नवीन तकनीक से किसानों को फायदा दे सकते हैं विक्रेता

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By: Jitesh kumar Rawal

Published: 13 Sep 2019, 12:50 AM IST

कृषि आदान विक्रेता प्रशिक्षण शुरू


जालोर. जिला कलक्टर महेन्द्र सोनी ने कहा कि कृषि आदान विक्रेता कृषक के लिए प्रथम सलाहकार है। कृषि पैदावार बढ़ाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है इसलिए कृषि आदान विक्रेता नवीनतम तकनीक का ज्ञान प्रशिक्षण में प्राप्त कर किसानों की पैदावार बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं।
जिला कलक्टर गुरुवार को राज्य कृषि प्रबन्धन संस्थान की ओर से जिला मुख्यालय पर 48 सप्ताह के लिए आयोजित होने वाले कृषि आदान विक्रेताओं के डिप्लोमा कोर्स के शुभारंभ पर उपस्थित प्रतिभागियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिले के कृषि आदान विक्रेता प्रशिक्षण में दी जाने वाली जानकारी आत्मसात् करते हुए अपने क्षेत्र के किसानों को लाभाविन्त करें। कृषि उत्पादन एवं किसानों की आय बढ़ाने में कृषि आदान विक्रेता यथा उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक उपलब्ध करवाकर महत्वपूर्ण योगदान देते हंै। प्रशिक्षण में राज्य बीज निगम के प्रबन्धक (विपणन) योगिता गुप्ता, कृषि विज्ञान केन्द्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. दिलीप, कृषि विभाग उप निदेशक डॉ. आर.बी. सिंह, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक ओमकार पाटीदार, कृषि अधिकारी फूलाराम मेघवाल, कृषि आदान विक्रेता संघ अध्यक्ष भंवरलाल माली ने भी विचार व्यक्त किए।


डेयरी व बैंकर्स की भी सहभागिता रखें
जिला कलक्टर ने विभिन्न देशों में कृषि एवं डेयरी के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि कृषि आदान विक्रेताओं को केन्द्र एवं राज्य सरकार की ओर से किसानों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी रखते हुए क्षेत्र के किसानों को लाभान्वित करना चाहिए। इस प्रकार के प्रशिक्षणों को ब्लॉक मुख्यालय पर भी आयोजित किया जाना चाहिए तथा प्रशिक्षण में डेयरी एवं बैंकर्स की भी सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।


विषय विशेषज्ञ देंगेे जानकारी
प्रशिक्षण में राज्य समन्वयक के.के. मंगल ने कहा कि प्रति सप्ताह रविवार को होने वाला यह प्रशिक्षण 48 सप्ताह तक निरन्तर चलेगा, जिसमें 40 कृषि आदान विक्रेताओं को विभिन्न विषय विशेषज्ञ जानकारी देंगे। किसानों की समस्याओं का प्रथम समाधान केन्द्र कृषि आदान विक्रेता ही होते है, जिनके पास कृषक सीधे अपनी कृषि सम्बन्धी समस्याओं के लिए जाते हैं इसलिए कृषि आदान विक्रेताओं को आधुनिक तकनीक की जानकारी देने के लिए राज्य कृषि प्रबन्धन की ओर से इस प्रकार के डिप्लोमा कोर्स वर्ष 2014-15 से राज्य में प्रारंभ किए गए हैं। अब तक 34 कोर्स हो चुके हैं वही जिले में यह दूसरा डिप्लोमा कोर्स है।

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