दस माह से स्कूलें लॉक, सरकारी और प्राइवेट स्कूल से जुड़े लोगों का गहराया रोजी रोटी का संकट

कोरोना महामारी के चलते पिछले 10 माह से स्कूले बंद है। ऐसे में स्कूलों से जुड़े प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है

By: Dharmendra Kumar Ramawat

Published: 18 Dec 2020, 10:09 AM IST

भाद्राजून. कोरोना महामारी के चलते पिछले 10 माह से स्कूले बंद है। ऐसे में स्कूलों से जुड़े प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ हैं। जिस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा हैं। स्कूलों के साथ कई सारे वर्गों का आर्थिक पहलू जुड़ा हुआ होता है। शैक्षणिक गतिविधियों पर ही स्टेशनरी दुकानें, कपड़े की दुकानें, जूतों की दुकानें, नाश्ते वाले, केबिन वाले, केन्टीन, फोटो कॉपी, कंप्यूटर सेन्टर, ऑटो रिक्शा, हॉस्टल, लाइब्रेरी, टिफिन सेन्टर, लोण्ड्री व ड्राइवर समेत कई सारे सैकड़ों वर्ग ऐसे हैं, जिनका रोजगार स्कूलों पर आधारित है। अब जबकि पिछले 10 माह से स्कूलें बंद हैं तो इनका रोजगार भी बन्द है। ऐसे में कइयों ने तो धंधा ही बदल दिया है, तो कई अभी भी बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। कई इसी आशा में है कि कब सरकार स्कूलें खोलने की अनुमति दें और उनकी भी रोजी-रोटी चलनी शुरू हो। सरकार को चाहिए कि अब जल्दी ही एक मात्र बन्द सेक्टर शिक्षा संस्थानों को भी खोल देना चाहिए ताकि सभी वर्गों को राहत मिल सके।
बच्चे भी नहीं कर पा रहे पढ़ाई
शिक्षा विभाग की ओर से कोरोना काल के बाद से स्माइल-2 के तहत बच्चों को घर-घर जाकर होमवर्क देने, जांचने और ऑनलाइन शिक्षण कार्य के तहत शिक्षकों से कार्य करवाया जा रहा है, लेकिन ग्रामीण अंचलों में बच्चों के पास ना तो एंड्रोयड या स्मार्ट फोन है और न ही वे ऑनलाइन क्लास ज्वाइन कर पा रहे हैं। ऐसे में इन बच्चों की पढ़ाई भी पिछले दस महीने से बंद ही है। अगर समय रहते स्कूलें नहीं खुली तो इनका कोर्स भी पूरा नहीं हो पाएगा।
इनका कहना...
हमारी स्टेशनरी की दुकानें है, लेकिन 10 माह से स्कूलें बंद होने से व्यापार एकदम ठप है। किराया भाड़ा भरना भी भारी पड़ रहा है।
- जवानाराम, जोगदास, महेन्द्र, दुकानदार भाद्राजून
मैं स्कूल के सामने नाश्ते की लॉरी लगाता था। अब 10 माह से बेरोजगार हूं।
- श्यामलाल
मैंने मेरी वेन स्कूल में बच्चों को लाने ले जाने के लिए अनुबंध पर लगा रखी थी, लेकिन 10 माह से स्कूलें बन्द होने से बेरोजगार हूं।
- शंकर, वाहनचालक
एक सरकारी या गैर सरकारी सीनियर सैकंडरी स्कूल के आसपास 100 से 200 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता हैं। सरकार कोरोना एडवाइजरी के साथ शीघ्रता से स्कूलें खोलने के आदेश दे। ताकि सभी वर्गों की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सके।
- हनुमानसिंह बिठू, निदेशक, अमरज्योति स्कूल भाद्राजून

Dharmendra Kumar Ramawat Reporting
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