सांचौर पालिकाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर तीन धड़ों में बंटी भाजपा

पार्षद प्रतिनिधियों ने अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वोट डालने का पालिकाध्यक्ष के पिता पर लगाया आरोप, कांग्रेस ने गोपनीय बैठक कर बनाई रणनीति

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Published: 09 Dec 2017, 11:45 AM IST

सांचौर. भाजपा बोर्ड के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर पार्टी की अंदरूनी राजनीति में घमासाान जारी है। तीन गुटों में बंटी भाजपा पालिका बोर्ड के अविश्वास प्रस्ताव को लेकर अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटी हुइ्र है। पूर्व विधायक जीवाराम चौधरी पालिकाध्यक्ष व उपाध्यक्ष के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव को गिराने के लिए असंतुष्ट पार्षदों को मनाने में जुटे हुए हैं, लेकिन असतुुष्ट पार्षदों के साथ भाजपा के विरोधी धड़े के नेता होने से मामला सुलझने के बजाय उलझता जा रहा है। इधर, भाजपा के असंतुष्ट गुट के पार्षद प्रतिनिधियों ने ने पालिकाध्यक्ष के पिता की ओर से उनके घर पर आकर दबाव बनाने व अपने पक्ष में वोट डालले का आरोप लगाया है। पार्षद हीना देवी के पति नारायण पुरोहित, पार्षद सोहिल खान के पिता साहेबखान व पार्षद नानजीराम ने पत्रिका को फोन पर बताया कि उनके परिवार पर अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वोट डालने को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। वहीं उन्होंने वोट के बदले पैसे लेने का ऑफर देने का भी आरोप लगाया। वहीं दूसरी ओर ओर अविश्वास प्रस्ताव के मामले में भाजपा के असंतुष्ट गुट के साथ गएपांच कांग्रेस पार्षदों में से एक पार्षद नेता प्रतिपक्ष बीरबल बिश्नोई शुक्रवार को सांचौर लौट आए। जिन्होंने विधायक सुखराम बिश्नोई व पार्टी नेताओं के साथ गोपनीय चर्चा कर रणनीति बनाई है। जबकि असन्तुष्ट पार्षदों के भूमिगत होने से भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा उनके परिजनों के घर पर मान मनोव्वल का दौर जारी है। इस तरह अविश्वास प्रस्ताव के बाद तीन धड़ों में बंटी भाजपा के एकजुट नहीं होने से बोर्ड पर आया संकट अभी भी बरकरार है।
इनके बीच मचा हुआ है घमासान
भाजपा बोर्ड के खिलाफ भाजपा पार्षदों की ओर से कांग्रेस पार्षदों के साथ मिलकर लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के बाद भाजपा बोर्ड पार्टी की अन्दरूनी कलह के भंवर में उलझा हुआ है। अविश्वास प्रस्ताव को लेकर मिलापचंद मेहता गुट सक्रिय है। विधानसभा चुनाव २००८ में पार्टी प्रत्याशी रहे मेहता पूर्व विधायक जीवाराम चौधरी के विरोधी होने की कसर पालिका बोर्ड में अविश्वास प्रस्ताव लाकर निकालने में लगे हैं। २००८ में पूर्व विधायक की टिकट कटने व मेहता को पार्टी प्रत्याशी बना देने से पूर्व विधायक चौधरी निर्दलीय खड़े होकर चुनाव जीत गए थे। जिसके बाद २०१३ में पुन: पार्टी का टिकट चौधरी को मिल गया। इस दौरान मेहता गुट के साथ नहीं देने से उनकी हार हो गई थी। वहीं 2015 में नगरपालिका चुनाव के दौरान भी पालिकाध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव में मेहता गुट को हाशिये पर धकेल देने वे नाराज चल रहे थे। इसको लेकर मेहतर मौके की फिराक में थे। इधर, सांसद देवजी पटेल गुट का पूर्व विधायक के गुट से तालमेल नहीं बैठने से मेहता गुट व सांसद गुट दोनों एक हो गए हैं। जिससे पालिका में अविश्वास प्रस्ताव का मामला एक बार जोर पकडऩे लगा है।
रणनीति बनाने में जुटी कांग्रेस
भाजपा बोर्ड के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के मामले के बाद विधायक सुखराम बिश्नोई भी मौके की तलाश में हैं। वहीं भाजपा की अन्दरूनी लड़ाई से पार्टी को मिलने वाले फायदे को लेकर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि कांग्रेस के छह पार्षदों में से एक पार्षद विमला देवी ने अविश्वास प्रस्ताव का विरोध करते हुए वर्तमान पालिकाध्यक्ष का समर्थन किया है। वहीं विधायक के साथ शुक्रवार को गोपनीय स्थान पर हुई बैठक में इस मामले को लेकर भी पार्टी अन्दरूनी तौर पर रणनीति बनाती दिखी, लेकिन इस बारे में अब तक कोई ठोस खुलासा नहीं हो पाया है। पार्टी की ओर से पालिका उपाध्यक्ष के लिए दावेदारी करने सहित अहम मुद्दों को लेकर भी विभिन्न विकल्पों पर गंभीरता से चर्चा की जा रही है।
इनका कहना है...
भाजपा बोर्ड पर भ्रष्ट्राचार के खुले आरोप लग रहे हैं। हम वर्तमान पालिकाध्यक्ष के खिालाफ हंै। हमने विधायक के साथ बैठक कर रणनीति बनाई है। आगे क्या होगा इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। फिलहाल हमारा लक्ष्य भाजपा का बोर्ड गिराना है। हम अविश्वास प्रस्ताव के साथ हैं।
-बीरबल बिश्नोई, नेता प्रतिपक्ष, नगरपालिका संाचौर

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