 किलोमीटर ही है। जबकि इस पंचायत को दूरस्थ नवसृजित बागोड़ा पंचायत समिति में जोड़ा गया है। ऐसे में ग्रामीणों को काफी परेशानी होगी।
यह रहेगा खाका
पंचायत समिति जालोर (पुनर्गठित)
आकोली, बिबलसर, सिवणा, रायपुरिया, मेड़ा उपरला, चांदना, लेटा, बागरा, बाकरारोड, भागली सिंधलान, चूरा, दीगांव, डूडसी, मडग़ांव, नारणावास, नून, रेवत, सामतीपुरा, सांथू, सियाणा, सांफाड़ा, आलासन, तड़वा, आंवलोज, बाकरा, बालवाड़ा, बैरठ, बिशनगढ़, डांगरा, ऐलाना, केशवना, मांडवला, नरसाणा, तीखी व उम्मेदाबाद
पंचायत समिति आहोर (पुनर्गठित)
अगवरी, अजीतपुरा, आहोर, उम्मेदपुर, ऊण, ओड़वाड़ा, काम्बा, गुड़ा बालोतान, गोदन, चरली, चवरछा, चांदराई, डोडियाली, थांवला, दयालपुरा, देबावास, देवकी, देसू, पादरली, पावटा, बादनवाड़ी, भैंसवाड़ा, बिठुड़ा, वेडिया, सांकरणा, सामुजा, सेदरिया बालोतान, हरजी, कवराड़ा व रोडला
पंचायत समिति भाद्राजून (नवसृजित)
आइपुरा, कंवला, घाणा, चूंडा, निम्बला, नोरवा, नोसरा, पांचोटा, बांकली, बाला, बावड़ी, भंवरानी, भाद्राजून, भूति, भोरड़ा, रामा, रायथल, वलदरा, शंखवाली व सुगालिया जोधा
पंचायत समिति सायला (पुनर्गठित)
ओटवाला, सायला, रेवतड़ा, तूरा, थलवाड़, आसाणा, चौराऊ, वालेरा, बावतरा, जीवाणा, सांगाणा, तेजा की बेरी, डाबली, खेतलावास, तालियाणा, भूंडवा, मेंगलवा, पोषाणा, ऊनड़ी, पांथेड़ी, कोमता, देताकलां, सुराणा, सिराणा, तिलोड़ा, दादाल, वीराणा, विशाला, आलवाड़ा व जालमपुरा
पंचायत समिति भीनमाल (पुनर्गठित)
बोरटा, कोरा, कोटकास्तां, थोबाऊ, निम्बावास, भागलभीम, भागल सेप्टा, पूनासा, दांतीवास, दासपां, फागोतरा, जूंजाणी, नरता, सरथला व निम्बोड़ा
पंचायत समिति बागोड़ा (नवसृजित)
बागोड़ा, चेनपुरा, राऊता, मोरसीम, नया मोरसीम, जैसावास, खोखा, नांदिया, रंगाला, धुम्बडिय़ा, डूंगरवा, कूका, लाखणी, कालेटी, बाली, भालनी, नरसाणा, सेवड़ी, वाड़ा भाडवी, जेरण, कावतरा, राह, लूणावास, सोबड़ावास, नवापुरा ध्वेजा व जेतू
इनका कहना....
ग्राम पंचायतों व पंचायत समितियों के पुनर्गठन व नवसृजन में धरातल व आवागमन की स्थिति का ध्यान नहीं रखा गया है। हम अपने विधायकों, प्रधानों व अन्य जनप्रतिनिधियों से मिलकर जमीनी हकीकत को जांचकर रिपोर्ट तैयार कर जिला कलक्टर से मिलेंगे।ताकि पुनर्गठन व नवसृजन सही और आमजन के हित में हो और लोगों को जीवनभर परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
-रवीन्द्रसिंह बालावत, जिलाध्यक्ष भाजपा
रायथल को नवसृजित पंचायत समिति भाद्राजून से जोड़ा गया है। जो अनुचित है। यहां जाने के लिए सीधी वाहन सुविधा उपलब्ध नहीं है। रायथल से जालोर पंचायत समिति नजदीक है। इसे या तो आहोर पंचायत समिति में ही रखे या फिर जालोर से जोड़ा जाए।
-विजयराज राजपुरोहित, पूर्व सरपंच, रायथल
शंखवाली को नवसृजित पंचायत समिति भाद्राजून में शामिल किया गया है। जो गलत है। भाद्राजून जाने के लिए लोगों को आहोर होकर 45 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा। जबकि शंखवाली का सीधा जुड़ाव 14 किलोमीटर दूर आहोर से ही है व आहोर के लिए पूरे दिन आवागमन के साधन उपलब्ध रहते है। शंखवाली को आहोर समिति में ही यथावत रखा जाए तो आमजन के हित में रहेगा।
-नैनसिंह राजपुरोहित, उप प्रधान, आहोर
भंवरानी बड़ी पंचायत है व इसका आहोर से सीधा जुड़ाव है। आवागमन के लिए सीधी वाहन सुविधा होने से महिला व बच्चे आसानी से आहोर आवागमन कर सकते है। भाद्राजून में जोडऩे से गरीब व महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होगी।हम भंवरानी को आहोर पंचायत समिति में ही रखने की मांग करते है।
-सुरेन्द्रकुमारसिंह सरपंच, भंवरानी
कावतरा व लूणावास को नवसृजित बागोड़ा समिति में शामिल करना अव्यवहारिक है। इन दोनों ग्राम पंचायतों के साथ ही जसवंतपुरा पंचायत समिति में शामिल अन्य नौ ग्राम पंचायतों को भी भीनमाल पंचायत समिति में रखने को लेकर प्रस्ताव लिया हुआ है। इस बारे में विधानसभा में भी सवाल उठाया था।आमजन के हित के लिए गलत पुनर्सीमांकन व पुनर्गठन करने का विरोध करते है। जनता के हित को ध्यान में रखते हुए पंचायत समितियों का पुनर्सीमांकन, पुनर्गठन व नवसृजन करना होगा।
-पूराराम चौधरी, विधायक भीनमाल

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