नेहड़ में टिड्डी के सफाए के लिए पहुंची टीमें ऐसे कर रही काम...

नेहड़ में टिड्डी के सफाए के लिए पहुंची टीमें ऐसे कर रही काम...
नेहड़ में टिड्डी के सफाए के लिए पहुंची टीमें ऐसे कर रही काम...

Dharmendra Ramawat | Updated: 07 Jul 2019, 11:23:54 AM (IST) Jalore, Jalore, Rajasthan, India

www.patrika.com/rajasthan-news

चितलवाना. नेहड़ के गांवों में आई टिड्डी का सफाया करने पहुंचा महकमा खुद ही लापरवाह होने से टिड्डी का खतरा बढ़ गया है। पत्रिका टीम शनिवार अलुसबह जोरादर के पास ही लूनी नदी के किनारे टिड्डी के पड़ाव के दौरान पहुंची, लेकिन यहां टीम का एक भी सदस्य नहीं था। सर्च व ऑपरेशन टीम करीबन तीन घंटे देरी से पहुंची और तब तक टिड्डी अपने पड़ाव से काफी दूर तक उडऩा शुरु हो चुकी थी। जोरादर गांव के पास ही पिछले दो दिन से लूनी नदी के किनारे टिड्डी ने पड़ाव डाल रखा था, लेकिन टिड्डी नियंत्रक टीम यहां टिड्डी के उड़ान भरने के बाद मौके पर पहुंची। ऐसे में टीम टिड्डी पर काबू पाने में नाकाम रही। खास बात तो यह हैकि टिड्डी नियंत्रक दल के पास दो ऑपरेशन टीम, एक सर्च टीम व चार गाडिय़ां हैं। इसके बावजूद अधिकारी एक गाड़ी का टायर पंक्चर होने का बहाना बनाते हुए चार दिन से टिड्डी के पड़ाव स्थल पर समय पर नहीं पहुंच रहे हैं। जिससे उन पर काबू नहीं पाया जा रहा है। इस बारे में किसानों का कहना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो क्षेत्र में टिड्डी का खतरा बढ़ सकता है। जबकि खुद अधिकारियों का कहना था कि सर्च टीम को दिन भर खोजबीन के बाद शाम को टिड्डी के पड़ाव स्थल की जानकारी ऑपरेशन टीम को देनी होती है। इसके बावजूद शनिवार अलसुबह ऑपरेशन टीम व सर्च टीम सूर्योदय के बाद पड़ाव स्थल पर तीन घंटे देरी से पहुंची। ऐसे में टिड्डी के उड़ान भरने से पहले दवा का छिड़काव तक नहीं हो पाया और टिड्डी ने वहां से उड़ान भर ली।
सर्च टीम को जानकारी भी नहीं
जोरादर सरहद में दो दिन से नदी के किनारे टिड्डी का पड़ाव होने की जानकारी सर्च टीम को भी नहीं थी। वहीं शनिवार को सर्च टीम सुबह करीब सवा नौ बजे तक मौके पर नहीं पहुंची। ऐसे में तहसीलदार व पटवारी ग्रामीणों से जानकारी लेकर पड़ाव स्थल पर पहुंचे और ऑपरेशन टीम को सूचना दी।
कौन कब पहुंचा मौके पर
जोरादर में टिड्डी के पड़ाव को लेकर चार दिन से चल रहे अभियान के बाद शनिवार को पत्रिका टीम अलसुबह मौके पर पहुंची। जिसके बाद सुबह 6 .35 बजे तहसीलदार, पटवारी व आरआई, जबकि सुबह 8 .28 बजे ऑपरेशन टीम के साथ सहायक निदेशक टिड्डी नियंत्रण और 9.19 बजे सर्च टीम की गाड़ी मौके पर पहुंची, लेकिन अभियान की शुरुआत से दो घंटे पहले ही टिड्डी ने अपने पड़ाव की जगह से उडऩा शुरू कर दिया।
लाखों की संख्या में टिड्डी, किसान चिंतित
जोरादर सरहद में लूनी नदी के किनारे टिड्डी के पड़ाव पर सुबह 7 बजे से ही टिड्डी के दल का उडऩा शुरू हो गया था। इस दौरान अपने पड़ाव की जगह को छोड़कर हवा के साथ लाखों की संख्या आसमान में उड़ती नजर आई। इधर, नेहड़ के जोरादर गांव के पास ही टिड्डी के पड़ाव को लेकर नियंत्रण दल के पिछले चार दिन से अभियान में लापरवाही बरतते हुए देरी से पहुंचने, गाड़ी में तेल कम होने सहित कई लापरवाही को लेकर किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस तरह लापरवाही के कारण टिड्डी कम होने की बात तो दूर इनकी संख्या बढऩे की आंशका बनी हुई है।
चार दिन से नदी किनारे पड़ाव
नेहड़ के किसानों ने बताया कि हर रोज नियंत्रक दल को गांव के लोग सुबह टिड्डी की जानकारी देते हैं। चार दिन से लूनी नदी के बहाव के किनारे ही टिड्डी का रात के समय पड़ाव है, लेकिन अलसुबह नियंत्रक दल के नहीं आने से टिड्डी उडऩा शुरू कर देती है।
जिसके कारण उनका सफाया नहीं हो पा रहा है। ऐसे में नेहड़ के खेजडिय़ाली, जोरादर, कुकडिय़ा, रिड़कर व आकोडिय़ा सरहद में लूनी नदी के बहाव के किनारे ही नमी होने से इनके प्रजनन की संभावना जताई जा रही है।
इनका कहना...
पिछले चार दिन से प्रशासन की टीम अलसुबह ही पहुंच रही है, लेकिन टिड्डी नियंत्रक दल के समय पर नहीं पहुंचने से टिड्डी काबू में नहीं आ रही है। इसकी हमने जिला कलक्टर को भी सूचना दे दी है।
- प्रेमाराम, तहसीलदार, चितलवाना
शनिवार को गाड़ी के टायर पंक्चर होने से देरी हो गई थी। हमेशा जल्दी ही आते हैं। टिड्डी पर तुरन्त ही काबू पा लिया जाएगा।
- बीआर मीणा, सहायक निदेशक, टिड्डी नियंत्रक जालोर

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