वेदलक्षणा सत्संग, गोमहिमा कथा शुरू

वेदलक्षणा सत्संग, गोमहिमा कथा शुरू

Jitesh kumar Rawal | Updated: 12 Jun 2019, 12:04:41 PM (IST) Jalore, Jalore, Rajasthan, India

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सांचौर. गोधाम पथमेड़ा रजत जयंती समारोह के तहत स्वामी दताशरणानंद के सान्निध्य में मंगलवार को छठे वेदलक्षणा गोमहिमा सत्संग सप्ताह का शुभारंभ वृंदावन के कथाकार श्यामसुंदर पाराशर की ओर से गोमहिमा श्रीमद्भागवत कथा के साथ हुआ। कथा पोथी को गिरीराजधरण मंदिर से कथा मंच पर यजमान बलवंत कुमार पुरोहित अणखोल की ओर से सप्तनिक माथे पर धारण कर शोभायात्रा के रूप में लाया गया। शोभायात्रा में गोमहिमा गीतों की स्वर लहरियां गूंजायमान रही। प्रवक्ता पूनम राजपुरोहित ने बताया कि डॉ. ललित द्विवेदी के आचार्यत्व में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हुए। मंच संचालन डॉ. ऊदाराम वैष्णव ने किया। भगवत कथा के प्रथम दिन के यजमान अणखोल के पुरोहित ने सप्तनिक व्यास पूजा की गई। कथा शुभारंभ के समय गोपाल गोवर्धन गोशाला के सभी ट्रस्टियों ने पूज्य व्यासपीठ का पुष्प अर्पित कर पूजन किया। उल्लेखनीय है कि गोधाम में रजत जयंती समारोह के तहत ६ माह से हर महीने देश के नामी कथाकार गोमहिमा सत्संग सप्ताह कथा का वाचन कर रहे हैं। इसी कड़ी में ११ से १७ जून तक छठी कथा हो रही है। कथा का समय प्रतिदिन सुबह ९.३० से १२.३० बजे तक है। सभी आगन्तुक श्रद्धालुओं के लिए कथा के दौरान शीतल जल, नींबू पानी व छाछ का वितरण किया जा रहा है। सुबह कथा से पूर्व सभी के लिए पंचगव्य निर्मित अल्पाहार और कथा समापन पर महाप्रसादी का प्रबंध किया गया है। कथा शुुभारंभ पर सिया वल्लभदास महाराज, नंदरामदास महाराज, मुकुंदप्रकाश महाराज, गणेश महाराज, ऋषिचैतन्य महाराज व भक्त छोगाराम माली मौजूद थे। इस मौके धन्नाराम चौधरी, कस्तूर जोशी, केशाराम सुथार, मेघराज मोदी, सत्यनारायण चंपाखेड़ी, नागजी चौधरी, धर्मशरण शर्मा, दिनेशकुमार दांतिया, अंबालाल बिच्छावाड़ी, मुकुंदराम विश्नोई, भंवर पुरोहित, ऊदाराम चौधरी, धूड़ाराम चौधरी व अमराराम पुरोहित समेत सेवा कार्यों में रहे।
सत्संग प्रभु तक पहुंचने का जहाज
व्यासपीठ से कथावाचक पाराशर ने कथा के दौरान कहा कि ईश्वर सबमें विराजमान है, लेकिन उन्हें जागृत करने के लिए सत्संग की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि जैसे माचिस की तिली में ऊर्जा विद्यमान होकर भी घर्षण के बिना अग्नि का प्राकट्य संभव नहीं होता। ठीक उसी तरह परमात्मा हमारे बीच होकर भी हम उनका सत्संग के बिना साक्षात्कार नहीं कर पाते। उन्होंने सत्संग को प्रभु तक पहुंचने का जहाज बताते हुए कहा कि इसमें भावपूर्ण सवार होने वाला भवसागर से पार हो जाता है।

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