scriptThis is Nehad's water supply system: far from the purity of the water | ये है नेहड़ का वॉटरसप्लाई सिस्टम: पानी की शुद्धता तो दूर यहां को कच्ची बेरियों से ही पी रहे पानी, टंकियों के केवल ढांचे बचे | Patrika News

ये है नेहड़ का वॉटरसप्लाई सिस्टम: पानी की शुद्धता तो दूर यहां को कच्ची बेरियों से ही पी रहे पानी, टंकियों के केवल ढांचे बचे

- सरकारी दावों की पोल खोलती हकीकत, नेहड़ के गांवों में पानी के जुगाड़ के लिए ही बीत जाता है दिन

जालोर

Published: March 27, 2022 02:10:09 pm

मोहनलाल विश्नोई


वेडिय़ा. शुद्ध पेयजल के सरकार के दावे कितने पुख्ता है, इसकी हकीकत नेहड़ के दर्जनों गांवों में देखने को मिल जाती है। गर्मी की शुरुआत हो चुकी है और जिले भर में पेयजल आपूर्ति बहाल रखने के लिए विभिन्न स्तर पर कवायद चल रही है। सप्लाई के शेड्यूल को मेंटेंन रखने को विभाग और प्रशासन जुटा हुआ है। वहीं जिला मुख्यालय से करीब 200 किमी दूर जालोर जिले के सुदूर क्षेत्र नेहड़ में इस सभी दावों और घोषणाओं की पोल खुलती नजर आ रही है। इन गांवों में मार्च माह में ही पेयजल संकट गहरा चुका है। यहां ग्रामीणों की निर्भरता कच्ची बेरियों के पानी पर है। कच्ची बेरियों से काफी मशक्कत के बाद एक दो घड़ा पानी नसीब हो पाता है। जहां जिले में पानी में खारेपन और फ्लोराइड की अधिकता को एक बड़ी अशुद्धि और बीमारी का कारण माना जाता है। वहीं नेहड़ के इन गांवों में इन अशुद्धियों के साथ साथ मिट्टी और गंदगी के साथ ग्रामीण पानी पीने को मजबूर है।
ये है नेहड़ का वॉटरसप्लाई सिस्टम: पानी की शुद्धता तो दूर यहां को कच्ची बेरियों से ही पी रहे पानी, टंकियों के केवल ढांचे बचे
ये है नेहड़ का वॉटरसप्लाई सिस्टम: पानी की शुद्धता तो दूर यहां को कच्ची बेरियों से ही पी रहे पानी, टंकियों के केवल ढांचे बचे
नेहड़...यहां बदतर हालात

जाणीपुरा, आरवा, भींचरो की ढाणी, सिपाहियों की ढाणी, सुराचन्द, खोखरियामठ, तखतगढ़, मालासर मठ, खेजडिय़ाली, भलाइयां, आकोडिय़ा, रिडक़ी, कुकडिया, जोराधर, सूंथड़ी, विशनपुरा, सुजानपुरा, पांवटा, टापी, निम्बज, माधोपुर, दूठवा, डूंगरी, चिमड़ा, जालबेरी, कागोड़ा, वङसल बेरी, पीथाबेरी, खामराई, सायर कोसिटा, सेसावा, अगङावा, कुंडकी, मेघावा, हालीवाव, केरिया, विरावा, लालपुरा, पारदरड़ी, कोलियों की ढाणी, होथीगांव समेत अन्य गांवों में पेयजल संकट की स्थिति है और ग्रामीण अशुद्ध पानी पीने को मजबूर है।
मजबूरी...गंदा पानी पीने की


ग्रामीण मोबताराम कोली का कहना है कि पेयजल संकट की स्थिति में कच्ची बेरियों से पानी पीने की मजबूरी है। टैंकरों से पानी मंगवाना काफी महंगा है। 1200 से 1500 रुपए तक टैंकर के लिए जा रहे हैं। ग्रामीण धीमाराम का कहना है कि मवेशियों के लिए पानी का प्रबंधन भी एक चुनौती है।
वितरिकाएं...अतीत बनी

नेहड़ के प्रभावित गांवों तक नर्मदा परियोजना से पानी पहुंचाने का प्रस्ताव बनने के बाद अधिकतर गांवों तक वितरिकाएं भी बनी। कुकडिय़ा क्षेत्र की बात करें तो वितरिकाएं मिट्टी से अटी होने के साथ साथ इन पर झाडिय़ां तक उग आई है।
टंकियां बिखरी, सप्लाई बाधित

जीएलआर में पानी आपूर्ति नहीं हो रही है। वहीं पुराने जीएलआर बिखर चुके हैं और सरिये तक निकल चुके हैं। कई जीएलआर में पानी की आपूर्ति लंबे समय तक नहीं होने से यह बिखरे हैं।
वर्तमान में पेयजल संकट की स्थिति है। गांवों और ढाणियों को चिह्नित किया जा रहा है। जल परिवहन कर प्रभावित गांव कस्बों तक पानी पहुंचाया जाएगा। - गंगाराम पारंगी, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, सांचौर

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