पोर्टल पर नहीं दिख रहा कई सहकारी समितियों के ऋणधारियों का रिकार्ड

Dharmendra Ramawat

Updated: 01 Feb 2019, 06:10:49 PM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

गोविंदसिंह जैतावत
भीनमाल. सरकार की ओर से किसानों की कर्जमाफी को लोन व्यूवर पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया गया है।
इस पोर्टल पर किसानों के सहकारी समितियों से लिए गए ऋण व ऋण के अनुरूप सरकार की ओर से कर्जमाफी के दौरान दी गई छूट के बारे में जानकारी ऑनलाइन मिल रही है। कर्जमाफी के डेटा ऑनलाइन होने से कई सहकारी समितियों में किसानों के फर्जी ऋण बताकर किए गए गबन भी उजागर हो रहे है। किसान समिति के ऋणों की ऑनलाइन जानकारी ले रहे है। ऑनलाइन सूची में कई समितियों में सैकड़ो ऐसे किसानों के नाम है, जिन्होनें कभी सहकारी समिति से ऋण नहीं लिए। वहीं ऐसे लोगों के भी नाम से ऋण दर्शा रहे है जो कई सालों से गांव से बाहर निवास कर रहे है।
समिति के कार्मिकों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर ऐसे किसानों के नाम करोड़ों का गबन कर लिया। अब जब ऑनलाइन सूची दर्शाई जा रही है, तो समिति के कार्मिको की पोल खूल रही है। क्षेत्र के दांतीवास, पूनासा, कूका, मोरसीम, धुम्बडिय़ा सहित दर्जनों सहकारी समितियों में हुई गड़बड़ी को लेकर किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग की।
कूका में 115 किसान धुम्बडिय़ा नाम से
सरकारी की लोन व्यूवर पोर्टल http//lwa.rajasthan.gov.in पर किसानों के ऋण व कर्जमाफी के दौरान मिली छूट की जानकारी ऑनलाइन दिख रही है। इस पोर्टल पर धुम्बडिय़ा ब्रांच की कूका ग्राम सेवा सहकारी समिति में कुल 6 22 किसानों के ऋण की जानकारी ऑनलाइन हुई है। जिसमें 115 किसानों की नाम की जगह धुम्बडिय़ा लिखा हुआ है। ऐसे में किसानों को सही जानकारी नहीं मिल पा रही है।
कई समितियों का नहीं दर्शा रहा रिकार्ड
पोर्टल पर कई समितियों के रिकार्ड भी नहीं दर्शाएं जा रहे है। पोर्टल पर भीनमाल केएसवाई, चितलवाना शाखा की चितलवाना केएसवाई, भावतड़ा, सेसावा, करावड़ी सहकारी समितियों का नो रिकार्ड दर्शा रहा है।
चितलवाना में करीब 1500 किसानों के सहकारी समिति में ऋण है, लेकिन कुछ ही किसानों की जानकारी ऑनलाइन हो पाई है। ऐसे में इन सहकरी समितियों के किसानों को ऋण माफी की राशि व लोन की राशि के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है।
सही जांच हो
सहकारी समितियों में कई किसानों के फर्जी खातें खोल कर उनमें ऋण दर्शाया गया है। कर्जमाफी के दौरान समितियों के कार्मिको ने गबन कर उन खातों में ऋण माफी दर्शा दी। कर्जमाफी के डाटा ऑनलाइन हुए तो कई समितियों के तो डाटा को ही हैक कर दिया गया है। समितियों के गबन की जांच होनी चाहिए। जांच में करोड़ों के गबन उजागर होगें।
-मोहनलाल विश्नोई-खाताधारक
तकनीकी कमी को सही करवाएंगे
पोर्टल पर पहले सभी सहकारी समिति के डाटा दर्शा रहा थे। पोर्टल पुराना होने से इसमें तकनीकी कमी के चलते डाटा नहीं दर्शा रहा होगा। नाम तो फोट चेंज की वजह से नहीं बदल गए है, उच्च अधिकारियों को तकनीकी खामी को सुधारने के लिए भेजा है।
-ओमपालसिंह भाटी, एमडी, द-जालोर सैन्ट्रल कॉ-ऑपरेटिव बैंक-जालोर

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