मां ने किडनी देकर दी नई जिंदगी, अब चला रहे जागरूकता अभियान

Dharmendra Ramawat

Publish: Mar, 14 2019 06:32:48 PM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

वींजाराम डूडी
संाचौर. किडनी मनुष्य का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है, किन्तु स्वास्थ्य की देखभाल के अभाव में किडनी को लेकर कई प्रकार की बीमारियों के प्रकरण सामने आते है। जिसको लेकर सांचौर क्षेत्र में भी किडनी रोगियों के कुछ मामले में प्रकाश में आए है। ऐसे में प्रकरणों में किडनी ट्रांसप्लांट के बाद संबंधित मरीज अब स्वस्थ जिंदगी जी रहे है। वैसे तो किडनी की बीमारी को लेकर लोगों में भ्रांतियां है। जानकारी के अभाव में किडनी के रोगी सही जांच व समय पर इलाज नहीं लेने से महंगे इलाज के बीच कई बार रोगी की मौत तक हो जाती है। लेकिन जागरूकता के चलते कई मरीज किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अब स्वस्थ जीवन जी रहे है।
अब जी रहे सामान्य जिन्दगी
सांचौर के महेन्द्रसिंह राव जिनको करीब एक साल पूर्व 5 मई 2018 को अहमदाबाद में किडनी विशेषज्ञ की ओर से किडनी ट्रासप्लांट की गई थी। उन्हें उनकी माता ने किडनी प्रदान की थी। वे अब स्वस्थ जीवन जी रहे है।
मां ने दूसरी जिन्दगी दी
सांचौर निवासी महेन्द्रसिंह राव की किडनी में संक्रमण होने के बाद किडनी विशेषज्ञों ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी। इस दौरान परिवार के समक्ष भी चुनौती पैदा हो गई। आखिर किडनी डोनेट कौन करेगा। जिस पर महेन्द्रसिंह की 65 वर्षीय माता मोहन देवी ने आगे आकर किडनी दान दी। इस दौरान चिकित्सकों ने डोनेट में ली जाने वाली किडनी की जांच की तो किडनी मेच हो गई। उन्होंने विपरित परिस्थति में किडनी देकर बेटे को नई जिन्दगी दी। जिसमें मां के साथ-साथ बेटा भी स्वस्थ्य सामान्य जिन्दगी जी रहा है।
ऐसे होती है किडनी की बीमारी
किडनी में दो तरह की बीमारियां होती है। पहला एम्यूट किडनी डिजिज जो अचानक होती है। जिसमें किडनी में कार्यक्षमजा तेजी से घटने लगती है। शरीर में किसी तरह का संक्रमण उल्टी, दस्त, मलेरिया, एचआईवी, सकं्रमण, दर्द निवारक दवाए लेने से, ब्लड प्रेसर, डायबिटीज की बीमारी एवं उतार चढ़ाव के कारण एम्यूट किडनी डिजेज की समय पर पहचान व इलाज से मरीज ठीक हो सकता है। वहीं क्रॉनिक किडनी डिजीज ठीक नहीं होने वाली बीमारी है। शुरूआत में कोई लक्षण नहीं दिखता। इसमें रक्त यूरिया, सिरम क्रिएटिनिन बढऩे लगता है। बीमारी की स्थिति के अनुसार इलाज करते है। दवाओ से रोगी की किडनी में बढऩे वाले संक्रमण को रोका जाता है। स्थिति के अनुसार डायलिसिस करते है। खान-पान में परहेज एवं दवाइयों से किडनी के संक्रमण को कम किया जा सकता है, पर रोका नहीं जा सकता। मरीज के रक्त में यूरिया एवं क्रिटिनिन की मात्रा बढऩे से किडनी फैल होने का खतरा बढ़ जाता है।
महिलाओं में यह कारण
महिलाओ में महावारी या प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव होना किडनी रोग का बड़ा कारण है। अधिक रक्तस्राव से ब्लड प्रेसर कम हो जाता है। इससे किडनी में रक्त प्रवाह बंद होने से किडनी खराब हो जाती है। यह शरीर में प्रवाहित 20 से 25 फीसदी रक्त को शुद्ध करने का काम करती है। यह प्रक्रिया बंद होने पर किडनी डेड हो जाती है।
किडनी रोग से बचाव
किडनी में संक्रमण या उक्त बीमारी होने के बाद रोगी को खान-पान पर नियंत्रण पहली आवश्यकता हो जाती है। जिसमें रोगी को प्रतिदिन १ से डेढ लीटर तक पानी पीना होता है। भोजन के दौरान प्रोटीन वाली भोजन सामग्री का उपयोग नहीं करना, जंग फुड , सॉफ्ट ड्रिंक, नमक , धूम्रपान, मदिरा सेवन व बीपी कन्ट्रोल को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।
इनका कहना...
किडनी रोग से बचाव के लिये रोगी को खान-पान नियंत्रण के साथ- साथ किडनी रोग की जांच बेहद जरूरी है। वहीं किडनी रोग के लक्षण पाये जाने पर विशेषज्ञ से उचित परामर्श व नियमित इलाज के साथ परहेज मुख्य प्राथमिकता रहती है।
- डॉ. देवांग पटवारी, किडनी रोग विशेषज्ञ
किडनी में संक्रमण होने से परेशानी पर जांच के दौरान विशेषज्ञों द्वारा किडनी ट्रासप्लांट का सुझाव दिया था। जिस पर मेरी मां ने किडनी डोनेट की थी। जिसके बाद अब मैं पूर्ण रूप से स्वस्थ हूं और सामान्य जिन्दगी जी रहा हूं। इस रोग से बचाव के लिए समय- समय पर किडनी की जांच अवश्य करवानी चाहिए। किडनी रोग को लेकर मैं जागरूकता अभियान भी चला रहा हूं।
- महेन्द्रसिंह राव

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