किसान ने चने की फसल बेचने के लिए मांगी जमाबंदी, पटवारी ने बता रखा था जीरा

किसान ने चने की फसल बेचने के लिए मांगी जमाबंदी, पटवारी ने बता रखा था जीरा
Revenue dipartment online wrong report of Gram crop, Farmers worried

Dharmendra Ramawat | Updated: 29 Apr 2018, 10:58:50 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

अधिकारियों को शिकायत की तो बोले-चने की खेती करने से पहले पूछा क्यों नहीं

श्रवणकुमार जांगू
हाड़ेचा. राजस्व विभाग के अधिकारी कार्य के प्रति कितने सजग हैं, इस बात का खुलासा बावरला ग्राम पंचायत में बीते साल आई बाढ़ के बाद किसानों की ओर से मांगी गई जमाबंदी के बाद हो रहा है। जानकारी के अनुसार बाढ़ के बाद किसानों ने खेतों में पानी की आवक के चलते चने की खेती की थी। फसल पकने के बाद किसान रामदेव क्रय-विक्रय सोसायटी में इसे बेचने से पहले जमाबंदी के लिए तहसील में पहुंंचे, लेकिन अधिकारियों का जवाब था कि चने की खेती करने से पहले किसानों ने इस बारे में कोई सूचना तक नहीं दी। ऐसे में अधिकारियों के इस बेतुके जवाब को लेकर किसानों ने रोष जताया है। इससे पहले किसानों ने सांचौर एसडीएम व तहसीलदार को ज्ञापन भी सौंपा था। गौरतलब है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों की ओर से खेत में खड़ी फसल की गिरदावरी के लिए मौके पर जाकर गिरदावरी की रिपोर्ट तैयार की जाती है, लेकिन यहां पटवारी मौके पर जाने के बजाय सांचौर कार्यालय में बैठे-बैठे ही गिरदावरी आनलाइन कर देते हैं। ऐसे में किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।
किसानों ने लगाया लापरवाही का आरोप
किसानों ने बताया कि जब गिरदावरी के लिए सांचौर उपखण्ड अधिकारी व तहसीलदार को इस समस्या के बारे में ज्ञापन देकर मांग की तो अधिकारियों की ओर से समाधान की बजाय चने की फसल बोने से पूर्व राजस्व विभाग को जानकारी नहीं देने की बात कही जा रही है। अधिकारी ऐसा बेतुका जवाब देकर मामले को टाल रहे हैं। जबकि पटवारी की ओर से खेतों में मौके पर जाकर फसल की गिरदावरी तैयार की जाती है।
अधिकारियों का यह जवाब...
अब राजस्व विभाग अपनी ही गलती छिपाने के लिए किसानों पर आरोप लगा रहे हैं कि चने की फसल खरीफ में होती है, ऐसे में रबी सीजन में उन्होंने खरीफ की पैदावार की गिरदावरी तैयार नहीं की है, जबकि किसानों का कहना है कि चने की फसल दोनों सीजन में होती है। पंचायत की गिरदावरी रिपोर्ट में पटवारी ने पूरी पंचायत में कहीं भी चने की फसल नहीं बताई है। ऐसे में अब रिपोर्ट में परिवर्तन नहीं किया जा सकता। जिसके चलते किसानों को उचित मूल्य की दुकान पर फसल नहीं बेच पाने से नुकसान उठाना पड़ेगा।
यह है प्रक्रिया
अधिकारिक जानकारी के अनुसार किसानों को अन्य मंडी के बजाय उचित मूल्य की दुकान पर 15 से 20 रुपए प्रतिकिला अधिक फसल का दाम मिलता है। ऐसे में चने की फसल बेचने की बिक्री को लेकर किसानों की ओर से पिछले कई दिनों से गिरदावरी के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों व पटवारी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी पूर्व में बिना मौके पर गए अंदाजन ही जीरे की गिरदावरी ऑनलाइन कर दी। ऐसे में जिन खेतों में किसानों ने चने की खेती की हुई थी, विभाग ने उनके खेतों में जीरे की गिरदावरी तैयार की हुई है। जिससे किसानों को उचित मूल्य की दुकान पर चने की फसल बेचने में समस्या हो रही है।
इनका कहना है...
खेत में कई हैक्टेयर चने की फसल बोई गई थी। फसल पकने के बाद उचित मूल्य की दुकान पर विक्रय करने के लिए गिरदावरी की जमाबंदी की आवश्यकता होती है, लेकिन गिरदावरी रिपोर्ट में पटवारी ने चने की बजाय जीरे की फसल की गिरदावरी ऑनलाइन कर रखी है। ऐसे में उचित मूल्य की दुकान पर बेचान नहीं कर पाने से किसानों को प्रतिकिलो 15 से 20 रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं अधिकारियों को ज्ञापन देने पर समस्या का समाधान के बजाय फसल बोने की जानकारी नहीं देने की बात कही जा रही है।
- गोकलाराम लोल, किसान, विष्णुनगर
बाढ़ के चलते कई समस्या थी, ऐसे में इस सीजन में चने की खेती होती है इस बारे में मुझे जानकारी नहीं थी। मेरी अभी ही न्यू पोस्टिंग हुई है। ऐसे में गलती से जीरे की रिपोर्ट बना दी है।
- ममता, पटवारी, बावरला
पटवरी की नई पोस्टिंग थी। इसलिए ऐसी गलती हुई होगी। वैसे चने की अधिकतर खेती खरीफ की फसल में होती है। वहीं गिरदावरी रिपोर्ट में परिवर्तन नहीं कर सकते हैं। अब इस समस्या का कोई समाधान नहीं है।
- पीताम्बरदास राठी, तहसीलदार, सांचौर

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