80 की उम्र में तीन मानसिक रोगी बच्चों की जिम्मेदारी

80 की उम्र में तीन मानसिक रोगी बच्चों की जिम्मेदारी
Responsiblity for three mental patients children in the age of 80

Dharmendra Ramawat | Publish: May, 02 2018 10:35:48 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

गरीबी के कारण नहीं करवा पा रहे बच्चों का इलाज

हाड़ेचा. कहते हैं मुसीबत जब आती है तो पीछा नहीं छोड़ती। डूंगरी के एक परिवार के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। गांव में रहने वाले 80 वर्षीय वृद्ध वचूखां मानसिक रोग से ग्रसित तीन बेटा-बेटियों का पालन पोषण कर रहे हैं। सालों पहले इस परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन 55 वर्षीय बड़ी बेटी रऊखी जन्म के कुछ साल बाद ही मानसिक रोग से ग्रसित हो गई।
रोग के कारण रऊखी दिन-भर इधर से उधर घूमती रहती है। जब कोई उससे बात करने की कोशिश करता है, तो वह हंसने लगती है पर किसी से कुछ बात नहीं करती। मानसिक रोगी होने के कारण पिता उसके हाथ भी पीले नहीं कर पाए। उसका आधार कार्ड भी नहीं बन पाने के कारण सरकारी इमदाद भी नहीं मिल पा रही है। परिवार का दूसरा सदस्य 35 वर्षीय गणपतखां कुछ समय पहले गांव में बकरियां चराने जाया करता था, लेकिन कुछ साल पहले वह भी पागल हो गया। वचू खां का तीसरा 29 वर्षीय बेटा नवाबखां पहले ट्रक चलाने का काम करता था, लेकिन चार साल पूर्व जब वह छुट्टी लेकर घर आया तो अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई। इसके बाद से वह भी पागल हो गया। हालत ऐसी है कि वह दिनभर बजरी व रेत खाता है, लेकिन खाना देने पर थोड़ा बहुत खाकर छोड़ देता है। ऐसे में तीनों मानसिक रोगियों को आजदिन तक पेंशन या आवास तो क्या कोई सरकारी इमदाद तक नहीं मिली है।
बीपीएल परिवार है...
वचू खां का परिवार बीपीएल श्रेणी में आता है, लेकिन अधिकतर सरकारी योजनाओं का उसको कोई फायदा नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास की एक किश्त मिली है, लेकिन परिवार के मुखिया ने मजबूरीवश यह राशि भी तीनों लाडलों पर खर्च कर दी। ऐसे में आवास पूर्ण नहीं कर पाने से अन्य किश्तों से भी वंचित रहना पड़ा।
नहीं मिलेगा पीएम आवास योजना का लाभ
वर्तमान में चल रही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इस परिवार का लिस्ट में नाम तो है, लेकिन पूर्व में मुख्यमंत्री आवास योजना की एक किश्त मिलने के कारण नियमानुसार उसे पूर्व में लाभार्थी मान लिया गया है। ऐसे में पीएम आवास योजना से उसे वंचित रहना पड़ेगा।
अतिवृष्टि ने बरपाया कहर, ढह गया झोपड़ा
वचू खां तीनों लाडलों के साथ एक छोटे से झोपड़े में रहता था, लेकिन बीते साल जुलाई में आई बाढ़ के दौरान उसका यह अशियाना भी गिर गया। पालन-पोषण के लिए रखे भेड़-बकरियां भी मर गई। इसके बावजूद उसके परिवार को आपदा के तहत कोई सरकारी इमदाद नहीं मिली है। वहीं कोई सामाजिक संगठन भी आगे नहीं आया है। इधर, परिवार की माली स्थिति भी ठीक नहीं है।
नहीं हुआ समस्या का समाधान
डंूगरी में एक ही परिवार के तीन सदस्य मानसिक रोगी होने के कारण वचूखां को ८० की उम्र में भी खुद के बूते पर परिवार चलाना पड़ रहा है। इस परिवार के लिए सरकारी इमदाद भी कुछ खास नहीं मिल पाई है। अगर कोई गैर सरकारी संगठन इसके लिए आगे आता है तो परिवार के सदस्यों का इलाज हो सकता है।
-रमेश विश्नोई, पंचायत सहायक, डूंगरी
जानकारी लेकर करवाएंगे इलाज
एक ही परिवार के तीन सदस्य मानसिक रोगी हैं तो उनका जोधपुर के सरकारी अस्पताल में निशुल्क इलाज करवाया जाएगा। इस बारे में डूंगरी पीएचसी के चिकित्सा अधिकारी से जानकारी ली जाएगी।
- डॉ पीआर बोस, बीसीएमओ, सांचौर

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