बजरी के दोहन से भूजल नहीं हो पा रहा रिचार्ज, खजुरिया नाले के आस-पास सूखे सैकड़ों कुएं

भीनमाल शहर के खजुरिया नाले के आस-पास स्थित सैकड़ों कृषि कुएं अब वीरान हो गए हैं। 1990 के दशक से पहले यहां के कुएं मीठे पानी से हर समय सरसब्ज रहते थे, लेकिन 1990 से यहां सरकार ने लीज देकर यहां से बजरी का दोहन किया और उसके बाद हालात बदल गए। स्थिति यह है कि यहां के अधिकांश कुएं सूख गए हैं।

By: Dharmendra Kumar Ramawat

Published: 06 Mar 2021, 09:23 AM IST

भीनमाल. शहर के खजुरिया नाले के आस-पास स्थित सैकड़ों कृषि कुएं अब वीरान हो गए हैं। 1990 के दशक से पहले यहां के कुएं मीठे पानी से हर समय सरसब्ज रहते थे, लेकिन 1990 से यहां सरकार ने लीज देकर यहां से बजरी का दोहन किया और उसके बाद हालात बदल गए। स्थिति यह है कि यहां के अधिकांश कुएं सूख गए हैं। इसके अलावा भूजल रसातल में पहुंचने से पानी में खारापन व फ्लोराइड की मात्रा भी निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक पहुंच गई है। हालत यह है कि यहां के ग्रामीण पीने के लिए पानी भी टैंकरों से मंगवाने को मजबूर हैं। दरअसल, शहर के खजुरिए नाले में सालों पहले हुए बजरी के खनन से नाले में बरसाती पानी का ठहराव नहीं हो पाता है। खनन माफियाओं ने नियम-कायदोंं को ताक में रखकर नाले के बहाव क्षेत्र से बजरी पूरी तरह उठा ली। नाले में 30 से 40 फीट गहरे गड्ढे बना दिए हैं। ऐसे में बरसात के दिनों में पानी का बहाव होने के बाद भी कुएं व ट्यूबवेल सूखे रहते हैं। यहां पर करीब 300 कुओं पर अब वीरानी छा गई है। इन कुओं से सिंचित होने वाली सैकड़ों हैक्टेयर उपजाऊ जमीन बंजर में तब्दील हो रही है। ऐसे में सैकड़ों किसानों की रोजी रोटी पर भी संकट खड़ा हो रहा है। किसानों का कहना है कि 1990 के समय कुओं में भूमिगत जलस्तर 100 फीट पर था। कुओं से मीठा पानी उपलब्ध होने से खेत-खलिहान हरी सब्जियों व बागवानी बगीचों से सरसब्ज थे, लेकिन 1990 के दशक के बाद बजरी के खनन के बाद हालात बदल गए है। मालियों की ढाणी, दासपां रोड की ढाणियां व मीरपुरा रोड की ढाणियों के करीब 300 कृषि कुएं वीरान हो गए हैं।
100 फीट से 700 फीट पहुंचा भूजल स्तर
किसानों के मुताबिक 1990 के दशक में भीनमाल-बी की ढाणियों में भूजल स्तर 100 फीट के करीब था, मगर अब भूजल स्तर 700 फीट के करीब पहुंच गया है। भूजल से खारापान व फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक हो गई है। ऐसे में खेतों से हरी सब्जियां व कई फसलेंं अंकुरित तक नहीं होती है। बागवानी बाग-बगीचे भी उजड़ गए हंै। जिसके चलते यहां के किसान अन्य शहरों में रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर हंै।
बिगड़ गई पानी की गुणवत्ता
किसान भंवरलाल सोलंकी व भगवानाराम माली का कहना है कि यहां के कृषि कुओं में पानी की गुणवत्ता बिगड़ गई है। पीने के लिए भी किसानों को टैंकर मंगवाने पड़ते है। खनन के चलते बरसाती पानी का नाले में ठहराव नहीं हो पाता है। ऐसे में कृषि कुएं सूख रहते हैं।
ऐनिकट बने तो बने बात
खजुरिया नाला क्षेत्र के सैकड़ों कुओं के लिए एक वरदान है। 1990 के दशक में नाले में भरपूर बजरी थी। बरसात के समय एक-दो बार पानी का बहाव होने पर कुएं रिचार्ज होते थे। 1990 के दशक में बजरी के खनन के बाद स्थिति बदल गई। कुएं बदहाल हो गए। यहां पर एनिकट बने तो खेती-बाड़ी फिर से पुनर्जीवित हो सकती है।
- डूंगाराम माली व मंूगाराम मेघवाल, किसान

Dharmendra Kumar Ramawat Reporting
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