यहां पांच फीट की खुदाई पर ही निकलता है पानी, सीवरेज के अभाव में नालियों में बह रही गंदगी

शहर के कई निचले हिस्से ऐसे हैं, जहां महज पांच से सात फीट की खुदाई पर पानी निकलता है। सालों पहले यह समस्या नहीं थी, लेकिन लगातार पानी का भराव होने के कारण अब यहां की जमीन दलदली हो गई है। जिसके कारण मामूली गहराई में ही यहां पानी निकलने लगता है।

By: Dharmendra Kumar Ramawat

Published: 22 Jan 2021, 09:17 AM IST

फैक्ट फाइल
- शहर में बिछानी थी कुल 90 किमी सीवरेज लाइन
- वर्ष 2007 में शुरू हुआ था पहले चरण का काम
- पहले चरण में बिछी थी 52 किमी लाइन
- 15 करोड़ रुपए खर्च हुए थे पहले चरण में
- वर्ष 2015 में हुआ था हेंडओवर
- 9 हजार से ज्यादा कनेक्शन
- 2021 में वंचित इलाकों में बिछेगी 150 किमी लाइन
जालोर. शहर के आधे वार्डों में नगरपरिषद की ओर से सीवरेज सुविधा के लिए सीवरेज लाइन सालों पहले बिछाई जा चुकी है। जिसके बाद आधी जनता को सहुलियत भी हुई है, लेकिन सालों से शहर का आधा कुनबा सीवरेज सुविधा का इंतजार कर रहा है। वहीं शहर के आधे हिस्से में सीवरेज सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। देखा जाए तो शहर के कई निचले हिस्से ऐसे हैं, जहां महज पांच से सात फीट की खुदाई पर पानी निकलता है। सालों पहले यह समस्या नहीं थी, लेकिन लगातार पानी का भराव होने के कारण अब यहां की जमीन दलदली हो गई है। जिसके कारण मामूली गहराई में ही यहां पानी निकलने लगता है। हालत यह है कि यहां बनने वाले भवनों में शौचालय के लिए गटर खुदवाने में काफी परेशानी हो रही है। जरा सी खुदाई में पानी निकलने के कारण लोग यहां गटर नहीं खुदवा पा रहे हैं, वहीं जो सालों से यहां रह रहे हैं उनकी ओर से खुदवाए गटर भी बार-बार पानी से भर जाते हैं। जिससे यहां के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं कई लोगों ने इस समस्या के चलते गटर की लाइन बंद करवाकर नालियों में ही पाइप डलवा दिए हैं। ऐसे में मजबूरीवश उन्हें शौचालय की गंदगी नालियों में ही बहानी पड़ रही है। इससे आस पास रहने वाले लोग भी गंदगी और बदबू के चलते परेशान हो रहे हैं। शहर के बाहरी इलाकों में रहने वाले इन लोगों का कहना है कि जमीन से पानी का रिसाव होने के कारण गटर जल्दी भर जाते हैं। जिसे बार-बार खाली करवाने में परेशानी होती है। ऐसे में सीवरेज लाइन बिछाई जाती है तो यहां के लोगों को भी इस समस्या से निजात मिल सकेगी।
हर महीने झेल रहे नुकसान
जानकारी के अनुसार शहर के निचले हिस्से हनुमान नगर कॉलोनी, नया बस स्टैंड के आस पास व पंचायत समिति क्षेत्र के कई मौहल्लों में कम गहराई पर पानी निकलने की समस्या बनी हुई है। जिसके कारण यहां के भवन मालिकों को हर महीने या दो महीने में एक बार गटर भर जाने के कारण इसे खाली करवाना पड़ रहा है। इसके लिए भवन मालिकों को हर बार गटर खाली करवाने के लिए नगपरिषद या निजी वाहन बुलाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें तीन से चार हजार की राशि भी वहन करनी पड़ती है।
आधे शहर में ही सुविधा
गौरतलब है कि करीब 13 साल पूर्व वर्ष 2007 में पहले चरण का काम शुरू करवाया गया था। यह काम करीब 8 साल तक चला और इसके बाद वर्ष 2015 में संबंधित कंपनी ने इसे नगरपरिषद को हेंडओवर किया गया था। अब आधे शहर में दूसरे चरण के तहत सीवरेज का काम होना बाकी है, जिसका शहरवासी सालों से इंतजार कर रहे हैं।
अब 150 किमी बिछेगी लाइन
जानकारी के अनुसार पिछले भाजपा के बोर्ड में शहर के वंचित इलाकों में सीवरेज के लिए सर्वे हुआ था और इसकी डीपीआर भी बन गई थी। डीपीआर के अनुसार इस साल वंचित इलाकों में करीब 150 किमी सीवरेज लाइन बिछाने का काम शुरू हो जाएगा। हालांकि इस साल इसका काम शुरू होने के बाद संभवत: इसकी सुविधा शहरवासियों को चार से पांच साल बाद मिल पाएगी।
13 साल से आधा शहर कर रहा इंतजार
वर्ष 2007 में पहले चरण में शहर के भीतरी भागों और कुछ कॉलोनियों में करीब 52 किमी सीवरेज पाइपलाइन बिछाई गई थी। इस पर महंगाई के कारण 11 से बढकऱ 15 करोड़ का बजट खर्च हुआ था। जबकि पूरे शहर में दो चरणों में कुल 90 किमी लाइन बिछाई जानी थी। अब बीते कई सालों में शहर में नई कॉलोनियां भी बस जाने से लाइन भी ज्यादा बिछानी पड़ेगी। ऐसे में आधा शहर करीब 13 साल से सीवरेज का इंतजार कर रहा है। दूसरे चरण के लिए सर्वे हो चुका है। डीपीआर बनने के बाद करीब 150 किमी सीवर लाइन के लिए टेंडर होने बाकी हैं।

Dharmendra Kumar Ramawat Reporting
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