VIDEO : जहां हाइवे पर दौड़ेंगे लड़ाकू विमान, वहां की अधिकांश सडक़ें तौबा-तौबा

- सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है जालोर जिला- गुजरात और पाकिस्तान से लगती है सीमा- आपात स्थितियों में बदहाल सडक़ों से हो सकती है मुश्किल

By: Suresh Hemnani

Published: 11 Sep 2021, 05:14 PM IST

-राजेन्द्रसिंह देणोक
जालोर। राष्ट्रीय राजमार्ग-925 ए पर नवनिर्मित आपातकालीन हवाई पट्टी पर एक दिन पहने यानी गुरुवार को जब भारतीय वायुसेना के सुखोई, जगुआर और हरक्यूलस जैसे विमानों ने लैंडिंग और टेक ऑफ किया तो गर्व से सीना चौड़ा हो गया था। सरहद पर देश का यह पहला हाइवे है जिसका लैंडिंग के रूप में उपयोग किया गया। वैसे तो एनएच-925 ए सैन्य गतिविधियों के लिए कारगर साबित होगा, लेकिन लड़ाकू विमानों के लिए आपातकालीन लैंडिंग सुविधा उपलब्ध कराने का इतिहास रचने वाला जालोर जिले का अंदरूनी इलाका खुद सडक़ों की बदहाली का दंश झेल रहा है।

हाइवे से कुछ दूरी पर निकलते ही हमारा यह गौरव चूर-चूर हो जाता हैं। सामरिक दृष्टि से अहम जालोर जिले की अधिकांश सडक़ें बदहाल ही नजर आई। सडक़ें ऐसी है कि इन पर पैदल चलना भी आसान नहीं है। पत्रिका टीम ने आपातकालीन लैंडिंग पट्टी जाने के लिए रोहट से जालोर, भीनमाल, सांचौर समेत कई इलाकों का दौरा किया तो सडक़ों की कुछ ऐसी ही दुर्दशा सामने आई।

यों समझें हालात
-जालोर से सांचौर की दूरी 150 किलोमीटर है। यदि 70 की स्पीड से वाहन चलाए तो करीब ढाई घंटे में यह दूरी तय की जा सकती है। लेकिन अभी चार से पांच घंटे का समय लग रहा है।
-रोहट से जालोर और भीनमाल तक का सफर भी बेहद पीड़ादायक है।
-भीनमाल से रानीवाड़ा और सांचौर जाने के लिए हाइवे की बजाय अन्य मार्ग से निकलना वाहन चालकों की मजबूरी हैं।
-वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम विश्नोई के सांचौर विधानसभा क्षेत्र की सडक़ें भी टूटी हुई है।

कांग्रेस-भाजपा नेता भी ‘लाचार’
सडक़ों की स्थिति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि भाजपा और कांग्रेस के नेता खुद लाचार बने हुए हैं। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री पुखराज पाराशर, नैनसिंह राजपुरोहित, सवाराम पटेल समेत कई नेताओं ने पिछले दिनों से जिला कलक्टर के समक्ष दर्द बयां कर चुके हैं। आहोर विधायक छगनसिंह राजपुरोहित को धरने पर बैठना पड़ा था। इसके अलावा ग्रेनाइट उद्यमियों और सामाजिक संगठनों ने कई बार आवाज उठाई, लेकिन समस्या यथावत है।

आपातकालीन लैंडिंग हाइवे के निकट ये सडक़ें बदहाल
-आरवा से सांचौर : 60 किलोमीटर
-कुंडकी से चितलवाना :17 किलोमीटर
-हालीवाव से से मेगावा : 5 किलोमीटर
-सेसावा से अरणिया : 10 किलोमीटर
-डूंगरी से टांपी : 13 किलोमीटर
-सेसावा से दूठवा : 8 किलोमीटर
-वेडिया से खेजडिय़ाली : 9 किलोमीटर
(ये सडक़ें हाइवे से जुड़ते हुए और 5 से 10 किलोमीटर की परिधि में है)

ये मार्ग भी बदहाल
-रोहट से जालोर तक स्टेट हाइवे
-भीनमाल से सांचौर
-भीनमाल से करड़ा
-भीनमाल से मिठीबेरी तक
-नरसाणा से डूंगरी (एमवीआर रोड)
-झाब से सिवाड़ा
-दूठवा से होतीगांव
-रणोदर से सिवाड़ा
-मालवाड़ा से मिठीबेरी
-सेसावा से माणकी

ध्यान नहीं देते अधिकारी
सडक़ बनाने के काम आने वाले गिट्टी पानी सौंखती नहीं है। इस कारण सडक़ें जल्दी टूटती है। अधिकारियों को लेब टेस्टिंग के बाद ही पानी और गिट्टी का उपयोग करना चाहिए। ठेकेदारों को काफी कम दरों में टेंडर दे दिया जाता है। सडक़ों की बदहाली का यह भी एक बड़ा कारण है। -सुखराम विश्नोई, वन एवं पर्यावरण मंत्री

Suresh Hemnani
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