पाकिस्तान से इसलिए भारत पहुंच गई टिड्डी

पाकिस्तान से इसलिए भारत पहुंच गई टिड्डी
- 19 अगस्त और 19 सितंबर को सीमा पर हुई बैठक, अधिकारियों का पाकिस्तान की ओर सटीक जानकारी नहीं देने और सूचनाओं के आदान प्रदान में कमी से हालात बिगड़े

Khushal Singh Bhati | Updated: 23 Sep 2019, 11:24:22 AM (IST) Jalore, Jalore, Rajasthan, India


- 19 अगस्त और 19 सितंबर को सीमा पर हुई बैठक, अधिकारियों का पाकिस्तान की ओर सटीक जानकारी नहीं देने और सूचनाओं के आदान प्रदान में कमी से हालात बिगड़े

खुशालसिंह भाटी


जालोर. इस साल मई और जून में पाकिस्तान से भारत में टिड्डी दल के प्रवेश के बाद नियंत्रण दल ने उन पर काबू पा लिया था। चूंकि इस दौरान खेतों में फसलें नहीं थी इसलिए किसी तरह का नुकसान भी नहीं हुआ था। लेकिन अब बड़ी तादाद में बीकानेर, फलौदी, बाड़मेर के रास्ते भारत में पहुंचे मरु टिड्डी के बड़े दल ने परेशानी खड़ी कर दी है। चूंकि गुजरात सीमा क्षेत्र तक जालोर मंडल का विस्तार है इसलिए इस खतरे से जालोर टिड्डी मंडल भी अछूता नहीं है। फिलहाल टिड्डी नियंत्रण दल सक्रिय है, लेकिन शुरुआती दौर में बड़ा टिड्डी दल भारत में बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर और फलौदी के रास्ते खेतों पहुंच चुका है, जिससे फसलों को नुकसान भी पहुंचाया। देश में टिड्डी नियंत्रण के 10 सर्किल है, जिसमें जालोर भी एक है। मई और जून में जालोर में भी टिड्डी की संख्या नजर आई थी, जिसके बाद नियंत्रण दल ने काबू पा लिया था। अब एक बार फिर से भारत में मरु टिड्डी का प्रवेश हुआ है तो जालोर में भी नुकसान की आशंका है। स्थितियों पर प्रशासन और कृषि विभाग नजर रखे हुए हैं। हालांकि वर्तमान में जालोर का एक दल बीकानेर के सीमावर्ती क्षेत्र में हालात विकट होने से वहां भी तैनात है। इस दल में शामित सहायक निदेशक का कहना है कि जालोर जिले में हालात बिगड़ते हैं तो दल यहां भी पहुंच जाएगा।
1 किमी लंबा दल पहुंचा था
नियंत्रण दल का कहना है कि हर साल सीमा क्षेत्र में मुनावाब में इस मामले में बैठक होती है। लेकिन यह पाकिस्तान की ओर से सूचनाओं के लेन देन में कमी और निगरानी में कमी का ही कारण रहा कि सीमावर्ती क्षेत्र में इतनी बड़ी तादाद में टिड्डी की संख्या तैयार हो गई। जिसके बाद 1 किमी लंबा टिड्डी दल भारत में प्रवेश भी कर दिया। सीमावर्ती क्षेत्र में सेना के जवानों ने भी यह दल देखा और उसके बाद नियंत्रण दल को सूचना दी गई तो मोपिंग ऑपरेशन (नष्ट करने को) चलाया गया। टीम का कहना है कि यदि सीमावर्ती क्षेत्र में पाकिस्तान ने पहले ही ध्यान दिया होता तो टिड्डी की उड़ान से पहले ही उसे पाकिस्तान में ही नष्ट किया जा सकता था, जिससे भारत में खराबा नही होता। वर्तमान में भारतीय टिड्डी नियंत्रण का एक दल बीकानेर में रणजीतपुरा में तैनात है। यह सीमा क्षेत्र से मात्र 5 किमी की दूरी पर है।
भारतीय क्षेत्र में यह भी रही दिक्कत
नियंत्रण दल का कहना है कि टिड्डी के प्रवेश का स्थान फायरिंग रेंज के आस पास का है। जहां पर प्रवेश वर्जित है। ऐसे में यहां टिड्डी की मौजूदगी रही और उसके बाद बारिश का मौसम उनके लिए अनुकूल होने पर अंडे भी दिए और यहां टिड्डी की संख्या में इजाफा हुआ। दूसरी तरफ हालातों की सूचनाओं में आदान प्रदान में पारदर्शिता में कमी के चलते इसकी संख्या में बढ़ी और यह समूह में भारत में प्रवेश भी कर गया, जो नुकसान का कारण बना। टीम का कहना है कि टिड्डी को नष्ट किया जा रहा है, लेकिन उसके बाद अब भी टिड्डी का भारत में प्रवेश का क्रम जारी है।
हवा रुख भी बना सहायक
इन सभी हालातों के बीच मौसम भी इस बार टिड्डी के लिए अनुकूल साबित हुआ। यही कारण रहा कि पहले मई जून में ये भारत में प्रवेश कर गई, लेकिन उस समय इनकी संख्या कम रही। लेकिन उसके बाद फिर से सितंबर माह में भी तापमान में गिरावट के साथ हवा का रुख इनके लिए सहयोगी बना।
इनका कहना
सीमा क्षेत्र में टिड्डी ने अंडे दे रखे थे और इस पर सीमा क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर से ध्यान नहीं दिया गया। जिससे ये परिपक्व हो गए, जिसके बाद हवा का रुख भारत की ओर होने से टिड्डी ने भारत की सीमा में प्रवेश किया। इन्हें नष्ट करने का क्रम जारी है।
- बीआर मीणा, सहायक निदेशक, टिड्डी मंडल कार्यालय जालोर
मई माह में जालोर तक टिड्डी पहुंची थी, उस समय नष्ट कर दिया गया था। पाकिस्तान से फिर से राजस्थान के कई हिस्सों में टिड्डी पहुंची है। हवा का रुख सपोर्टिंग हुआ तो जालोर में भी इनकी उपस्थिति हो सकती है। जालोर जिले में भी विशेष एहतियात बरती जा रही है।
डॉ. आरबी सिंह, उप निदेशक, कृषि विस्तार, जालोर

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